Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

साम्प्रदायिकता (नफरती कानफोड़ू डीजे) की सीढ़ी पर सत्ता हासिल करने की प्रयोगशाला

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 26, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
साम्प्रदायिकता (नफरती कानफोड़ू डीजे) की सीढ़ी पर सत्ता हासिल करने की प्रयोगशाला
23 सितंबर से 6 नवंबर 1990 तक की रथयात्रा ने देश को मज़हबी दंगों में मथ दिया. इसके बावजूद देश इस कदर साम्प्रदायिकता और नफ़रत का शिकार नहीं हुआ था. फिर हुए 2002 में गुजरात के दंगे.
Saumitra Rayसौमित्र राय

आडवाणी ने जो शुरू किया, नरेंद्र मोदी ने उसे अंजाम तक पहुंचाया लेकिन बाद के एक दशक में भी देश इतना अशांत, लहूलुहान और बेचैन नहीं हुआ था, जितना आज है. जानते हैं क्यों ? क्योंकि न्याय, कानून और लोकतंत्र पर लगाम रखने वाली संस्थाओं से लोगों को आस बची थी. मीडिया पर सवाल पूछने का भरोसा था. आज बजरंग मुनि को 10 दिन, यति नरसिंहानंद, रामभक्त गोपाल, पिंकी चौधरी को 1 महीने में, दीपक सिंह हिन्दू और विनोद शर्मा को 2 महीने में ज़मानत मिल जाती है. हँसकर नफ़रत फैलाना अपराध नहीं है.

कार्यपालिका की गुंडई, विधायिका का बहुमतवादी वर्चस्व, समर्पण कर चुकी न्यायपालिका और सत्ता की गोदी में बैठी मीडिया के बीच कानून किसके चबूतरे पर खड़ा है – ये सब जानते हैं. लेकिन, 1990 से शुरू हुए धार्मिक उथलपुथल और मंथन से बीजेपी के हाथ जो नेता आये, वे कितने काबिल, शिक्षित और समर्थ हैं ? आप पाएंगे कि बीजेपी की दूसरी और तीसरी पीढ़ी के तकरीबन सभी नेताओं की ज़ुबां जहरीली, काम मूर्खों जैसे और फितरत गुंडों वाली है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

हाल के उन धार्मिक जुलूसों जैसे, जहां बाहर से गुंडे लाकर दंगे कराए गए इसीलिए ये कांग्रेस को खत्म करने की बात करते हैं, जो ख़त्म हो रही संस्थाओं को बचाना चाहती है. मैं इस भगवा ब्रिगेड को हिन्दू नहीं मानता. इन्हें हिंदुत्व का सर्टिफिकेट भी नहीं देता, क्योंकि इनकी फ़साद से हिन्दू ज़्यादा भुगत रहे हैं लेकिन ये नेता, इनके खरीदे हुए चैनल, पाले हुए पत्तलकार और ग़ुलाम राष्ट्रवादी आपसे हर बार हिन्दू का सर्टिफिकेट मांगते हैं, मांगते रहेंगे. इन्हें कतई सर्टिफिकेट न दें. उनकी असलियत फौरन उनके सामने उजागर कर दें. भाग खड़े होंगे.

बॉलीवुड के लोकप्रिय ट्रैक्स पर रचे नफरती गाने

लालकृष्ण आडवाणी की 1990 में रथ यात्रा के दौरान हिंदु संगठनों ने बॉलीवुड के लोकप्रिय ट्रैक्स पर नफरती गाने रचकर ऑडियो कैसेट्स के रूप में देश के हर कोने में पहुंचा दिया था. 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भड़के दंगों के पीछे मुस्लिमों का अपमान करने वाले और मुस्लिम धर्मावलंबियों को भड़काने वाले ऐसे गानों का बड़ा हाथ रहा था.

यूपी के पॉप सिंगर संदीप आचार्य को हिंदू पॉप का पुरोधा माना जाता है. उनका दावा है कि उन्होंने ही मुस्लिमों के प्रति नफरत को अपने गानों में जगह दी और लोकप्रिय किया. भोपाल की पॉप सिंगर लक्ष्मी दुबे भी नफरत के गाने गाती हैं और पिछले दिनों उन्होंने अपने लाइव परफॉर्मेंस में भड़काऊ गाने गाए थे. यू-ट्यूब पर उनके 20 लाख फॉलोवर्स हैं और चुनाव के दौरान हिंदू वोट बैंक का ध्रुवीकरण करने के लिए उनके शो की डिमांड खासी रहती है.

डीजे पर बजने वाले ये आपत्तिजनक गाने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए, 295 ए और 505 (2) का खुलेआम उल्लंघन करते हैं लेकिन अभी तक पुलिस ने ऐसे किसी भी एलबम या गायक/निर्माता के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है.

भक्ति के नाम पर नफरती ‘डीजे हिंदुत्व’

कहते हैं कि सुमधुर संगीत मन को शांति देता है लेकिन अगर संगीत में गाने के बोल जहर में डूबे हुए हों और वह 40 हजार वॉट के स्पीकर पर कानफोड़ू अंदाज में बज रहा हो तो क्या असर होगा ? साल रामनवमी और हनुमान जयंती पर भक्ति के नाम पर ऐसे ‘डीजे हिंदुत्व’ संगीत का असर यह रहा कि देश के करीब एक दर्जन शहरों में दंगे भड़क गए. विभिन्न वॉट्सएप ग्रुप्स से लेकर यू-ट्यूब और डाउनलोडर एप्स में ऐसे जहर बुझे भड़काऊ गानों की भरमार है, लेकिन नफरती बोल के नाम पर अल्पसंख्यकों को राजद्रोह के आरोप में पकड़ रही पुलिस को इन गानों और वीडियो से कोई फर्क नहीं पड़ता.

पिछले साल दिसंबर में हरिद्वार धर्म संसद से पहले डासना देवी मंदिर के प्रमुख यति नरसिंहानंद को पृष्ठभूमि में दर्शाता हुआ एक वीडियो रिलीज हुआ था. डासना मंदिर में ही शूट किए गए उस वीडियो एलबम का शीर्षक था – नरसिंहानंद जागवे. दादरी के हिंदू राजपूत पॉप सिंगर उपेंद्र राणा के इस एलबम में एक ट्रैक है – धर्म की शातिर आगे बढ़के अब हथियार उठाओ. उपेंद्र के एलबम को यू-ट्यूब पर लाखों लोग देख चुके हैं. यहां तक कि रागा और जियो सान जैसे म्यूजिक प्लैटफॉर्म पर भी उपेंद्र के गाने खूब सुने और डाउनलोड किए जाते हैं.

उपेंद्र का एलबम और हरिद्वार धर्म संसद में यति नरसिंहानंद के बिगड़े बोल, दोनों में ज्यादा फर्क नहीं है. पिछले 4 साल में इस तरह के सैकड़ों म्यूजिक एलबम और नफरती बोल वाले हिंदुत्ववादी गानों की भरमार हो चुकी है, मध्यप्रदेश के गायक संदीप चतुर्वेदी इसे धर्म का उत्सव मनाना कहते हैं, रामनवमी पर खरगोन में भड़के दंगों से पहले संदीप के गाने डीजे पर बज रहे थे, जिनके संदेश कुछ ऐसे थे- जब हिंदु का खून खौलेगा, मुसलमानों को तलवार की नोंक पर उनकी सही जगह दिखा दी जाएगी, इसके बावजूद संदीप का कहना है कि उनके गानों को हिंदू समुदाय इसलिए पसंद करता है, क्योंकि ये उन्हें उनके धर्म के करीब लेकर आता है,

कैसे शुरू हुआ गानों में नफरत का ट्रेंड

लालकृष्ण आडवाणी की 1990 में रथ यात्रा के दौरान हिंदु संगठनों ने बॉलीवुड के लोकप्रिय ट्रैक्स पर नफरती गाने रचकर ऑडियो कैसेट्स के रूप में देश के हर कोने में पहुंचा दिया था. 1992 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद भड़के दंगों के पीछे मुस्लिमों का अपमान करने वाले और मुस्लिम धर्मावलंबियों को भड़काने वाले ऐसे गानों का बड़ा हाथ रहा था. बाद के 15 साल में में हिंदु पर्व-त्योहारों पर हिंदु पॉप के नाम से ऐसे भड़काऊ गानों की बड़ी धूम रही है.

पहले ये गाने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के इर्द-गिर्द बना करते थे. इनके बोल- अगर छुआ मंदिर तो तुझको तेरी औकात बता देंगे, जैसे रहे. ‘डीजे हिंदुत्व’ का सेहरा इन पर यूपी के पॉप सिंगर संदीप आचार्य को हिंदू पॉप का पुरोधा माना जाता है. उनका दावा है कि उन्होंने ही मुस्लिमों के प्रति नफरत को अपने गानों में जगह दी और लोकप्रिय किया. मक्के में जल चढ़ाऊंगा सावन के महीने में और जितने देशद्रोही हैं, उनकी… जैसे बेहद आपत्तिजनक और भड़काऊ उनके गाने युवाओं में बहुत लोकप्रिय हैं.

भोपाल की पॉप सिंगर लक्ष्मी दुबे भी नफरत के गाने गाती हैं और पिछले दिनों उन्होंने अपने लाइव परफॉर्मेंस में भड़काऊ गाने गाए थे. यू-ट्यूब पर उनके 20 लाख फॉलोवर्स हैं और चुनाव के दौरान हिंदू वोट बैंक का ध्रुवीकरण करने के लिए उनके शो की डिमांड खासी रहती है. हनुमान जयंती पर दिल्ली की जहांगीरपुरी में आयोजित जुलूस के दौरान भी लक्ष्मी दुबे का ही ट्रैक डीजे पर बजाया जा रहा था.

क्या कहता है कानून ?

हिंदू आयोजनों में डीजे पर बजने वाले ये आपत्तिजनक गाने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 153 ए, 295 ए और 505 (2) का खुलेआम उल्लंघन करते हैं. लेकिन अभी तक पुलिस ने ऐसे किसी भी एलबम या गायक/निर्माता के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की है. हिंदू संगठनों के द्वारा खड़े किए गए नए मुद्दों के आधार पर डीजे हिंदुत्व के नए एलबम भी लगातार बन रहे हैं.

मिसाल के लिए हिजाब विवाद पर मयूर म्यूजिक नाम की एक कंपनी ने यू-ट्यूब पर हिजाब हिजाब क्यों करती हो, जब रहती हो हिंदुस्तान में, नाम का एलबम निकाला है. इसी तरह यूपी में योगी आदित्यनाथ की चुनावी जीत के बाद नए नफरती एलबम बने हैं.

रामनवमी और हनुमान जयंती पर दिल्ली, राजस्थान, एमपी और गुजरात में हुए दंगों की पूर्व CJI की अगुवाई में न्यायिक जांच की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है. देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि ऐसी मांग मत कीजिए, जो पूरी न की जा सके. क्या कोई जज खाली बैठा है ? वाकई, शायद ही कोई जज खाली बैठा हो ! सरकारी मेहरबानी को भला कौन अक्लमंद ठुकराता है ? अगर खाली हो, तो भी क्या उनसे जांच करवाना ठीक रहेगा ?

दोहराया जा रहा है नाजी इतिहास ?

जर्मनी के नाजी शासक एडोल्फ हिटलर के प्रचार मंत्री जोसेफ गोएबल्स का मानना था कि संगीत व्यक्ति की बौद्धिकता के बजाय उसके दिलो-दिमाग और भावनाओं पर जल्दी असर करता है. माना जाता है कि हिटलर को सत्ता की सीढ़ी चढ़ाने के साथ ही दुनिया को दूसरे विश्व युद्ध की आग में झोंकने में यहूदियों के प्रति घृणा और अपमानजनक संगीत का बड़ा योगदान रहा था.

सामाजिक सिद्धांतकार वॉल्टर बेंजामिन के मुताबिक, इस तरह के नफरत भरे भड़काऊ संगीत भीड़ को धार्मिक वर्चस्व की अभिव्यक्ति का पूरा मौका देते हैं. वे मानते हैं कि राजनीति में सौंदर्यशास्त्र का परिचय ही फासीवाद का तार्किक परिणाम है. भारत में यह परिणाम सांप्रदायिक दंगों के रूप में नजर आ रहा है, जिन्हें भड़काने में लंबे समय से इस तरह के डीजे हिंदूत्ववादी संगीत का बड़ा हाथ है लेकिन जिस तरह से ये लोकप्रिय हो रहे हैं, उससे लगता है कि ये लंबे समय तक देश में नफरत का स्रोत बने रहेंगे. यह बड़ी चिंता की बात है.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Donate on
Donate on
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

हम कभी झूठ नहीं बोलते सरकार हर बार झूठ बोलती है – हिमांशु कुमार

Next Post

ब्राह्मण राज्य स्थापित कर अपने ही पैरों में गुलामी की जंजीर पहनने के लिए बेताब शुद्र

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

ब्राह्मण राज्य स्थापित कर अपने ही पैरों में गुलामी की जंजीर पहनने के लिए बेताब शुद्र

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

वैक्सीन ट्रॉयल का डाटा, बुलेट ट्रेन और अंबानी की दादागिरी

March 25, 2022

कश्मीर में युवाओं के हाथ में पत्थर क्यों हैं ॽ

September 3, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.