Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

मैं तुम सबको देख रहा हूं –

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
June 4, 2025
in कविताएं
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
मैं तुम सबको देख रहा हूं -
मैं तुम सबको देख रहा हूं –

मैं तुम सबको देख रहा हूं.
मैं तुम्हारा हर झूठ रिकॉर्ड कर रहा हूं.
मैं तुम्हारी हर तोड़-मरोड़कर बताई गई
बातों को संग्रहित कर रहा हूं.
मैं इब्राहीम टरोरे हूं और आज मैं
तुम्हारे नक़ाब उतार रहा हूं.

हां, तुमने सही सुना.
मैं, जिसे तुम एक नौजवान सैनिक शासक कहते हो,
जिसे तुम एक खतरनाक उग्रपंथी कहते हो,
जिसे तुम पश्चिम-विरोधी तानाशाह बताते हो,
आज मैं तुम्हें सच्चाई बता रहा हूं.

You might also like

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

स्वप्न

और इस बार तुम माइक बंद नहीं कर सकते.
इस बार तुम अपने कैमरे नहीं हटा सकते.
इस बार तुम्हारे संपादक इस भाषण को
काट नहीं सकते क्योंकि
वो दुनिया अब नहीं रही
जिस पर तुम्हारा एकाधिकार था.

अब करोड़ों लोग ये बातें सुनेंगे,
बिना तुम्हारे फ़िल्टर से गुज़रे,
बिना तुम्हारे झूठों में लिपटी,
बिना तुम्हारी गंदगी में सनी.

मैं 34 साल का हूं.
मैंने अपनी ज़िंदगी के हर दिन
तुम्हारे झूठों में बिताए.

बचपन में, मैं टीवी पर अफ़्रीका देखा करता था —
हमेशा वही तस्वीरें —
मक्खियों से घिरे बच्चे,
सूखी ज़मीनें, हथियार, मौत.

यही है अफ़्रीका, उन्होंने हमें बताया.
अफ़्रीका ऐसा ही होता है, और हमने मान लिया.
हमें खुद पर शर्म आने लगी.
हमें अपनी धरती से,
अपने लोगों से शर्म आने लगी.

लेकिन फिर मैं बड़ा हुआ.
मैंने पढ़ा, रिसर्च किया, सवाल किए —
और मुझे समझ आया कि जो अफ़्रीका
तुमने हमें दिखाया,
वो असली नहीं था.

जो कहानी तुमने हमें सुनाई,
वो एक झूठ थी.
जो किस्मत तुमने हमारे लिए तय की,
वो एक स्क्रिप्ट थी जो तुमने सालों पहले लिखी थी.

तुमने अफ़्रीका को कैसे दिखाया ?
कैसे बेचा ?
ऐसे जैसे हम इंसान ही न हों,
जैसे हम किसी जंगल के जानवर हों,
जैसे हम तुम्हारे इंतज़ार में पड़े हुए बेचारे हों.

हर दिन, हर घंटे, हर मिनट
तुम्हारी स्क्रीन पर वही कहानी —
भूख, युद्ध, बीमारी, भ्रष्टाचार,
आतंक, अराजकता.

जब कोई ‘अफ़्रीका’ कहता है तो
तुम्हारे शब्दकोश में और कोई शब्द ही नहीं होता —
ना उम्मीद, ना सफलता, ना विकास,
ना प्रतिरोध, ना इज़्ज़त, ना गर्व, ना जीत.

तो मैं तुमसे पूछता हूं —
New York Times,
Washington Post,
Guardian, Le Monde,
कभी अफ़्रीका की कामयाबियों को अपनी हेडलाइन बनाया ?

कितनी बार तुमने
रवांडा की टेक्नोलॉजी क्रांति के बारे में लिखा ?
कितनी बार तुमने
इथियोपिया के पुनर्वनीकरण प्रोजेक्ट को दिखाया ?
कितनी बार तुमने
बोत्सवाना की लोकतांत्रिक सफलता की तारीफ की ?
कितनी बार तुमने
केन्या की एंटरप्रेन्योरशिप की कहानी सुनाई ?

नहीं,
क्योंकि ये सब तुम्हारी स्क्रिप्ट में फिट नहीं बैठता.
तुम्हारे अफ़्रीका की कहानी में
अफ़्रीका सफल नहीं हो सकता.

अगर अफ़्रीका को मदद की ज़रूरत नहीं है,
तो तुम कैसे हस्तक्षेप करोगे ?
अगर हम पिछड़े नहीं हैं, तो
तुम हमें नीचा कैसे दिखाओगे ?

क्या कभी तुम्हारे किसी संपादक,
किसी रिपोर्टर ने ये सोचा है :
दुनिया की सबसे अमीर ज़मीनों पर
बसे लोग गरीब क्यों हैं ?

तो लीजिए, असल आंकड़े —
दुनिया का 70% कोबाल्ट अफ़्रीका के पास है —
तुम्हारे फोन, लैपटॉप, इलेक्ट्रिक कार
इसके बिना नहीं चलेंगे —
ये कोबाल्ट कांगो से आता है,
लेकिन वहां के लोग मोबाइल नहीं खरीद सकते.

दुनिया का 90% प्लैटिनम अफ़्रीका से —
साउथ अफ़्रीका से — और
वहां के लोग बेरोज़गारी में डूबे हैं.

30% सोना —
माली, बुर्किना फासो, घाना, तंज़ानिया —
सोना नदियों की तरह बहता है,
लेकिन लोग गरीबी में तैरते हैं.

65% हीरे —
बोत्सवाना, अंगोला, कांगो, सिएरा लियोन —
अरबों डॉलर के हीरे निकाले जाते हैं,
लेकिन मज़दूर $1 रोज़ कमाते हैं.

35% यूरेनियम —
नाइजर, नामीबिया, साउथ अफ़्रीका —
पेरिस की लाइटें हमारे यूरेनियम से जलती हैं,
लेकिन हमारे गांवों में बिजली नहीं.

और तुम पूछते हो — अफ़्रीका गरीब क्यों है ?
सही सवाल ये है:
अफ़्रीका को इतना अमीर होते हुए
गरीब कैसे बनाए रखा गया ?

जवाब है —
उपनिवेशवाद कभी खत्म नहीं हुआ,
उसने बस रूप बदला.
पहले तुम हमारे देश पर कब्ज़ा करते थे,
अब तुम कंपनियां खोलते हो.
पहले तुम ज़बरदस्ती लेते थे,
अब तुम समझौते करवाते हो.
पहले तुम कोड़े से शासन करते थे,
अब तुम कर्ज़ देकर.

अब मैं तुम्हें तारीख़, नाम, आंकड़े देकर बताता हूं : –

Glenore, स्विट्ज़रलैंड की कंपनी,
कोबाल्ट निकालती है कांगो से.
2022 में कमाई $256 बिलियन,
टैक्स दिया कांगो को $500 मिलियन —
यानी सिर्फ 0.2%
क्या यही न्याय है ?

Rio Tinto,
ब्रिटिश-ऑस्ट्रेलियन कंपनी,
गिनी में बॉक्साइट निकालती है —
20 मिलियन टन हर साल
गिनी को क्या मिला ?
प्रदूषण और कैंसर.

Total Energies,
फ्रेंच ऑयल कंपनी —
अंगोला, नाइजीरिया, कांगो में तेल निकालती है —
2022 में मुनाफ़ा $36 बिलियन,
लेकिन अफ़्रीका में सिर्फ गंदे पाइपलाइन.

Anglo American,
साउथ अफ़्रीका से शुरू हुई, अब लंदन में —
हीरे, प्लैटिनम, लोहा सब ले लिया,
और छोड़ गए 60 लाख बेरोज़गार मजदूर.

ये तो सिर्फ बर्फ़ की नोक है.
बाकी का क्या ?
छुपे हुए सौदे,
सीक्रेट बैंक अकाउंट्स,
टैक्स की चालबाज़ियां —
हर साल $88 बिलियन अवैध रूप से
अफ़्रीका से बाहर जाता है.

तुम $45 बिलियन की मदद लिखते हो —
पर कोई ये नहीं लिखता कि
अफ़्रीका मदद पाने वाला नहीं है,
देने वाला है.

तुम कैमरा ज़ूम करते हो सूजे हुए पेटों पर —
जबकि पर्दे के पीछे हर रोज़ टन के हिसाब से
सोना, हीरे, तेल, यूरेनियम निकलता है.

ये है तुम्हारा सिस्टम :

– भ्रष्टाचार फैलाओ —
नेताओं को रिश्वत दो,
विदेश में अकाउंट खोलो,
उनकी औलादों को अपनी यूनिवर्सिटी में भेजो.

– सौदे करो —
50, 99 साल के कॉन्ट्रैक्ट,
टैक्स से छूट,
पर्यावरण और मजदूर नियमों की अनदेखी.

– इंफ्रास्ट्रक्चर पर कब्ज़ा —
बंदरगाह, एयरपोर्ट, रेलवे
— सिर्फ खदान से पोर्ट तक.
गांवों तक सड़क नहीं,
स्कूलों में बिजली नहीं.

– सुरक्षा दो —
प्राइवेट सिक्योरिटी कंपनियां,
हथियार दो,
विरोध को आतंकी घोषित करो.

– मीडिया को चुप कराओ —
लोकल पत्रकार खरीदो,
विरोधी आवाज़ें दबाओ,
बाहर की मीडिया को सिर्फ अराजकता दिखाओ.

ये सिस्टम 100 साल से चल रहा है.
तुम इसे नहीं देखना चाहते,
क्योंकि तुम खुद इसका हिस्सा हो.

  • इब्राहिम टरोरे के वायरल भाषण का अंश (CNN, BBC, France 24)

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लॉग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate

Previous Post

आज़ादी की लड़ाई में आदिवासियों के संग्राम का इतिहास

Next Post

जनविरोधी व दमनकारी ऑपरेशन कगार बंद करने और शांति-वार्ता बहाल करने हेतु कन्वेंशन

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
कविताएं

आखिरी सलाम…

by ROHIT SHARMA
June 2, 2025
Next Post

जनविरोधी व दमनकारी ऑपरेशन कगार बंद करने और शांति-वार्ता बहाल करने हेतु कन्वेंशन

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अभी क्यों आया चीनी निवेश को अपग्रेड करने का सुझाव

July 25, 2024

आज्ञाकारी गधा

February 10, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.