Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

कर्जन का कर्ज…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 5, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
कर्जन का कर्ज...
कर्जन का कर्ज…

‘भारत सरकार एक भारी भरकम मशीन है, जो कुछ करती धरती नहीं है’ – नाक मुंह चमकाते हुए लार्ड कर्जन ने जब भारत की धरती पर पहला कदम रखे, इन शब्दों से अपना इरादा जाहिर कर दिया. अब देश में प्रशासन की सारे कील कांटे दुरुस्त होने लगे. रेलवे से लेकर टेलीग्राफ तक सब कुछ ‘एफिशिएंट’ किया जाने लगा.

बंगाल विभाजन के लिए बदनाम इस वाइसराय के 6 साल, दरअसल ब्यूरोक्रेसी को चार्जअप करने के रहे. पर कर्जन का सबसे बड़ा कर्ज तो भारत के इतिहास का संरक्षण है. जहां जो खूबसूरत था- आगरे ताजमहल हो, या सांची का स्तूप, संवारा गया. सिंधु घाटी की खुदाई हो, या अजंता एलोरा के आर्ट.. कर्जन ने बराबर ध्यान दिया.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

ASI की स्थापना तो 1861 में हो गई थी. एलेग्जेंडर कनिंघम, जो जेम्स प्रिंसेप के चेले, फैन और फॉलोवर थे, ब्राह्मी लिपि पढ़ लेने के बाद भारत में मौर्य साम्राज्य की निशानदेही कर रहे थे.

ASI के पहले डायरेक्टर के तौर पर उन्होंने काफी जोर लगाया, पर खोजना, खोदना अकादमिक चीज है, संरक्षण पुनरोद्धार दूसरी. उसमें रोकड़ा लगता है. और क्रिस्चियन फेथ वालों की सरकार पेगन आर्ट और विदेशी संस्कृति के संरक्षण पर क्यों ही ध्यान देती. ASI एक रोता, बिसूरता विभाग था. कर्मचारियों और फंड की कमी से जूझता…!

कर्जन ने ऑफिस दिया, फंड दिया और उत्साह दिया. 1901 में एशियाटिक सोसायटी में भाषण देते हुए कहा कि इन मॉन्यूमेंट्स की सुरक्षा करना सरकार का प्राथमिक दायित्व है.

‘अगर कोई यह कहता है कि हम क्रिश्चियन को पेगन (प्रकृति पूजक) प्रतीकों और संस्कृति के संरक्षण से क्या लेना देना है, तो ऐसे आदमी में मैं अनंतकाल तक बहस करने को तैयार हूं…!’

और लाट साहब से बहस करे कौन ?

1902 में कैम्ब्रिज स्कॉलर और उत्साही प्राणी, जॉन मार्शल को ASI का डायरेक्टर नियुक्त किया, तो उसमें जान आ गयी. देश में तमाम इमारतों के संरक्षण का काम शुरू हुआ. कुतुब से खजुराहो तक फंड सेंक्शन हुए, स्टाफ बैठा.

मार्शल ने कैटलॉग बनाने, फोटोग्राफी, रिकार्ड रखने और रिस्टोरेशन टेक्निक पर काम किया. और पहली बार, सर जॉन मार्शल ने ही, भारतीयों को भारतीय इतिहास खोजने, खोदने के काम में शामिल किया.

कर्जन ने मार्शल को खुला हाथ दिया. इस काम की खुली प्रशंसा ने, सिटी एडमिनिस्ट्रेटर्स और जिले के अफसरों को भी प्रोत्साहित किया कि वे अपने इलाको में, लोकल फंड से भारतीय आर्कियोलॉजिकल साइट्स पर रिस्टोरेशन का काम करे.

नतीजतन, बहुत से ऐतिहासिक भवन बिना ASI के भी नवजीवन पा गए. मगर सबसे ज्यादा कर्जन का ध्यान किसी भवन ने खींचा, तो वह ताजमहल था.

यूं तो विलियम बैंटिंक ने भी इसके संरक्षण के लिए कुछ प्रयास किये थे. पर अब तक इसका गार्डन जंगल में तब्दील हो चुका था, फ़व्वारे मिट्टी में धंस चुके थे. ताजमहल को जिस स्वरूप में आप देखते हैं, उसे रिस्टोर करने का काम कर्जन का है.

जब सुंदर भवन, अपनी पूरी छटा बिखेरे, तो उसे बैठकर देखने के लिए जगह भी तो होनी चाहिए. तो जनाब, हर हिंदुस्तानी, हर विदेशी ताज के सामने जिन बेंच पर बैठकर फोटो खिंचवाते हैं, डीपी, प्रोफ़ाइल पिक बनाते हैं, वो संगमरमर की बेंच, लार्ड कर्जन की लगवाई हुई है.

इसके पीछे की कथा यह है कि 1880 में जब वे आम अफसर की तरह कुछ समय के लिए भारत आये थे, ताज को देखा था. इस भवन को देखकर वे चमत्कृत रह गए.

लेकिन वहां आसपास गंदगी, थूक, मूत्र की महक से बेहद दुःख हुआ. शायद इसी वजह से जब वे वाइसराय बनकर आये, तो उनकी अप्रतिम ऊर्जा का एक हिस्सा इंडियन आर्कियोलॉजी पर भी लगा.

ताज के लिए दीवानगी का आलम यह था कि वहां जंगल हटवाने के बाद, उनके बताए पौधों की जगह, दूसरे पौधे लगाए जाने की खबर सुनकर, कलकत्ता के अपने पैलेस में लगभग भौंकते हुए अधिकारियों को लताड़ा. उनमें से एक बुदबुदाया- ‘ये आदमी ताजमहल का पुत्र है, या उसका आशिक है ??’

बहरहाल, 6 साल कार्यकाल के बाद, ताज की छवि आंखों में बसाए कर्जन ने हिंदुस्तान से विदा ली.

देश उनसे बेतरह नफरत करता था. कर्जन ने बंगाल, जो तब बिहार, झारखंड, उड़ीसा, बंग्लादेश, असम को मिलाकर बना ब्रिटिश शासित राज्य था, उसे दो स्टेट में बांट दिया.

यह हिन्दू मुस्लिम डिवाइड था, या एफीशिएंसी फ्रीक प्रशासक का एक एडमिनिस्ट्रेटिव डिसिजन, यह तो इतिहास को देखने का अलग अलग नजरिया है. पर इसमें भी अच्छाई यह कि बंगभंग और फिर स्वदेशी आंदोलन…, भारतीय आजादी के संघर्ष का पहला मील का पत्थर हुआ.

आगे चलकर लार्ड कर्जन ऑक्सफोर्ड के चांसलर बने, विदेश मंत्री बने, हाउस ऑफ लॉर्ड्स के लीडर रहे. उन्हें मारने की कोशिश हुई, जिसमें उनका मासूम भतीजा मार डाला गया. उनके सारे इतिहासकार आज वामपन्थी करार देकर गरियाये जाते हैं. कर्जन का कर्ज उतारने का ये हमारा तरीका है.

  • मनीष सिंह

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

भाजपा-आरएसएस संविधान से ‘समाजवादी और सेकुलर’ शब्द हटाने के लिए माहौल बना रहे हैं

Next Post

Democracy vs Mobocracy

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

Democracy vs Mobocracy

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

सरकार से सांठगांठ कर न्यायपालिका का एक हिस्सा संविधान बदलने का माहौल बना रहा है

May 23, 2022

UPA के समय के तेल-बॉन्ड के कारण पेट्रोल 110 रुपया लीटर हुआ ?

August 24, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.