Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

अब आंदोलन की राह पर

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 23, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अब आंदोलन की राह पर

गुरूचरण सिंह

आंदोलन यानि हलचल, उथल-पुथल ! बाहरी हलचल या उथल-पुथल से पहले जरूरी होता है वह उथल-पुथल आपकी चेतना को अशांत कर दे, आपका अंतर्मन को मथ जाए, अनेक सवालों से बेंध जाए, लगे कुछ तो ऐसा हुआ है जिसके चलते अचानक शांत सरोवर में तरंगे उठने लगी हैं और कार्य- कारण का संबन्ध समझ में आते ही आप प्रतिकार की मुद्रा में आ जाते हैं.  NRC और CAB (अब CAA) ने बिल्कुल यही किया है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

हमारे चुने गए नुमाइंदों के जरिए हमारे मन की यह उथल- उथल संसद में भी प्रतिध्वनित होगी, यह हलचल देश की सबसे बड़ी पंचायत में भी दिखाई देगी, ऐसी उम्मीद की जाती है लोकतंत्र में. लेकिन जब आपके यही नुमाइंदे इसकी उपेक्षा करते हैं, संख्या बल से शोर मचा कर सागर के टापू जैसे छोटे से और चेतना से भी कमज़ोर विपक्ष को दबा देते हैं और अपने ग़लत काम को भी जनादेश के तर्क से सही ठहराते हैं तो सड़क पर उतरने के अलावा और कोई रास्ता ही नहीं बचता. संसद तब एक धर्म संसद में बदल जाए, आम आदमी की चिंताएं जब इस हवन की समिधा बन जाएं तो जनता जनार्दन को भी अपने रौद्र रूप के दर्शन करवाने पड़ते हैं. संस्कृति के पहरुए होने का दावा करने वाले ही जब उसकी धज्जियां उड़ाते लगें, उसकी आत्मा तक को भी घायल कर दें, ‘सर्वे भवंतु सुखिनः सर्वे संतु निरामया,सर्वे भद्राणि पश्यंतु मां कश्चित् दुख भाग भवेत्” की प्रार्थना रोज करने वाले लोग जब कुछ लोगों को इसके दायरे से बाहर कर दें तो फिर हमें कहना ही पड़ेगा : संसद में जब होती नहीं कोई भी चर्चा पसमांदा इंसान की, सड़क और चौपाल ही अब से होंगे इस देश की संसद नई !

आपकी शोर मचाती, मेजें थपथपाती संसद मौजूदा कानून में संशोधन करती है और कहती है, एक खास धार्मिक समुदाय के लोग यदि छ: साल से अधिक समय से शरणार्थी हैं तो वे यहां के नागरिक बन सकते हैं, बाकी लोग नहीं. इसी कैब का एक सगा बड़ा भाई भी है, NCR. वह कहता है हम किसी को भी देश नागरिक नहीं मानते. अगर आप ऐसा मानते हैं तो सबूत दिखाओ और हां, ये आधार कार्ड कोई सबूत नहीं है !

लेकिन हमें आप नागरिक नहीं मानते, ऐसा कहने से कैसे चलेगा ? किसी आरोपी को गुनहगार साबित करने की जिम्मेदारी तो सरकार की ही होती है न !! आप साबित करिए न कि हम नागरिक नहीं हैं ! गरीब जनता कहां से जुटाए सबूत !! मलकीयत के नाम पर तो जब उसके पास कुछ है ही नहीं तो मकान, दुकान, खेती की जमीन के काग़ज़ात कहां से लाए ? आधार से वोट लेने में तो आपको कोई खोट नहीं दिखाई देता !! फिर नागरिकता में वह खोटा सबूत कैसे हो जाता है ?

कुछ लोग केवल इसलिए NRC के पक्ष में भी खड़े हैं कि इससे मुसलमानों को सबक सिखाया जा सकेगा ? हर मोर्चे पर विफल सरकार का समर्थन वे अधभरे पेट के साथ इसलिए करते हैं कि वे विदेश से आए थे कभी और यहां के लोगों पर अत्याचार किया था. लेकिन विदेश से तो बहुत सी और कौमें भी आई थीं और उनमें से बहुत से लोग तो यहां भी रह गए थे. आप लोग खुद भी तो मध्य एशिया से आए थे !! भूल गए क्या ? बात निकलेगी तो बहुत दूर तलक जाएगी ! अकेले मुसलमान ही परेशान नहीं होंगे इससे, गरीब, दलित और आदिवासी भी इसकी जद में आ जाएंगे !

गरीब के पास तो रहने के लिए, अपना कहने के लिए कुछ होता ही नहीं, बहुधा एक झोंपड़ी तक नहीं होती, सीवर के पाइप में, फुटपाथ पर ही गुजर बसर करता है वह अक्सर ! कहां से लाएगा वह कोई भी ऐसा दस्तावेज ?

पीढ़ियों से जंगल में रहता आदिवासी भी कैसे साबित कर पाएगा कि जंगल की उस जमीन पर उसका ही मालिकाना हक है, मलकीयत के कोई दस्तावेज तो हैं नहीं उसके पास. फिर कैसे साबित करेगा वह अपनी नागरिकता ? बहुत से दलित और पिछड़े भी इसका शिकार बन सकते हैं, क्योंकि वे ही तो खेतिहर मजदूर होते हैं !

लेकिन ये सारे के सारे NRC के समर्थन में इसलिए खड़े हैं कि वे हिन्दू हैं और मोदी- शाह की जोड़ी उनके लिए विदेशी मुसलमानों से बदला ले रही है. बेवकूफी भरे इस बदले की भावना उन्हें कितनी भारी पड़ने वाली है, इसका अहसास उन्हें कतई नहीं है और आंदोलकारियों की एक जिम्मेदारी यह भी बनती है उन्हें जागरूक करें, बताएं इसका क्या नुकसान होने वाला है !

समझ में आने भर की देर है, ‘अतुलित बल धामा’ हनुमान की तरह अपनी ही शक्ति को भुला चुकी जनता को याद दिलाने का काम आंदोलनकारी जामवंतों को ही करना है. यही काम किया था गांधी जी ने नमक कानून को तोड़ते हुए; एक लंबी यात्रा की थी दांडी मार्च. गांव-गांव में अलख जगाया था, सोते हुओंं को जगाया था, उठ जाग मुसाफिर भोर भई ! आम आदमी को बताया था, कैसे नमक जैसी मामूली रोजाना इस्तेमाल की चीज पर भी टैक्स लगा दिया था लूटेरों ने. तभी वे कह पाने की स्थिति में होंगे, ‘मत मानिए हमें नागरिक, हम भी कहां मानते हैं तुम्हें अपनी सरकार ? तुम अगर हमारी बात नहीं मानते, अपनी मनमर्जी को हमारा हित बता कर हमारे ही खिलाफ इस्तेमाल करते हो, तो हम भी ऐलान करते हैं कि तुम्हारे किसी फरमान को हम नहीं मानेंगे, कोई टैक्स नहीं देंगे, कोई भी जोर-जबरदस्ती बरदाश्त नहीं करेंगे ! ‘

तुम्हें अपनी मंजिल मुबारक, लेकिन अब से हमारी राहें अलग हैं, तुम्हारे किसी भी पाप के भागीदार अब हम नहीं है — यह ऐलान है सड़क और चौपाल की संसद का !

Read Also –

देश को खून में डूबो रहा है मोदी-शाह की जोड़ी
अन्त की आहटें – एक हिन्दू राष्ट्र का उदय
अमर शहीद अशफ़ाक़ उल्ला खान
भारतीय फासीवाद के हजारों चेहरे
कौम के नाम सन्देश – भगतसिंह (1931)
CAA और NRC देश के हर धर्म के गरीबों के विरुद्ध है

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

हिन्दू-मुस्लिम एकता के जबर्दस्त हिमायती अमर शहीद अशफाक और बिस्मिल का देशवासियों के नाम अंतिम संदेश

Next Post

‘एनआरसी हमारी बहुत बड़ी गलती है’

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

'एनआरसी हमारी बहुत बड़ी गलती है'

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

हिंदी दिवस की तरह ही संविधान दिवस भी मुबारक

November 26, 2018

लोहिया को समझने की कोशिश

November 19, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.