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Home गेस्ट ब्लॉग

तानाशाहों में एक चीज कॉमन होती है – सनक और कायरता का खतरनाक मिश्रण

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
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तानाशाहों में एक चीज कॉमन होती है - सनक ओर कायरता का खतरनाक मिश्रण
तानाशाहों में एक चीज कॉमन होती है – सनक और कायरता का खतरनाक मिश्रण
इन्दरा राठौर

‘जो कुछ घट रहा है दुनिया में’ यह शीर्षक नासिर अहमद सिकंदर ने अपने एक काव्य संग्रह को दिया. जबकि मैं देख रहा हूं कि भारत समेत लगभग प्रत्येक देश के नागरिक एक अलग ही दुनिया का, यानी तीसरी दुनिया का जीवन जीते, उस पहले और दूसरे नागरिक से भिन्न होते चले ग‌ए हैं.

यकीनन उनकी आईडेंटिटी को भी पांच किलो के राशन ने ध्वस्त कर दिया है. ऐसे में धूमिल के शब्दों में कहूं तो संविधान और आजादी कुछ ऐसा ही प्रतीत होता है – ‘आजादी क्या सिर्फ तीन थके हुए रंगों का नाम है, जिन्हें एक पहिया ढोता है या इसका कुछ खास मतलब होता है.’

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इधर पूरे विश्व बिरादरी का चरित्र ही उस तथाकथित राष्ट्रवाद के आगोश और नकली गर्माहट में इस क़दर गुम्फित हो गया है कि संविधान और आजादी तानाशाहों और उनके टट्टों को बेमानी लगते हैं. वे तानाशाह के उस परतंत्रता में अपने गुलाम जीवन कोनिरीह आंखों से देखते हैं.

प्रस्तुत लेख को साभार नवनीत शर्मा के देखें तो जो किरदार नेपोलियन में था, वह भारत के प्रधान में भी जस का तस पैठ बनाता हुआ है. वह देश को लुंगी और पाजामा से शिनाख्त करता है, देश जोड़ता नहीं तोड़ता है. कमजोर करता है. कहना न होगा वह भी नैपोलियन अथवा हिटलर की राह पर चल पड़ा है. ढंग कुछ बदल कर, कुछ जोड़कर, नया तानाशाह बन रहा है लेकिन ऐसा, हम हरगिज़ होने नहीं देंगे.

नैपोलियन जैसे ही किसी भी मोर्चे पर विफल होता वैसे ही मीडिया कर्मचारियों की आफत आ जाती ! मीडिया के कर्मचारियों को और ज्यादा ताकत से नैपोलियन को महान साबित करना पड़ता था !
दिन रात मीडिया को नैपोलियन की महानता के किस्से सुनाने पड़ते.

नैपोलियन की आर्थिक नीतियां विफल होने लगी तो उसने दूसरे देशों के साथ युद्ध छेड़ दिया. झूठ को सच साबित करने के लिए नैपोलियन ने अपने अखबार खड़े कर दिए ! जिन युद्धों में फ्रांस हारा – उन युद्धों में भी मीडिया ने नैपोलियन को महान विजेता के रूप में प्रस्तुत किया ! दुनियां के किसी भी तानाशाह को देख लें उन सब में अपने प्रचार के प्रति दीवानगी और आत्ममुग्धता एक जैसी ही मिलेगी !

तानाशाह सबसे पहले सूचनातन्त्र पर नियन्त्रण करते हैं और फिर लोकतांत्रिक-संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर करके सूचना, आवाज और कार्यवाही के सारे मार्ग अवरुद्ध कर देते हैं. एक और चीज भी तानाशाहों में कॉमन होती है और वो है – सनक ओर कायरता का खतरनाक मिश्रण !

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