‘‘गरीब-गुरबों को 10 रूपया दे दो पर अच्छी शिक्षा कभी मत देना’’, भारत का सामंती मिजाज शासक वर्ग
‘‘हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देंगे तो वे राष्ट्र निर्माण स्वयं कर लेंगे’’, मनीष सिसोदिया, शिक्षा मंत्री, दिल्ली सरकार.
‘‘क्या मैं अपने बच्चे का एडमिशन दिल्ली के सरकारी स्कूल में करा सकता हूं ?’’ दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के सीटिंग जज ने दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया से कहा.

आम आदमी की बेहतरी के अरविन्द केजरीवाल के सपने को जी रही आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने अपने सीमित अधिकारों का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए जब आम आदमी के मौलिक अधिकारों में से एक शिक्षा को लेकर बुनियादी पहल की थी तब केन्द्र की मोदी सरकार ने करारा हमला किया था. कदम-कदम पर अपने पिट्ठुओं और अपने एजेंट एल.जी. के माध्यम से हमले दर हमले करवाये थे. मीडिया और सोशल मीडिया पर अपने टट्टुओं के माध्यम से दिल्ली सरकार को बदनाम करने के लिए नये-नये तरीके ईजाद किये थे. पर कहते हैं परिणाम सब कुछ बोलता है. जब दिल्ली सरकार के सरकारी स्कूलों के परीक्षा रिजल्ट के नतीजे प्राईवेट स्कूलों से कहीं ज्यादा आने लगे जब इस वर्ष सरकारी स्कूलों में 88.27 प्रतिशत के नतीजे प्राईवेट स्कूलों के 79.27 प्रतिशत के नतीजे से बेहतर आये. इस वर्ष दिल्ली के सरकारी स्कूलों के 372 छात्रों का आई.आई.टी. में एडमिशन हुआ है. इससे पूर्व सरकारी स्कूलों के एक भी छात्र का एडमिशन आई.आई.टी. में नहीं होता था. यहां तक कि सरकारी स्कूलों के छात्रों का आई.आई.टी. का सपना देखना भी संभव नहीं था. ऐसे में जब अरविन्द केजरीवाल की दिल्ली सरकार ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे में बेहतरीन बदलाव लाकर सरकारी स्कूलों को देश के सर्वोच्च शिखर पर बैठाया है, तब सरकारी स्कूलों के छात्र अपने सपनों का पंख लगाकर उड़ने को तैयार हो गये हैं.

सरकारी स्कूलों को देशभर में हेय दृष्टि से देखे जाने की प्रवृति के कारण अभिभावक अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए प्राईवेट स्कूलों की मनमानी फीस और गुण्डगर्दी को आये दिन झेलते रहने को विवश हैं. सरकारी स्कूलों के कब्र पर प्राईवेट स्कूल एक शिक्षण संस्थान की जगह व्यवसाय के रूप में दिन दूनी रात चैगुनी रफ्तार से बढ़ रही है. ऐसे में देश में आम आदमी के उम्मीदों में की एकमात्र किरण बने दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल की सरकार ने शिक्षा जैसे बुनियादी मौलिक अधिकारों को अपने सर्वोच्च पायदान पर रखा और शिक्षा का बुनियादी आधार सरकारी स्कूलों को बेहतरीन ढांचागत बिल्डिंगें, शिक्षकों को विदेशों में भेजकर उच्चकोटि का प्रशिक्षण, सरकारी स्कूलों को प्राईवेट स्कूलों की तुलना में बेहतरीन वातावरण और सुविधाओं को जुटाकर देश के सामने एक नई उम्मीद की किरण जगायी है. वहीं सरकारी स्कूलों के छात्रों ने शिक्षकों के परिश्रम को सार्थक करते हुए प्राईवेट स्कूलों को कहीें पीछे छोड़ दिया है.

देश की अन्य राज्य सरकारें सहित केन्द्र की मोदी सरकार ने भी शिक्षा जैसे मौलिक अधिकार के क्षेत्र में बजट को हर साल कम करता गया है, वहीं भ्रष्टाचार का खुला खेल खेलते हुए सरकारी स्कूलों को धीरे-धीरे खत्म करने के कागार पर लाकर शिक्षा को व्यवसाय बना दिया है, वहीं दिल्ली सरकार ने अपने महज दो साल के कामकाज में ही शिक्षा के बजट में हर बार बढ़ोतरी कर सरकारी स्कूलों को बेहरीन बना दिया है, जिसका परिणाम यह निकलकर सामने आया है कि वे लोग जो अपने बच्चों को मंहगे प्राईवेट स्कूलों में दाखिला करवाने में फख्र महसूस करते थे अब दिल्ली के सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों का एडमिशन करवाना चाह रहे है.

अरविन्द केजरीवाल ने इस देश के सामंती मिजाज वाले शासक घरानों पर अपने शिक्षा क्रांति के माध्यम से करारा हमला बोला है जिसका मानना था कि गरीब-गुरबों को अगर पढ़ा लिखा दिया तो खेत कौन जोतेगा ? सेवा कौन करेगा ? यह देश अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में अपने सुखद-सुन्दर भविष्य को देख रहा है जो देश में व्यवस्था परिवर्तन करते हुए नया सवेरा लायेगा क्योंकि देश की तमाम अन्य भाजपा की केन्द्रीय सरकार से लेकर राज्य सरकार तक केवल काॅरपोरेट घरानों के हित साधने के लिए देशवासियों को बेवकूफ बनाकर लूटने पर आमादा है.
झारखंड 66 सरकारी स्कूलों में 100% बच्चे फेल, दिल्ली 113 स्कूलों में 100% बच्चे पास.
दिल्ली सरकार की इन उपलब्धियों को देश के सामने लाने के लिए आभार लेकिन इतने महत्वपूर्ण और ज्वलंत विषय पर जागरूकता बढ़ाने की ज़रूरत है खासकर उन हालात में जब जनता यह मान चुकी हो कि सरकारी स्कूलों में पढ़ाने का मतलब अपने बच्चों का भविष्य बर्बाद करना है। इसे पूरे देश को जानना चाहिए।
हम पूरी ताकत से अपनी कोशिश में जुटे हुए हैं.
सरकार बार बार सेना की बहादुरी को राजनीति मुद्दा बना कर, लोगों का ध्यान अपनी कार्यप्रणाली को भटकाने लिये,सेना के कार्य को जनता में चर्चा के लिये वाद विवाद में खींच रही है,यह देश हित में नही है,सेना को राजनीति विवाद से दूर रखना चाहिये,सेना को अपना काम करने दो,देश को सेना की बहादुरी पर गर्व है।
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