Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

बजट 2022 : फ़रेब, फ़रेब और फ़रेब

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 4, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

बजट 2022 : फ़रेब, फ़रेब और फ़रेब

Subrato Chatterjeeसुब्रतो चटर्जी

रेलवे बजट ख़त्म करने के बाद सालाना बजट को ख़त्म करने की जिस तैयारी में मोदी सरकार 2015 से लगी थी, उसकी सफलता इस साल के तथाकथित बजट में देखने को मिली. दरअसल, जब देश का बजट एक पार्टी का विजन डॉक्यूमेंट बन जाए तो उस पर चर्चा करना भी समय व उर्जा का दुरुपयोग है. बजट मूलतः जनविरोधी और पूंजीपरस्त है, ये सभी जानते हैं। मैं कुछ और पहलुओं पर प्रकाश डालने की कोशिश करता हूं.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

मैं इस बजट को एक puritanical utopia (शुद्धतावादी स्वप्नलोक) समझता हूं. इस महाजनविरोधी और महामूर्ख के विजन डॉक्यूमेंट में भारत में ग़रीबी नहीं है, बेरोज़गारी नहीं है, किसानों की लगातार घटती आय नहीं है, साठ लाख छोटे बड़े उद्योगों के बंद होने का कड़वा सच नहीं है. 30 करोड़ लोगों को ग़रीबी रेखा के नीचे धकेलने का शर्मनाक सच नहीं है, शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के संपूर्ण विनाश का सच भी नहीं है. फिर इस अमृत काल के बकलोली में ऐसा क्या है जिसकी चर्चा हम करें ?  है, बहुत कुछ है.

उदाहरण के तौर पर, क्रिप्टो करेंसी के ज़रिए भारतीय मौद्रिक बाज़ार के digitalisation करने का सपना है. यह उस देश में है जहां पर 85% नगदी का लेन देन है.

शिक्षकों की बहाली, क्लास रूम की पढ़ाई अब बीते दिनों की बात हो जाएगी. झारखंड या बस्तर या लखनऊ से पच्चीस किलोमीटर दूर बसे बिना बिजली और नेट के भूखे नंगे कामगारों, सीमांत किसानों के बच्चे अब रिमोट कंट्रोल से नाभिकीय फ़िज़िक्स पढ़ेंगे. सोचने पर ही सारे बदन में झुरझुरी होती है. वाह मोदी जी वाह ! क्या रंगीन तस्वीर बनाई है आपने अमृत काल की !

राष्ट्र की सारी परिसंपत्तियों को बस दो हाथों में बेच कर सरकार और खुद प्रधानमंत्री भी भारमुक्त हो कर 2024 में सत्तर साल की उम्र प्राप्त कर मार्गदर्शक मंडल में शामिल हो जाएंगे. कांग्रेस के सत्तर सालों का पाप एक क्रिमिनल के सत्तर साल आयु आते आते पूरी तरह से धुल जाएगा. और क्या चाहिए ? गोबरपट्टी को मंदिर मिलते रहेंगे और पांच किलो अनाज की भीख. वैसे भी परिव्राजकों के इस देश में चोरी करना भले ही पाप है, भीख मांगना तो बिल्कुल नहीं है.

मोदी जी का विजन इस मामले में बहुत साफ़ है. भिखारी आपके परलोक को सुधारने का एक निमित्त मात्र है, इसलिए जितनी ज़्यादा भिखारियों की संख्या देश में होगी, उतनी ज़्यादा संख्या में लोग उन्हें भीख दे कर अपना परलोक सुधार सकेंगे. इसलिए मैं मोदी जी को भारत के सर्वकालीन सर्वश्रेष्ठ प्रधानमंत्री के रूप में प्रतिष्ठापित करने के अथक प्रयास में पिछले आठ सालों से लगा हुआ हूं, लेकिन लोगों को समझ आए तब न ?

संजीदगी से कहा जाए तो IMF और World Bank के हाथों गिरवी पड़ने के बाद से हर बजट उनके हेड क्वार्टर में ही बनता रहा है. इस साल ये बजट (?) भारतीय धन्ना सेठों के बोर्ड रूम में तैयार हुआ है, जो खुद अंतरराष्ट्रीय बैंकों के ग़ुलाम हैं.

सवाल ये है कि कैसे एक चुनी हुई सरकार इतना खुल कर जनविरोधी नीतियों को लागू कर सकती है ? जवाब एक ही है, आप न चुन कर आए थे और न कभी आप चुन कर आ सकते हैं. आपने सत्ता का अपहरण किया है हिटलर की नाज़ी पार्टी की तरह और आपका अंत मुसोलिनी के अंत से भी बदतर होगा.

संभव हो तो मेरी चेतावनी को आपके अमृत काल के अंतिम अध्याय में जोड़ दिजिए, क्योंकि विष का क्षय ही अमृत है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

कोरोना टीकाकरण के खिलाफ समूची दुनिया में उठ रहा आन्दोलन

Next Post

न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का डिजिटल करेंसी यानी सम्पूर्ण नियंत्रण : चौतरफा नियंत्रण

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

न्यू वर्ल्ड ऑर्डर का डिजिटल करेंसी यानी सम्पूर्ण नियंत्रण : चौतरफा नियंत्रण

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

क्रिप्‍टोकरेंसी : सीमाओं से परे बैध/अवैध का सरकारी खेल

February 19, 2022

समकालीन हिन्दी कविता में सुरेश सेन निशांत

October 27, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.