पर्वत के उस पार - बैक्ट्रिया इतना लिखता रहता हूं हिस्ट्री पर, जाने क्यों ये गजब इतिहास छूट गया. पर...
Read moreDetailsयादों के झुरमुट में मुक्तिबोध कनक तिवारी मुक्तिबोध को सबसे पहले 1958 में साइंस काॅलेज रायपुर के प्रथम वर्ष के...
Read moreDetailsसंघी फिर से अपने द्विराष्ट्र सिद्धांत को आगे बढ़ा रहे हैं सुब्रतो चटर्जी मुसलमानों को दोयम दर्जे के नागरिक बना...
Read moreDetailsलोकतंत्र, बाड़ ही खेत को खाने लगी कनक तिवारी कभी-कभी लगता है संविधान सभा में जवाहरलाल नेहरू ने उद्देशिका वाले...
Read moreDetailsआदिवासियों की समतावादी जीवन शैली और परंपरा में निकृष्ट ब्राह्मणवाद का घुसपैठ आदिवासी समाज और संस्कृति के प्रति हमारे तथाकथित...
Read moreDetails16 अक्टूबर को सुरजीत भवन, नई दिल्ली में संयुक्त किसान मोर्चा की आम सभा मीटिंग में बोलते हुए जोगिन्दर सिंह...
Read moreDetailsकनाडा प्रकरण : मोदी-शाह ने पूरे भारत को माफ़िया बना कर रख दिया है नरेंद्र मोदी ने वो कर दिखाया...
Read moreDetailsदंगा-हत्याएं और संघ : बांद्रा बनाम बहराइच विजय शर्मा मुंबई के बांद्रा और यूपी के बहराइच की दो अलग-अलग घटनाओं...
Read moreDetailsकलिंगनगर नरसंहार : इसे पूरा पढ़ें और सोचें कि इस पर रतन टाटा क्या जिम्मेदार नहीं थे ? इन्दरा राठौड़...
Read moreDetailsबोधिसत्व : एक अकविताई दृष्टिकोण कृष्ण समिद्ध देखा जाये तो कविता में कविता के होने की कई जगहें होती हैं...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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