Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

फासिस्ट भाजपा के निशाने पर क्यों है जेएनयू ?

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 24, 2018
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

मीडिया, खासतौर पर सोशल मीडिया पर सक्रिय भाजपा के आई टी सेल के द्वारा देश भर में चलाए जा रहे बेहद आक्रामक दुश्प्रचार का सबसे बड़ा निशाना जेएनयू के छात्र बनते हैं. इसके बाद भी जब भाजपा और उसके सैकड़ों अनुषांगिक संगठनों के इस दुश्प्रचार को देश की जनता खारिज कर देती है तब जेएनयू के छात्रों से निपटने के लिए भाजपा की यह फासिस्ट मोदी सरकार पुलिस बल का सहारा लेती है और इन छात्रों पर हमलावर होती है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

सवाल उठता है भाजपा की इस फासिस्ट सरकार के निशाने पर जेएनयू क्यों ?

इस सवाल का जवाब यह है कि जेएनयू के ही छात्र व शिक्षकों का समूह देश का वह तबका है, जिसकी विश्वसनीयता इस देश की करोड़ों मेहनतकश जनता के बीच आज भी है क्योंकि यहां के छात्र इस देश की करोड़ों मेहनतकश जनता के बेटे-बेटियों के बीच से जाते हैं और वह अपने करोड़ों मेहनतकश जनता के जीवन से जुड़ी सवालों को उठाते हैं और उनके लिए लड़ते हैं.

फासिस्ट मोदी सरकार जब देश की मेहनतकश जनता के खून-पसीने से संचित कमाई को लूटने के लिए एक के बाद एक लुटेरी नीतियों को लागू कर देशी व विदेशी कम्पनियों के लूट को बेहिसाब बढ़ा रही है, जिसमें खुद देशद्रोही मोदी सरकार अपना हिस्सा काट रही है, तब इसके खिलाफ अगर कहीं से मजबूत आवाज उठती है तो वह है जेएनयू और आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल. इस आवाज की देश भर के मेहनतकश आवाम के बीच इतनी जबरदस्त विश्वसनीयता होने के कारण भाजपा की फासिस्ट जनविरोधी नीतियों के खिलाफ समूचे देश की जनता लामबंद होने लगी है और सड़कों पर उतर आई है, जिससे आये दिन भाजपा की मोदी सरकार मुश्किलों से घिरती जा रही है.

ऐसे वक्त में भाजपा के लिए यह मुफीद रास्ता है कि इस आवाज को बंद कर दिया जाये. इसके लिए खरीदने की कोशिशें पहले ही नाकाम हो चुकी है. तब दूसरा तरीका इसे बदनाम करने का निकाला. जिसमें जेएनयू के ऊपर नाना प्रकार की घृणास्पद काल्पनिक आरोप भाजपा के आईटी सेल लगाने शुरू किये, जिसमें जेएनयू के कई छात्रों को पुलिस ने वगैर किसी जांच पड़ताल के जेल में बंद कर दिया. परन्तु इसके उल्टे ही परिणाम मोदी सरकार को भुगतने पड़े. इस विश्वविद्यालय को ही बंद कर देने के मोदी सरकार के प्रयास भी जब सफल नहीं हो पाया तब इस विश्वविद्यालय में भी गरीब मेहनतकश जनता की बेटे-बेटियां न प्रवेश पा सके, इसके लिए अनेक तिकडमी व संविधान विरोधी कदम उठाने शुरू किये. भाजपा के मोदी सरकार के इन तिकड़मी कदमों में आरक्षण जैसे बुनियादी ढांचा पर ही हमला किया गया, सीट कटौतियां आदि जैसे कदम उठाए गये.

मोदी के इस छात्र विरोधी कदमों के खिलाफ जेएनयू ने जमकर सवाल उठाए. अब वहां के आकादमिक शुचिता को खत्म करने के लिए जौहरी जैसे घटिया मानसिकता के शिक्षकों के माध्यम से प्रयास चल रहे हैं.विदित हो कि प्रोफेसर जौहरी पर जेएनयू की आठ छात्राओं ने आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया है, जिसके पक्ष में केंद्र की मोदी सरकार डटकर खड़ी हो गई है. काफी विरोध के बाद जब इन पर आठ एफआईआर दर्ज भी किया गया तब भी इन्हें महज 15 मिनट में ही जमानत दे दी गई, जबकि दिल्ली सरकार के नुमाइंदों को महज शिकायत करने भर की देर होती है, मोदी सरकार की अतिसक्रिय दिल्ली पुलिस उन्हें कहीं से भी उठाकर तिहाड़ जेल पहुंचा देती है.

जेएनयू से उठते सवाल देश के तमाम विश्वविद्यालयोंं के ज्वलंत सवाल है. जेएनयू न केवल छात्रों के ही वरन् नौजवानों, दलितों, किसानों, महिलाओं, आदिवासियों के बुनियादी सवालों को उठाता है, यही कारण है कि आज जेएनयू मोदी सरकार के निशाने पर है. और ठीक इसी कारण समूचे देश के छात्रों, नौजवानों, दलितों, किसानों, महिलाओं, आदिवासियों को जेएनयू के पक्ष में गोलबंद हो जाना चाहिए ताकि उनकी विश्वसनीय बुलंद आवाज को फासिस्ट मोदी हुकूमत के बूटों तले रौंदा न जा सके. ताकि आम मेहनतकश जनता की आवाज को दबाया न जा सके.

Previous Post

23 मार्च पर विशेष : अमर शहीद भगत सिंह का लिखित आलेख – ‘हमारा फर्ज’

Next Post

भयावह गैर-बराबरी के चंगुल में फंसा देश

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

भयावह गैर-बराबरी के चंगुल में फंसा देश

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

छत्तीसगढ़ : भाजपा की तरह कांग्रेसी शासनकाल में भी बदस्तूर जारी है आदिवासियों का पुलिसिया उत्पीड़न

April 6, 2022

संसदीय वामपंथी : भारतीय सत्ताधारियों के सेफ्टी वॉल्व

July 22, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.