Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

गरीब आदिवासियों को नक्सली के नाम पर हत्या करती बेशर्म सरकार और पुलिस

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 2, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

2012 मे जब खबर आयी थी कि सुरक्षा बलों ने 17 नक्सलियों को मार गिराया तो पूरे देश ने सुरक्षा बलों की पीठ थपथपाई थी. मीडिया ने जी भर के सुरक्षा बलों के शौर्य का गुणगान किया था और सुरक्षा बलों ने लाशों के आगे खड़े होकर फिल्मी स्टाइल मे फोटो भी खूब खिचवाये थे. आज ये साबित हो चुका है कि सुरक्षा बलों के हाथों मारे गये लोग नक्सली नहीं बल्कि गरीब किसान थे, जिनको किसी मुठभेड़ में नहीं बल्कि पास से सिर में गोली मार कर मारा गया था. कुछ लोग जो मृतप्राय अवस्था में सांसे ले रहे थे, उसे कुल्हाड़ी या तेज धारदार हथियारों से पुलिस ने काट डाला था. पेश है प्रसिद्ध गांधीवादी सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु कुमार की रिपोर्ट.

गरीब आदिवासियों को नक्सली के नाम पर हत्या करती बेशर्म सरकार और पुलिस

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

छत्तीसगढ़ में भाजपा सरकार ने मिट्टी की पूजा का त्यौहार मनाते समय 17 आदिवासियों को चारों तरफ से घेर कर गोलियों से भून दिया था. मारे गए लोगों में नौ छोटे बच्चे थे. इस मामले में आदिवासियों की सबसे ज्यादा मदद करने वाली महिला वकील सुधा भारद्वाज आज जेल में बंद है. छत्तीसगढ़ के भाजपाई मुख्यमंत्री रमन सिंह ने तब मीडिया को बताया था कि मारे गए लोग नक्सलवादी हैं और उन्होंने पुलिस पर हमला किया था. अब उस मामले की जांच रिपोर्ट आ गई है

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां कोई नक्सलवादी मौजूद नहीं था. पुलिस ने चारों तरफ से गोली चलाकर निर्दोष आदिवासियों की हत्या करी थी. भाजपा का हत्यारा मुख्यमंत्री रमन सिंह आपत्ति व्यक्त कर रहा है और कह रहा है कि जांच रिपोर्ट मीडिया को लीक क्यों करी गई इसे सिर्फ विधानसभा में ही पेश किया जाना चाहिए था. इस तरह के खेल पहले भी खेले जाते रहे हैं

आपको याद होगा मुंबई में मुसलमानों के खिलाफ जो दंगा हुआ था उसकी जांच के लिए श्रीकृष्ण आयोग बनाया गया था. उस आयोग की रिपोर्ट में दंगाइयों के नाम दिए गए थे. सरकार ने आज तक उस रिपोर्ट को प्रकाशित नहीं किया है. अब यह भाजपा का मुख्यमंत्री रमन सिंह भी चाहता था कि इसने जो आदिवासियों को मरवाया था वह जांच रिपोर्ट भी दबा दी जाए.

रमन सिंह के बेटे अभिषेक सिंह के पास इतना पैसा है कि उसे वह स्विस बैंक और पनामा में लगाता है. यह पैसा उसे बड़ी कंपनियों ने दिया था ताकि वह आदिवासियों की जमीनें छीन कर उन्हें दे दे. भाजपा आदिवासियों की जमीन छीनने के लिए उन्हें मरवा रही थी. आप देख सकते हैं कि हिंदू धर्म को बचाना, राष्ट्र की सेवा, राष्ट्रवाद यह महज़ जुमले हैं. असली मकसद पैसा कमाना है.

अमीर पूंजीपतियों के लिए देश की जमीने, खदानें, समुद्र तट, जंगल, नदियां और पानी बेचकर यह राजनीतिक पार्टियां और उनके नेता, अधिकारी तथा पुलिस वाले पैसा कमाते हैं और आप सोचते हैं कि यह लोग देश की सेवा कर रहे हैं, राष्ट्र को बचा रहे हैं, हमारे धर्म को बचा रहे हैं, दूसरे धर्म वालों को टाइट कर रहे हैं ? आपसे ज्यादा नादान कौन होगा ?

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक गांव है. उस गांव का नाम है सारकेगुड़ा. उस गांव में कुछ साल पहले भारत सरकार की केंद्रीय पुलिस सीआरपीएफ ने जाकर 17 आदिवासियों को गोली से उड़ा दिया था. इन 17 मारे गए लोगों में 9 बच्चे थे, जिसमें एक बच्चा गणित में स्वर्ण पदक विजेता भी था. एक बच्ची थी जिसे स्कूल जाना पसंद नहीं था उसे खेत की मेड़ों पर दौड़ना और चिड़ियों के पीछे भागना पसंद था. इन सब बच्चों को गोली से उड़ा दिया गया.

केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी. प्रदेश में भाजपा की सरकार थी. दोनों सरकारों ने मिलकर झूठ बोला और कहा कि मारे गए लोग नक्सलवादी थे. हम लोगों ने शोर मचाया. मैंने सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन डाली. एक जज की अध्यक्षता में जांच आयोग बिठाया गया. अब उस जांच आयोग की रिपोर्ट आई है.

जांच आयोग ने अपने फैसले में कहा है कि मारे गए लोग निर्दोष थे. वहां कोई नक्सली या माओवादी नहीं था. पुलिस ने चारों तरफ से गोली चलाई थी इसलिए पुलिस वालों की गोली पुलिस को ही लगी थी.

हम लोगों ने शुरू से यही कहा था लेकिन सरकार और सरकार के चापलूस लोगों ने हमें देशद्रोही नक्सल समर्थक अर्बन नक्सल कहकर चुप करा दिया था. अब न्यायाधीश की रिपोर्ट आ चुकी है. मुझे बिल्कुल विश्वास नहीं है कि सरकार दोषी सिपाहियों को कोई सजा देगी. उस वक्त गृहमंत्री चिदंबरम था.

उसने बयान दिया था की हमारे सुरक्षा बलों को माओवादियों के विरुद्ध एक बड़ी सफलता मिली है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भाजपा के रमन सिंह ने कहा था कि मारे गए लोग माओवादी थे. चिदंबरम आज जेल में है. रमन सिंह सत्ता से बाहर है. हमारे साथी मानव अधिकार के मुद्दे उठाने के कारण जेलों में है.

आदिवासी लगातार उसी तरह मारे जा रहे हैं. राष्ट्रवाद का शोर है. मुसलमानों को दुश्मन घोषित कर दिया गया है. हम अपनी बेरोजगारी, किसानों की तबाही, मजदूरों की तबाही, आदिवासियों का मारा जाना, सबको भूल भाल कर अमित शाह जैसे गुंडे के द्वारा मुसलमानों के खिलाफ भड़काई गई नफरत में मजा ले रहे हैं. हमारे जैसा आत्मघाती खुद को बर्बाद करने में मजा लेने वाला बेवकूफ समाज दूसरा नहीं होगा.

सारकेगुड़ा में 17 आदिवासियों को गोली से उड़ाने के बाद सरकार ने एसडीएम को राहत सामग्री लेकर भेजा था.  गांव की आदिवासी लड़की कमला ने एसडीएम को  लताड़ लगाई थी. आप भी सुनिए. आज सुबह मेरी कमला से बात हुई है. इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद अब हम लोग आगे की कार्रवाई के लिए रणनीति बना रहे हैं.

http://www.pratibhaekdiary.com/wp-content/uploads/2019/12/10000000_804499086665770_3606685442352611328_n.mp4

 

Read Also –

छत्तीसगढ़ : आदिवासी युवाओं को फर्जी मुठभेड़ में मारने की कोशिश का विरोध करें
संविधान, दलित और अम्बेदकर
क्या आपको लाशों का लोकतंत्र नज़र आ रहा है ?
‘भारतीय पुलिस गुंडों का सबसे संगठित गिरोह है’
बच्चों को मारने वाली सरकार आज बाल दिवस मना रही है

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

भयावह होती बलात्कार की घटना

Next Post

देश को धोखा दे रही मोदी सरकार

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

देश को धोखा दे रही मोदी सरकार

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्या कांग्रेस आत्महत्या के मूड में है ?

January 8, 2020

सेना का राजनीतिकरण !

December 9, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.