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याकोव स्वर्दलोव के निधन पर लेनिन द्वारा दिया गया भाषण

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 27, 2022
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याकोव स्वर्दलोव के निधन पर लेनिन द्वारा दिया गया भाषण
याकोव स्वर्दलोव के निधन पर लेनिन द्वारा दिया गया भाषण

कामरेड्स ! आज जब सभी देशों के मजदूर पेरिस कम्यून के बहादुराना विद्रोह और दुखद अंत की स्मृति को सम्मानपूर्वक स्मरण कर रहे हैं, हमें याकोव मिखाइलोविच स्‍वर्दलोव के अवशेषों को दफन करना पड़ा रहा है. सर्वहारा क्रांतियों के नुकीले मोड़ों और इसके विजय के अभियानों के दौरान कॉमरेड स्वर्दलोव ने किसी और की तुलना में अधिक पूर्णता एवं अविछिन्‍नता के साथ सर्वहारा क्रांति के मुख्‍य और सबसे महत्त्वपूर्ण विशेषताओं को व्‍यक्‍त करने में सफलता पाई, और ठीक इसी चीज ने उन्‍हें क्रांति के एक खास नायक बनाने में क्रांति के उद्देश्यों के प्रति उनके असीम समर्पण से भी अधिक भूमिका निभाई.

कॉमरेड्स ! सतही ज्ञान के आधार पर निर्णय लेने वाले लोग, हमारी क्रांति के असंख्‍य दुश्‍मन, और वे लोग जो आज भी क्रांति और उसके विरोधियों के बीच झुलते रहते हैं, यह मानते हैं कि हमारी क्रांति ने जिस दृढ़ और अथक तरीके से मजदूर वर्ग के शोषकों एवं दुश्‍मनों से निपटा है, वही हमारी क्रांति की सबसे चमकदार विशेषता है. इसमें कोई शक नहीं है कि इसके बिना, यानी क्रांतिकारी हिंसा के बिना, सर्वहारा कभी सफल नहीं हो सकता था. इसमें भी कोई शक नहीं है कि क्रांतिकारी हिंसा क्रांति के विकास के निश्‍चत मंजिलों में, लेकिन एकमात्र निश्चित एवं खास परिस्थितियों में ही, एक जरूरी और वैध हथियार था, हालांकि सर्वहारा जनगण एवं मेहतनकश जनता का संगठन क्रांति की इससे भी ज्‍यादा गहन और स्‍थाई विशेषता, तथा इसकी जीत की शर्त थी और है. लाखों मेहनकश अवाम का यह संगठन ही क्रांति का सबसे उपयुक्‍त प्रेरक और इसकी जीत का सबसे गहरा स्रोत है. और यही सर्वहारा क्राति की वह खासि‍यत है जिसने, संघर्ष के दौरान, उन नेताओं को सामने लाने का काम किया जिन्‍होंने हमारी क्रांति की उस विशिष्‍ट विशेषता को सबसे अ‍च्‍छी तरह व्‍यक्‍त किया जो इसके पहले किसी क्रांति में नहीं देखी गई, अर्थात जनगण का संगठन. सर्वहारा क्रांति की इस विशेषता ने याकोब स्‍वर्दलोव को भी सामने लाया, एक ऐसा व्‍यक्ति जो सर्वप्रथम एक संगठनकर्ता था.

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कॉमरेड्स, हम रूसी क्रांतिकारी, विशेष रूप से क्रांति की तैयारी के पसरे हुए, कभी-कभी दर्दनाक और अत्‍यधिक लंबे काल में, सिद्धांत, नीति एवं कार्यक्रम और हमारे व्‍यवहारि‍क कामों के बीच की खाई से जुझते रहे हैं. हम सबसे अधिक प्रत्‍यक्ष कार्रवाइयों से अलग-थलग हो सिद्धांत में अत्‍यधिक गहराई तक तल्‍लीन हो जाने से पी‍ड़ि‍त थे.

रूसी क्रांतिकारी आंदोलन के दशकों के इतिहास में उन शहीदों की एक ऐसी सूची है जो क्रांति के लिए समर्पित थे लेकिन जिन्‍हें अपने क्रांतिकारी आदर्शों को व्‍यवहार में उतारने का अवसर नहीं मिला. इस संबंध में, सर्वहारा क्रांति ने पहली बार क्रांतिकारी संघर्ष में अलग-थलग हो गए इन नायकों को एक वास्तविक जमीन, एक वास्तविक आधार, एक वास्तविक वातावरण, एक वास्तविक श्रोतागण और एक वास्तविक सर्वहारा सेना प्रदान की जहां वे अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर सकें. और इस संबंध में सबसे उत्कृष्ट नेता वे हैं जो व्यावहारिक, कुशल आयोजकों के रूप में अपने लिए एक असाधारण स्थान हासिल करने में सफल रहे हैं जैसा कि याकोव स्वर्दलोव ने हासिल किया और बखूबी किया.

यदि हम सर्वहारा क्रांति के इस नेता के जीवन का सर्वेक्षण करें तो हम पाते हैं कि संगठत करने की उनकी अद्भुत प्रतिभा का विकास लम्बे संघर्षों के दौरान हुआ. हम देख सकते हैं कि सर्वहारा क्रांति के इस नेता ने अपने हर अद्भुत उपहार को उस महान क्रांतिकारी के रूप में खुद के बल पर विकसित किया जो क्रांतिकारी गतिविधि की सबसे कठिन परिस्थितियों में विभिन्न युगों से गुजरा है और उनका अनुभव किया है. उन्होंने अपनी गतिविधियों के पहले ही चरण में, जब वे एक युवा ही थे जिसने बमुश्किल अभी राजनीतिक चेतना हासिल की थी, खुद को पूरी तरह से क्रांति के लिए समर्पित कर दिया। उस अवधि में, बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में ही, कॉमरेड स्वर्दलोव हमारे समक्ष सबसे उत्तम प्रकार के पेशेवर क्रांतिकारी के रूप में खड़े थे, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जिसने अपने परिवार और पुराने बुर्जुआ समाज की सभी सुख-सुविधाओं और आदतों को पूरी तरह से त्याग दिया था, एक मनुष्य के रूप में जिसने क्रांति के लिए दिलों-जां से खुद को समर्पित कर दिया था और जिसने कई वर्षों तक, यहां तक ​​कि दशकों तक, जेल से निर्वासन और निर्वासन से जेल में गुजारते हुए, उन विशेषताओं को विकसित किया जिसने कई-कई वर्षों तक क्रांतिकारियों को फौलादी बनाने का काम किया.

फिर भी इस पेशेवर क्रांतिकारी ने कभी भी, एक पल के लिए भी, जनता से संपर्क नहीं खोया. हालांकि जारशाही की परिस्थितियों ने उन दिनों के बाकी क्रांतिकारियों की तरह उन्हें भी मुख्य रूप से गुप्‍त व अवैध गतिविधियों तक सीमित रहने को मजबूर कर दिया था. फिर उन गुप्‍त और अवैध गतिविधियों में भी स्वर्दलोव हमेशा उन उन्नत श्रमिकों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलते रहे जो बीसवीं शताब्दी की शुरुआत में क्रांतिकारी बुद्धिजीवियों की पिछली पीढ़ी की जगह लेने लगे थे.

यह वह समय था जब सैकड़ों उन्नत श्रमिक सक्रि‍य हो गए थे और क्रांतिकारी संघर्ष में उस इस्‍पात जैसी कठोरता को हासिल किया था जिसने, जनता के बीच निकटतम संपर्क के साथ रूस में एक सफल सर्वहारा क्रांति करना संभव बना दिया. अवैध गतिविधियों की यह लंबी अवधि ही है जो उस व्यक्ति को सबसे बेहतर ढंग से चिन्हित करता है जो लगातार लड़ाई में था, जिसने कभी भी जनता के साथ संपर्क नहीं खोया, जिसने कभी रूस नहीं छोड़ा, जिसने हमेशा सबसे उन्नत श्रमिकों के साथ मिलकर काम किया, और जो सामान्य जीवन से अलगाव के बावजूद, जिसमें उस क्रांतिकारी को जीने की सजा दी गई थी, न केवल श्रमिकों का प्रिय नेता बनने में सफल रहा, न केवल एक ऐसा नेता था जो व्यावहारिक कार्य से सबसे अधिक परिचित था, बल्कि वो उन्नत सर्वहाराओं का एक संगठनकर्ता भी बन गया था। कुछ लोगों की राय थी – और यह ज्यादातर हमारे विरोधियों या डगमगाने वालों पर लागू होता है – कि अवैध गतिविधियों में पूर्ण अवशोषण, पेशेवर क्रांतिकारियों के जीवन की यह विशेष परिस्थिति, उन्हें जनता से अलग कर देती है. लेकिन याकोव स्वर्दलोव की क्रांतिकारी गतिविधियों ने यह साबित कर दिया कि यह राय कितनी गलत थी; इसके विपरीत, क्रांति के प्रति इस पूर्ण समर्पण ने, जो उन लोगों के जीवन की विशेषता है जिन्होंने कई जेलों को अंदर से देखा था और साइबेरिया के सुदूर क्षेत्रों में निर्वासन झेला था, ने ऐसे नेताओं को पैदा किया जो हमारे सर्वहारा वर्ग के निखरे हुए लोग थे. और जब इसे मनुष्यों के ज्ञान और संगठनात्मक क्षमता के साथ जोड़ा गया, तो इसने महान संगठनकर्ताओं को पैदा किया. वे अवैध समूह, क्रांतिकारी गुप्‍त काम, अवैध पार्टी, जिसे किसी ने भी याकोव स्वर्दलोव की तरह इतने अविछिन्‍न तरीके से व्यक्त नहीं किया था या जिस्मानी रूप नहीं दिया था (यानी खुद में निरूपित नहीं किया था) – यही वह व्यावहारिक स्कूल था जिससे सफल होकर वह निकला था, और एकमात्र स्कूल जो उसे पहले समाजवादी सोवियत गणराज्य में पहले व्यक्ति के स्थान तक पहुंचने में सक्षम बना सकता था, व्यापक सर्वहारा जनगण के पहले संगठनकर्ता के स्थान तक पहुंचा सकता था.

कॉमरेड्स ! वे सभी जिन्हें मेरी तरह, कॉमरेड स्वर्दलोव के साथ दिन-प्रतिदिन काम करने का अवसर मिला है, वे भली-भांति जानते हैं कि इस व्यक्ति में लोगों को संगठित करने की असाधारण प्रतिभा थी, जिसने हमें वह दिया जिस पर हमें बहुत गर्व था, अभी तक है, और बिलकुल होना चाहिए. उन्होंने हमारे लिए ठोस, कुशल, वास्तव में संगठित गतिविधियों, संगठित सर्वहारा जनता के योग्य गतिविधियों को आगे बढ़ाना, और सर्वहारा क्रांति की आवश्यकताओं को पूरा करना संभव बनाया; उन समेकित, ठोस व संगठित गतिविधियों को जिनके बिना हम एक भी सफलता हासिल नहीं कर सकते थे, जिसके बिना हम उन असंख्य कठिनाइयों में से किसी एक पर भी पार नहीं पा सकते थे जिनका हमको सामना करना पड़ा था, और जिसके बिना हम अतीत में अनुभव की गई या वर्तमान में अनुभव की जा रही गंभीर परीक्षाओं में से किसी एक का भी सामना करने में सक्षम नहीं होते.

उस उग्र संघर्ष में जिसे हम क्रांति कहते हैं, उस विशेष पद पर जहां प्रत्येक क्रांतिकारी पहुंचता है, उस समय में जब व्यक्तियों के एक छोटे समूह का काम भी एक काफी महत्‍वपूर्ण विचार-विमर्श का रूप ले लेता है, संघर्ष के दौरान प्राप्त उस उच्च नैतिक प्रतिष्ठा का अत्यधिक महत्व हो जाता है, निर्विवाद और सर्वमान्य प्रतिष्ठा जिसकी जड़ें निःसंदेह अमूर्त नैतिकता में नहीं, बल्कि एक क्रांतिकारी सेनानी की नैतिकता में, क्रांतिकारी जनता की लामबंद कतारों की नैतिकता में निहित है.

यह बात कि एक साल से अधिक समय से हम उन अविश्वसनीय बोझों को सहन करने में सक्षम रहे हैं जो समर्पित क्रांतिकारियों के एक सीमित समूह के कंधों पर आ गए हैं, और वे अग्रणी समूह इतनी दृढ़ता से, जल्दी और सर्वसम्मति से सबसे कठिन समस्याओं का फैसला कर सकते हैं, यह उनके बीच मौजूद एक प्रमुख स्थान ग्रहण किये हुए याकोव स्वर्दलोव जैसे असाधारण रूप से प्रतिभाशाली संगठनकर्ताओं के कारण ही संभव हो पा रहा था. वे अकेले ही सर्वहारा आंदोलन के अग्रणी लोगों के बारे में एक अद्भुत ज्ञान प्राप्त करने में कामयाब रहे थे, अकेले ही, संघर्ष के लंबे वर्षों के दौरान – जिसका उल्लेख मैं यहां बहुत संक्षेप में ही कर सकता हूं – व्यावहारिक कार्यकर्ता के अद्भुत अंतर्ज्ञान को प्राप्त करने में सफल रहे थे, एक संगठनकर्ता की अद्भुत प्रतिभा, एक बिल्कुल चुनौती-रहित प्रतिष्ठा, जिसकी बदौलत वह अखिल रूसी केंद्रीय कार्यकारि‍णी समिति के काम की उन कुछ सबसे बड़ी शाखाओं का प्रभार अकेले लेने में सक्षम थे, जिसका सामना आम लोग केवल एक समूह में ही कर सकते थे. वे अकेले ही अपने लिए एक ऐसी जगह बनाने में सफल रहे थे कि संगठन के बहुत बड़े और महत्वपूर्ण व्यावहारिक प्रश्नों पर, उनका मात्र एक शब्द, बिना किसी औपचारिक वोट के, सम्मेलनों के बिना, एक निर्विवाद और अंतिम समाधान तक पहुंचने के लिए पर्याप्त था; और हर कोई आश्वस्त महसूस करता था कि प्रश्नों को ऐसे गहन व्यावहारिक ज्ञान और संगठित अंतर्ज्ञान के आधार पर सुलझाया गया होगा कि न केवल सैकड़ों और हजारों उन्नत कार्यकर्ताओं, बल्कि जनता भी उस समझौते को स्वीकार कर लेगी.

इतिहास ने बहुत पहले साबित कर दिया था कि संघर्ष के दौरान महान क्रांतियां महापुरुषों को सबसे आगे लाती हैं और उन प्रतिभाओं को विकसित करती हैं जो पहले असंभव लगती थी. किसी को भी विश्वास नहीं होगा कि अवैध अध्ययन मंडल और गुप्‍त गतिविधियों का विचारधारात्‍मक समूह, छोटी, प्रताड़ि‍त हुई पार्टी का स्कूल, तुरुखांस्क जेल का स्कूल इस संगठनकर्ता को पैदा कर सकता है जिसने पूरी तरह से निर्विवाद प्रतिष्ठा हासिल की, पूरे रूस में सोवियत सत्ता का संगठनकर्ता, अपने ज्ञान में अद्वितीय यह व्यक्ति, जिन्होंने उस पार्टी के काम को संगठित किया जिसने सोवियत संघ की स्थापना की और सोवियत सरकार की स्थापना की, जो अब सभी राष्ट्रों, दुनिया भर के सभी देशों में अपनी कठिन, दर्दनाक, रक्‍तरंजित लेकिन विजयी कदम बढ़ा रहा है.

हम इस व्यक्ति की जगह कभी नहीं भर पाएंगे, जिसने इस तरह की असाधारण सांगठनिक प्रतिभा को विकसित किया था, अगर जगह भरने से हमारा मतलब इन सभी गुणों वाला एक आदमी, एक कॉमरेड ढूंढना है तो. कोई भी जो याकोव स्वर्दलोव का करीबी रहा हो संदेह नहीं हो सकता है कि इस संबंध में वह अपूरणीय है. एक संगठनकर्ता के रूप में उन्होंने व्यक्तियों को चुनने और उन्हें सभी विभिन्न विभागों में जिम्मेदार पदों पर नियुक्त करने में जो कार्य किये, भविष्य में केवल तभी किया जा पाएगा जब हम उन विभिन्न प्रमुख विभागों को संभालने के लिए व्यक्तियों के एक पूरे समूह को नियुक्त कर सकेंगे, वैसे विभाग जिनका उनके पास एकमात्र प्रभार था, और यदि ये व्यक्ति उनके पदचिन्हों पर चलकर उस काम को करने के निकट आ जा पाएं जो उन्होंने अकेले किया था.

लेकिन सर्वहारा क्रांति ठीक इसीलिए मजबूत है क्योंकि इसकी जड़ें बहुत गहरी हैं. हम जानते हैं कि यह नए लोगों को उन लोगों की जगह लेने के लिए प्रोत्साहित करती है जिन्होंने संघर्ष में अपने जीवन को समर्पित कर दिया है; वे शायद कम अनुभवी हों, कम ज्ञान रखते हों, और पहले से कम प्रशिक्षित हों, लेकिन वे ऐसे लोग हैं जिनका जनता के साथ व्यापक संपर्क है और जो दिवंगत प्रतिभाओं की जगह लेने के लिए, अपने उद्देश्य को जारी रखने के लिए, उनके द्वारा दिखाए गए मार्ग पर चलते रहने और जो उन्होंने शुरू किया था उसे पूरा करने के लिए अपने रैंक के व्यक्तियों के समूहों को बढ़ावा देने में सक्षम हैं. इस संबंध में हम पूरी तरह से आश्वस्त हैं कि रूस और पूरी दुनिया में सर्वहारा क्रांति व्यक्तियों के, सर्वहारा वर्ग और मेहनतकश किसानों के समूह दर समूह को बढ़ावा देगी, जिनके पास जीवन का व्यावहारिक ज्ञान होगा, जो प्रतिभा को संगठित करेगा, व्यक्तिगत नहीं तो सामूहिक तरीके से, जिसके बिना सर्वहारा वर्ग की लाखों की मजबूत सेना जीत हासिल नहीं कर सकती.

कॉमरेड याकोव स्वर्दलोव की स्मृति न केवल उस क्रांतिकारी के अपने उद्देश्य के प्रति समर्पण के स्थायी प्रतीक के रूप में काम करेगी बल्कि एक व्यावहारिक शांत दिमाग, व्यावहारिक कौशल, जनता के साथ जीवंत संपर्क और उनका मार्गदर्शन करने की क्षमता के मॉडल के रूप में भी काम करेगी; यह भी एक प्रतिज्ञा है कि सर्वहारा की बढ़ती संख्या, इन उदाहरणों द्वारा निर्देशित, विश्व कम्युनिस्ट क्रांति की पूर्ण जीत के लिए आगे बढ़ेगी.

  • याकोव एम स्वर्दलोव के निधन के बाद 18 मार्च 1919 को अखिल रूसी केंद्रीय कार्यकारी समिति के एक विशेष सत्र में याकोव स्वर्दलोव की स्मृति में वी. आई. लेनिन द्वारा दिया गया भाषण.

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