Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

‘मनुवादी कॉरपोरेटपरस्त मोदी-शाह की सत्ता के खिलाफ संघर्ष तेज करो’ – सीपीआई माओवादी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 9, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
'मनुवादी कॉरपोरेटपरस्त मोदी-शाह की सत्ता के खिलाफ संघर्ष तेज करो' - सीपीआई माओवादी
‘मनुवादी कॉरपोरेटपरस्त मोदी-शाह की सत्ता के खिलाफ संघर्ष तेज करो’ – सीपीआई माओवादी

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की तेलंगाना राज्य समिति के प्रवक्ता जगन के नाम से 4 दिसम्बर को जारी प्रेस बयान में कहा गया है कि आरएसएस-भाजपा की फासीवादी केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़ें, जिसने विकासशील भारत के नाम पर एक कॉर्पोरेटवादी भारत के निर्माण का बीड़ा उठाया है. इसके साथ ही उन्होंने आह्वान किया है कि विपक्षी दलों द्वारा आयोजित अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शनों में हजारों की संख्या में भाग लें और संघर्ष करें.

प्रेस बयान जारी करते हुए उन्होंने बताया कि प्रिय लोग, मोदी और अमित शाह के नेतृत्व वाली केंद्र की मनुवादी सरकार ने 28, 29 और 30 नवंबर को रायपुर में डीजीपी, अर्धसैनिक बलों के प्रमुखों और खुफिया एजेंसियों की बैठक की. इसमें कहा गया कि पुलिस व्यवस्था को मजबूत किया जाए और विकासशील भारत (कॉर्पोरेट) के निर्माण में कोई बाधा न आए. आने वाले समय में जनता, नागरिक समाज, राजनीतिक दलों और संगठनों की ओर से उठने वाले आंदोलनों का सख्ती से दमन करने का निर्णय लिया गया.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

पिछले 11 वर्षों से ये मनुवादी एलपीजी नीतियों को अमृत काल, आत्मनिर्भर भारत, नया भारत, शेष भारत, एक भारत, विकासशील भारत जैसे आकर्षक नाम और गोएबल्स प्रोपेगैंडा देते आ रहे हैं. मोदी सरकार में जहां निजी कॉर्पोरेट कंपनियों की संपत्ति बढ़ रही है, वहीं सरकार का कर्ज भी बढ़ रहा है.

संसदीय लोकतंत्र और संविधान का राग अलापते हुए, राष्ट्रीय स्वयंसेवक के एजेंडे में शामिल मुद्दों को नीतियों और कानूनों के रूप में लागू किया जा रहा है. सभी वर्गों, सभी दलों, प्रगतिशील ताकतों, लोकतंत्रवादियों, बहुजनों, दलितों और आदिवासियों पर हमला जमकर जारी है. हाल के बिहार चुनावों ने साबित कर दिया है कि वे किसी भी तरह से चुनाव जीत सकते हैं और विपक्षी दलों को हरा सकते हैं, चाहे उनके पास कितना भी जनसमर्थन क्यों न हो.

वास्तव में, कई क्षेत्रीय पर्यवेक्षकों ने कहा है कि चुनाव से पहले बिहार में लोगों का मूड विपक्षी दलों के लिए बहुत अनुकूल था लेकिन परिणाम बहुत अलग आए हैं. भारत में चुनाव आयोग, अदालतें, सीबीआई, एनआईए, ईडी, सेबी, यूजीसी, सतर्कता आयोग, सीएजी और अन्य सभी संस्थान पूरी तरह से भाजपा के नियंत्रण में आ गए हैं. जल्द ही, 130वें संविधान संशोधन के माध्यम से विपक्षी दलों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को हटाने का कार्यक्रम भी बनाया जा सकता है.

उन्होंने बिहार में एसआईआर कराकर चुनाव कराए और जीत हासिल की. ​​हरियाणा और महाराष्ट्र में, उन्होंने एसआईआर कराए बिना भी चुनाव जीत लिए. वे साबित कर रहे हैं कि वे किसी भी तरह से जीतेंगे. इस तरह, उनका व्यवहार विपक्षी दलों में निराशा और विभाजन पैदा करता है. ऐसी स्थिति में संसदीय दलों को जनता के बीच जाकर सड़कों पर संघर्ष करना पड़ा.

बिहार चुनाव के बाद, श्रम शक्ति नीति-2025 के नाम से चार श्रम संहिताएं लागू की गईं. इनमें सस्ते श्रम का शोषण, काम के घंटे बढ़ाना, कानूनी अधिकारों को खत्म करना, यूनियन बनाने और हड़ताल करने के अधिकार में बाधा डालना और श्रमिकों की बर्खास्तगी को प्रबंधन की मनमानी पर छोड़ देना जैसे बदलाव किए गए. यह संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 23 का उल्लंघन है. इस तरह, लगभग 50 करोड़ के संगठित और असंगठित मजदूर वर्ग पर हमला तेज़ कर दिया गया. मनुवादियों ने केंद्रीय श्रमिक आंदोलन को कमज़ोर और तोड़ने के लिए ये संहिताएं लाईं.

वर्तमान संसद सत्र में परमाणु ऊर्जा के उपयोग और नियमन से संबंधित परमाणु ऊर्जा विधेयक-2025 पारित किया जा रहा है, जिसके तहत परमाणु ऊर्जा के उत्पादन और वितरण को निजी कंपनियों के हाथों में सौंप दिया जाएगा. आदिवासी, दलित, पिछड़े और सवर्ण समेत गरीब छात्रों को उच्च शिक्षा से वंचित करने के लिए यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीईआरटी को समाप्त करके एक शिक्षा आयोग (हिंदुस्तान शिक्षा आयोग) का गठन किया जाएगा. बिजली विधेयक पेश करके बिजली का पूर्ण निजीकरण किया जाएगा. बैंकों का विलय करके उन्हें कॉर्पोरेट कंपनियों को सौंप दिया जाएगा.

देश की अर्थव्यवस्था वित्तीय निवेश कंपनियों और बाज़ार की ताकतों के हाथों में कैद है. विदेशी निवेशक शेयर बाज़ार में अपना निवेश विदेश ले जा रहे हैं और ट्रम्प हमारे निर्यात पर भारी शुल्क लगा रहे हैं. इन कारणों से, रुपये का मूल्य और गिरकर 90.15 रुपये प्रति डॉलर हो गया है. इससे पेट्रोल, डीज़ल, खाद्य तेल और रसोई गैस की कीमतों में वृद्धि होगी, जिसका ग़रीब और मध्यम वर्ग पर असहनीय बोझ पड़ेगा.

भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता के तहत, मोदी सरकार ने ट्रंप के आगे झुककर अमेरिका से कपास, मक्का, सोयाबीन और अन्य कृषि उत्पादों के आयात का समझौता कर लिया है. इससे पहले से ही कर्ज में डूबे हमारे देश के किसानों की स्थिति और खराब हो जाएगी. इसके कारण तेलंगाना के कपास किसानों को गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है.

सीसीआई सरकार द्वारा घोषित कीमतों पर भी कपास नहीं खरीद रही है. इसने देश के सबसे बड़े सार्वजनिक उपक्रम एलआईसी पर दबाव डालकर अडानी की कंपनियों के 45,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीद लिए हैं. इस तरह, देश की अर्थव्यवस्था दिन-ब-दिन कॉर्पोरेट्स के नियंत्रण में आती जा रही है.

दूसरी ओर, आरएसएस-भाजपा शासित राज्यों में आदिवासियों, दलितों और अन्य गरीब जातियों पर हमले बढ़ रहे हैं. सनातन धर्म के नाम पर जाति व्यवस्था-मनुवादी विचारधारा का बड़े पैमाने पर प्रचार किया जा रहा है और हमले किए जा रहे हैं. मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ने भी उच्च न्यायालय में हलफनामा दायर कर कहा है कि जाति व्यवस्था ने भारत में प्रगतिशील भूमिका निभाई है. इस तरह ये मनुवादी सरकार संविधान का उल्लंघन कर हमले कर रहे हैं.

मोदी सरकार आईएएस, आईपीएस और क्लास वन अधिकारियों को अपने अधीन करके उन्हें अपना एजेंडा लागू करने के लिए तैयार कर रही है. इन 11 वर्षों में, 1500 से ज़्यादा अधिकारियों को भ्रष्टाचार के आरोपों और अवज्ञाकारी अधिकारियों के कारण सेवा से हटाया जा चुका है. कई लोगों के ख़िलाफ़ मुक़दमे दर्ज किए गए हैं. उन्हें तरह-तरह से परेशान किया गया है. हरियाणा के दलित आईपीएस अधिकारी पूरन कुमार की आत्महत्या इसी स्थिति का एक उदाहरण है.

जो अधिकारी मनुवादियों के एजेंडे को लागू नहीं करना चाहते, वे इस्तीफ़ा देकर सेवा छोड़ रहे हैं. इसलिए, अब समय आ गया है कि दलित और कमज़ोर वर्ग यह तय करे कि उन्हें अपनी पूरी क्षमता मनुवादियों के एजेंडे को लागू करने में लगाकर जनविरोधी बनना है या जनता के पक्ष में खड़ा होना है. इन परिस्थितियों में, हम चाहते हैं कि वे संविधान के अनुसार जनता के पक्ष में काम करें.

खतरनाक स्थिति को देखते हुए, मजदूरों, किसानों, छात्रों, बुद्धिजीवियों, महिलाओं, दलितों, आदिवासियों, अल्पसंख्यकों, लेखकों, कलाकारों, पत्रकारों, संगठनों और सभी दलों को इन आधुनिक मानवतावादियों के खिलाफ लामबंद होना होगा. क्रांतिकारी अभिवादन के साथ यह प्रेस बयान समाप्त होता है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लॉग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-pay
Previous Post

‘कॉमरेड आदिरेड्डी (श्याम), संतोष (महेश), मुरली की अमर रहे !’ सीपीआई माओवादी के तत्कालीन महासचिव गणपति का स्मृति भाषण

Next Post

भारत में स्वतंत्रता के बाद 4 सबसे बड़े आंदोलन हुए हैं, चारों का आधार झूठ था…लेकिन उसने सत्ता बदल दिया

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

भारत में स्वतंत्रता के बाद 4 सबसे बड़े आंदोलन हुए हैं, चारों का आधार झूठ था...लेकिन उसने सत्ता बदल दिया

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अतीत और धर्म के नाम पर पीठ थपथपाना बंद करो

August 18, 2021

जीएसटी बिल बनी गले की हड्डी

January 5, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.