मैं एक सैनिक की भूमिका में आज भी हूं पानी में बहते हुए सितारे दूर जा रहे हैं मुझसे समय...
Read moreDetailsआदमी के खून में डुबोकर अपने पैने नाखून से शेर ने लिखी है कविता आदमी की पीठ पर कविता में...
Read moreDetailsकिसी पाश्चात्य दार्शनिक ने कहा था - जो जैसा होता है वैसे ही ईश्वर की कल्पना/निर्माण करता है मुर्ग़ा ईश्वर...
Read moreDetailsजो इस पागलपन में शामिल नहीं होंगे, मारे जाएंगे कठघरे में खड़े कर दिये जाएंगे जो विरोध में बोलेंगे जो...
Read moreDetailsलोहे के पुल लोहे के पुल लोहे की ज़ंजीरें भी थीं वक़्त के साथ टूट गए बहते हुए पानी में...
Read moreDetails1. वहीं ब्याहना मुझे ! मुझे उतनी दूर मत ब्याहना जहां मुझसे मिलने जाने ख़ातिर घर की बकरियां बेचनी पड़े...
Read moreDetailsरात के मरे हुए काले कुत्ते... रात के मरे हुए काले कुत्ते की लाश को पूंछ से पकड़ कर मैं...
Read moreDetailsज़रा सा जो याद रह जाता है वह होता है ढेर सारा प्यार वही प्यार जिसे मेरे नंगे पैरों को...
Read moreDetailsकरंज के पेड़ों से लटके हुए शव हैं या अज्ञातवास में जीते पांडवों के हथियार पौरुष जब परिस्थितियों का स्वैच्छिक...
Read moreDetailsनागार्जुन के जन्मदिन पर : हरिजन गाथा (एक) ऐसा तो कभी नहीं हुआ था ! महसूस करने लगीं वे एक...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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