
देश भर में बिखरे हुए जनता के हितों के बारे में सोचने वाले लोगों ने अपनी बातों को जनता तक पहुंचाने के लिए फिल्म उद्योग का सहारा लेते हुए अपने विचारों को आम लोगों तक पेश करने का बेहतरीन प्रयास किया है. फिलहाल यह फिल्म अभी अपने निर्माण की प्रक्रिया में है. इसके अनेक शाॅट्स इसके फिल्मांकन इसके विचारों को अभिव्यक्त करता है. फिल्म के निर्माण की प्रक्रिया में तमाम कलाकारों का जोश और उत्साह देखते बनता है. जैसा कि फिल्म के नाम – उलगुलान – से ही साफ हो जाता है कि फिल्म बिरसा मुंडा, तिलकामांझी के जन-आन्दोलन से प्रेरित है. पर यह आपको खींचते हुए वर्तमान तक ले आता है. इसके साथ ही यह फिल्म देश भर में चल रहे जन-आन्दोलन के साथ भी बखूबी जोड़ता है.
फिल्म का लेखन-कार्य जबलपुर मध्य प्रदेश के प्रख्यात एवं लोकप्रिय चिंतक समर सेनगुप्ता ने किया है. इसके साथ ही वे फिल्म के निर्देशन का भी भार सफलतापूर्वक उठाये हैं. फिलहाल तो फिल्म के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी है, पर जनवादी आन्दोलन के ऊपर केन्द्रित इस फिल्म का देश के तमाम जनवादी लोगों और देश की जनता भी बेहद अधीरता के साथ प्रतीक्षा कर रही है.
जब तक फिल्म पूरी नहीं होती है, आईये हम इसके कुछ शाॅट्स से ही संतुष्ट हो लें –

बचपन में बिरसा मुण्डा अपने बाल सखाओं के साथ

अंग्रेज गवर्नर

रात्रि में आग जलाकर विमर्श करते क्रांतिकारी छापामार योद्धा

युवाओं के बीच में

हमला करने के लिए तैर कर नदी पार करते छापामार योद्धा

युद्ध की रणनीति बनाते छापामार योद्धा

परिवार के बीच

योद्धाओं को युद्ध के लिए ललकारते

अंतिम क्षण
फिल्म का नाम – ‘उलगुलान स्वतंत्रता संग्राम की महागाथा’, अभिजात्य इतिहास ने जिन्हें ख़ारिज कर दिया पर हमारे रगों में है. हमारे पूर्वज 18वीं सदी से लड़ रहे हैं. बाबा तिलका मांझी हमारे प्रथम शहीद हैं. हमारे पूर्वज न सिर्फ विदेशी हुकूमत के खिलाफ लड़े बल्कि देशी शोषक वर्ग के खिलाफ लड़े. अभिजात्य इतिहास ने हमारे इस प्रयास का मूल्यांकन किया? कभी नहीं. बाबा तिलका मांझी। सिधू-कान का हूल बिरसा का उलगुलान ही सिर्फ नहीं. भारत के इतिहास में भील विद्रोह, छत्तीसगढ़ का वीरनारायण का उल्लेख ही नहीं है.
क्षमा के साथ कहना है कि फिल्म का पुरा नाम है ‘उलगुलान : स्वतंत्रता संग्राम की महागाथा’
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