Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

चोर नचाये मोर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 25, 2020
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

चोर नचाये मोर

‘जब रोम जल रहा था तब नीरो बंशी बजा रहा था’, यह एक पुरानी कहावत है, जो एक पागल और निकम्मा शासक का प्रतीक बन गया था. परन्तु, यह कहावत भी भारत के आधुनिक पागल और निकम्मा शासक नरेन्द्र मोदी के सामने तुच्छ साबित हो गया है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

पिछले 6 सालों से नोटबंदी, जीएसटी आदि के जरिए देश के नागरिकों को लूटने-खसोटने के साथ-साथ देश भर में जिस तरह हत्या और बलात्कार का बाजार सजा दिया है, उसी का परिणाम है कि आज देश के करोड़ों लोग बेरोजगार हो गये, हजारों लोग भूख से मर गये, हजारों लोगों ने आत्महत्या कर लिया और करोड़ों लोग दरबदर की ठोकरें खा रहा हैं.

एनआरसी-सीएए जैसे जनविरोधी कानूनों के जरिए लोगों को तंग-तबाह करने का पूरा इंतजाम किया और लोग उसके विरोध में सड़क पर न उतर सके, इसके लिए लॉकडाऊन जैसा आपातकाल लगाकर पुलिस द्वारा सरेआम बेईज्जत करने से लेकर पीट-पीटकर मार डालने अथवा फर्जी मुकदमों में फंसाकर जेल भेजने का उपक्रम यह पागल और हत्यारी नरेन्द्र मोदी सरकार ने किया है.

यह पागल और हत्यारा नरेन्द्र मोदी इस कदर निर्लज्ज और मगरुर है कि जब सारे देश के लोग रो-बिलख रहे हैं, पैसे-पैसे को मोहताज हो गये हैं, दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गये हैं, सीमा पर नेपाल समेत तमाम पड़ोसी राष्ट्रों के साथ विवाद पैदा कर लिया है और सेना सीमा पर मर रहे हैं, तब यह पागल हत्यारा नरेन्द्र मोदी वन्यजीव मयूर को दाना खिलाने का तमाशा कर देश के लोगों का मजाक उड़ा रहा है.

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. कृष्ण कांत सोशल मीडिया पर लिखते हैं, ‘रोमन शासक कहते थे कि लोगों को रोटी नहीं दे सकते तो उन्हें सर्कस दो.’ वे आगे लिखते हैंं –

महामारी की दस्तक से सहमी हमारी जनता ने भी रोटी और परिवहन मांगा था. उस समय सरकार ने कहा कि दूरदर्शन पर रामायण और महाभारत देखो. हजारों ट्रेंनें और बसों के बेड़े खड़े रहे, लोग पैदल भागकर जान गंवाते रहे. अंतत: जनता ने या तो खुद अपनी जान बचाई या जान गवां दी.

सरकार ने पहले कहा ताली बजाओ, फिर कहा दिया जलाओ. फिर कहा अब घर में रहो, 21 दिन में सब ठीक हो जाएगा. फिर कहा कि अब इसी के साथ जीना पड़ेगा. अब तक 30 लाख से ज्यादा केस हो चुके हैं और 56 हजार से ज्यादा लोग जान गवां चुके हैं.

इस सर्कस में कई करोड़ की संख्या में लोग बेरोजगार हो गए. कोरोना काल के पहले ही करीब पौने चार करोड़ लोग अपना रोजगार गवां चुके थे. वह महानतम सर्कस नोटबंदी का दूरगामी असर था. सोने पर सुहागा ये मुआ कोरोना आ गया.

तमाम रिपोर्ट हैं कि बेरोजगारी 45-50 साल के उच्चतम स्तर पर है. अर्थव्यवस्था 1951 की स्थिति में चली गई है. बेरोजगारी के साथ गरीबी और भुखमरी बढ़ रही है. देश के सभी कोर सेक्टर या तो डूबने की हालत में हैं या फिर मंदी से जूझ रहे हैं.

कोरोना संकट के दौरान सैकड़ों लोग भूख से, पैदल चलकर मरे हैं. इन मुसीबतों के दौर में हमारे प्रधानमंत्री मोर को दाना चुगा रहे हैं.

वहीं, अनिल कुमार रार लिखते हैं, प्रधानमंत्री ने आवासीय परिसर में मोर के साथ अपना फोटो खिंचवाकर एक कविता भी शेयर की है. कविता पर तो कुछ नहीं कहना है, क्योंकि रस, लय, वस्तु – किसी भी दृष्टि से उसे कविता कहना अपनी आस्वाद्यता पर सवाल खड़े कर लेना है.

https://twitter.com/narendramodi/status/1297445645075136512

लेकिन सवाल आवासीय परिसर में मोर रखने पर है. मेरी जानकारी के मुताबिक वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के मुताबिक आवासीय परिसर में वन्य जीवों को रखना अवैध और दंडनीय है. जितनी निकटता के साथ वह मोर उनके मुखचंद्र की शोभा पर मंत्रमुग्ध है, उससे उसके वन्य होने पर विश्वास नहीं किया जा सकता है. सीढ़ियों पर बैठा महाकवि भी उतनी ही तन्मयता के साथ बिना कलम के काव्य-रचना में लीन है.

बहुत शोर मचने पर यह भी जानकारी दी जा सकती है कि मोर प्रधानमंत्री बिना नहीं रह पाते हैं और उड़कर भेंट करने आ जाय करते हैं. मोरों के इसी निश्छल प्रेमाघात के कारण राजनीति की हृदयहीन चट्टानों से महाकवि की काव्य-सरिता उच्छल आवेग के साथ बह पड़ती है. फिर सारे टीवी, अखबार वालों के द्वारा अनेक स्वरों में महाकवि के काव्यपाठ का जबरन रसास्वादन कराया जाएगा और इस कोलाहल में इसका कानूनी पक्ष कहीं सुबककर सो जाएगा.

दरअसल, मयूर के साथ तस्वीरें खींचना नरेन्द्र मोदी के सर्कस का नया आयटम है. इससे पहले वह नोटबंदी के समय अपनी 90 वर्षीय बुढिया मां को बैंक के लाईन खड़ा कर अपनी भद्द पीट चुका था. कल सर्कस के तमाशा में उसकी बुढिया मां थी और आज वन्यजीव मयूर है.

नीरो के तर्ज पर इस पागल निर्लज्ज शासक मोदी का तमाशा जारी है. बस देखना केवल यही है कि आखिर कबतक तमाशा देखकर ताली-थाली बजाने वाले लोग खुद को और अपने बच्चों को भूख और बीमारी से मरते देखते रहेंगे ?

Read Also –

हारे हुए नीच प्रतिशोध की ज्वाला में जलते हैं
रेल का निजीकरण : लोक की रेल, अब खास को
बस आत्मनिर्भर बनो और देश को भी आत्मनिर्भर बनाओ
भारतीय रेल अंध निजीकरण की राष्ट्रवादी चपेट में
आरएसएस का गुप्त षड्यंत्र और सुप्रीम कोर्ट का पतन – 1

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

 

Previous Post

प्रशांत भूषण प्रकरण : नागरिक आजादी का अंतरिक्ष बनाम अवमानना का उपग्रह

Next Post

‘नीरो एंड कंपनी’ के लॉकडाऊन-अनलॉक का मकसद

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

'नीरो एंड कंपनी' के लॉकडाऊन-अनलॉक का मकसद

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

मैं जश्न तब मनाऊंगा जब हर आंख से आंसू पोंछ दिया जाएगा – हिमांशु कुमार

August 15, 2022

हमने प्रकृति, समाज और विज्ञान हर चीज को बदला है और आगे भी बदलते रहेंगे

March 2, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.