मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात यह...
Read moreDetailsइतिहास तो आगे ही बढ़ता है... ’माओवादियों के पुतले जलाते लोग’ अपने टैबलेट पर अखबार की हेडलाइन पढ़ते हुए सुधा...
Read moreDetailsसवाल 15 अगस्त के दिन, मोती और चिकारा स्कूल भ्रमण पर निकले. मोती: (छात्रों को देखते हुए) बच्चों ! आज...
Read moreDetailsदो टांग वाला गधा एक गधा था. इसे विधि की विडंबना कहिए या कुछ और कि उसके दो पैर और...
Read moreDetailsएक छोटे गांव में एक विधवा स्त्री पेलाग्रे रहती थी, जिसका बेटा पावेल मजदूरों की हड़ताल में शामिल हो गया...
Read moreDetailsमुखबिर की खबर पर, पुलिस बल थाने से निकला. सशस्त्र जवानों ने जंगल में उजाड़ खंडहर घेर लिया. एसपी साहब...
Read moreDetailsएक अप्रवासी भारतीय काफी समय बाद भारत वापस लौटता है. एयरपोर्ट पर उतरते ही उसको लेने आये अपने भाई से...
Read moreDetailsमैंने आदिवासी से पूछा - ‘तुम्हारे घर में दरवाज़ा नहीं है ? क्या इधर चोर नहीं आते ?' उसने कहा...
Read moreDetailsएक बादशाह के दरबार में एक अजनबी नौकरी की तलब के लिए हाज़िर हुआ. क़ाबलियत पूछी गई तो कहा, 'सियासी...
Read moreDetails'साहब ये बैल है, वकील नहीं !' एक वकील साहब को यह देखकर हैरत हुई कि बैल बैलगाड़ी खींच रहा...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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