Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

खजाना

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 30, 2024
in लघुकथा
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
खजाना
खजाना

बाबा ने रिमजू के घर चप्पे चप्पे का मौका मुआयना किया. दीवारें कुरेद-कुरेद कर सूंघी, मिटटी को उठाकर उसे हथैली पे मसल कर कई बार जांची परखी, बरामदे में खड़े पेड़ को ऊपर से लगाकर नीचे तक सरसरी निगाह से देखा. अच्छी तरह से निरीक्षण कर लेने के बाद कोठरी में डंडी गाड़ दी. रिमजू ने पूछा – ‘क्या मामला है बाबा ?’

बाबा कुछ देर खामोश रहे फिर बोले – ‘तुम अकूत धन संपदा के मालिक हो लेकिन वो धन तुम्हारे हाथों में नहीं है.’ रिमजू की आंखों में ख़ुशी तैरने लगी. बोला – ‘बाबा उपाय बताइये, धन हाथों में कैसे आएगा ?’

You might also like

एन्काउंटर

धिक्कार

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

बाबा ने कहा – ‘तुम्हारे घर में जिन्न का साया है, और वो जिन्न उस खज़ाने की रक्षा कर रहा है, जो यहां दफन है.’

रिमजू की हसरतें हिलोरे मारने लगी बोला – ‘जनाबे आली, आप ही मेरे केवटहार हो, इस जिन्न रूपी माया से मेरा पीछा छुड़वाइये और धन माया के दर्शन कराइए.’

रिमजू की सुंदर-सी पत्नी झटपट अंदर भागी, एक गुड़ रोटी पर घी उण्डेलकर ले आई और बाबा का मुंह मीठा किया.

बाबा ने रिमजू की पत्नी के हाथों गुड़ रोटी का निवाला खाया और बोले – ‘अवश्य ! धन के दर्शन अवश्य होंगे.’

इसके पश्चात बाबा और उनके चेलों ने आलीशान दावत उड़ाई, फिर रिमजू से कहा कि – ’14 दिन की तंत्र मंत्र प्रक्रिया करनी होगी, जिसका तकरीबन 70 हज़ार खर्च होगा, उसके पश्चात जिन्न बात करने आएगा.’ रिमजू झट से तैयार हो गया. 50 हज़ार का बण्डल जो जमा कर रखा था, बाबा को दे दिया. बाबा चलते बने.

रिमजू और उसकी पत्नी को दिन रात सोते जागते खाते पीते केवल धन ही धन याद आता. मन ही मन ख्वाहिशों के हज़ारों महल बना लिए थे. शौचालय में, देवालय में हर जगह रिमजू अपने आने वाले धन से लबालब भविष्य की कल्पना करता रहता था. काम धंधा मेहनत मजदूरी सब छोड़ दिया क्योंकि जल्द ही करोड़पति बनने वाला था तो कौन सिर फोड़े टके भर की मज़दूरियों से…!

14वें दिन बाबा आए. 10 फीट गहरा खड्डा खोदा गया, एक कुत्ते की हड्डियों के अतिरिक्त कुछ ना निकला. रिमजू और उसकी पत्नी का मुंह लटक गया.

बाबा ने रिमजू से कहा कि – ‘जिन्न इतनी आसानी से नहीं मानने वाला, उसने कलश की जगह हड्डियां रख दी. 14 दिन का एक और अनुष्ठान करना पड़ेगा. मायूस मत हो ! सफलता मिलेगी ! रिमजू के पास अब फूटी कौड़ी नहीं बची थी. फिर भी जैसे तैसे कहीं से जुगाड़ कर 70 हज़ार का कर्ज लिया औऱ अनुष्ठान करवाया.

बाबा 7 दिन बाद आये, बोले कि – ‘बताने वाली बात तो नहीं है लेकिन तुमने 28 दिन का अनुष्ठान करवाया है इसलिए मुझपर वाजिब है कि जो भी बात हो तुम्हें अवगत कराऊं… जिन्न बहुत शरारती है, वो ऐसे ही थोड़े से भोग में कलश देने को राजी नहीं हो रहा.’

रिमजू ने उत्सुकता से पूछा – ‘तो क्या ! कैसे देगा वो कलश ?’

बाबा हिचकिचाते हुए बोले – ‘वो वो…!’

रिमजू ने बेसब्र होकर कहा – ‘बोलिये बाबा क्या चाहिए उसे, किसी की बलि ?’

बाबा बोले – ‘बलि नहीं, वो तुम्हारी पत्नी को चाहता है एक रात के लिए.’

रिमजू खामोश हो गया ! चारो तरफ सन्नाटा छा गया महफ़िल उसी समय भंग हो गयी, ख़्वाब चकनाचूर होते नज़र आने लगे. वही गरीबी वाली अभावग्रस्त ज़िन्दगी नजर आने लगी. बाबा अपनी बात कहकर चुपचाप चल दिये.

रिमजू ने अपनी पत्नी को पूरी बात बताई. दोनों ने सलाह मशविरा करके जिन्न की ख्वाहिश पूरी करने का निश्चय कर लिया – ‘आखिर जिन्न ही तो है, कौन-सा इंसान है.’

लालच में लोगों ने अनगिनत औलादों की बलि चढ़ा दी है तो ये चीज़ ही क्या ! अमावस की रात बाबा के जिस्म में जिन्नात के साये ने प्रवेश किया और ख्वाहिश पूरी हो गयी.

जिन्न शरारती था, सबकुछ भोगकर कलश की जगह कोयले रख गया. बाबा ने क्रोधित होकर उसे हमेशा के लिए भस्म कर दिया.

  • अज्ञात

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-Pay
G-Pay
Previous Post

आखिरी वजूद पर सिमटता यूक्रेन : यूक्रेनी सेना का रूसी क्षेत्र कुर्स्क पर कब्जे का सच और जेलेंस्की का युद्ध बिजनेस

Next Post

पत्थलगड़ी

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
लघुकथा

इतिहास तो आगे ही बढ़ता है…

by ROHIT SHARMA
January 5, 2026
लघुकथा

सवाल

by ROHIT SHARMA
August 16, 2025
Next Post

पत्थलगड़ी

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

यातायात नियमों के नाम पर सरकार का तुगलकी फरमान

January 3, 2018

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

December 22, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.