Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

माओवादी महासचिव थिप्पिरि तिरुपति : एक दलित योद्धा की क्रांतिकारी यात्रा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 17, 2025
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
माओवादी महासचिव थिप्पिरि तिरुपति : एक दलित योद्धा की क्रांतिकारी यात्रा
माओवादी महासचिव थिप्पिरि तिरुपति : एक दलित योद्धा की क्रांतिकारी यात्रा

माओवाद की नई कमान में एक ऐतिहासिक चेहरा थिप्परी तिरुपति एक ऐतिहासिक परिघटना है. भारतीय वामपंथी आंदोलन के सबसे क्रांतिकारी संगठन कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) (सीपीआई (माओवादी))के महासचिव थिप्पिरि तिरुपति, जिन्हें देवजी (Devji) के नाम से जाना जाता है, न केवल एक सैन्य रणनीतिकार हैं, बल्कि माओवादी आंदोलन में जातिगत न्याय की एक प्रतीकात्मक छवि भी हैं.

2025 में नंबाला केशव राव (उर्फ बासवराज) की मौत के बाद सितंबर में महासचिव पद पर नियुक्ति के साथ वे संगठन के तीसरे तेलुगु नेता बने. दलित (मादीगा जाति) समुदाय से आने वाले तिरुपति की यह नियुक्ति माओवादियों के लिए ‘ऐतिहासिक बदलाव’ मानी जा रही है, जो लंबे समय से ऊपरी जातियों (खासकर ब्राह्मणों) के वर्चस्व का शिकार रहा है.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की मोस्ट वांटेड लिस्ट में उनका नाम शामिल है, और उन पर 1 करोड़ रुपये का इनाम है. वे दंडकारण्य के जंगलों में छिपे हुए हैं, जहां वे गोरिल्ला युद्ध की रणनीति तैयार करते हैं. इस लेख में उनकी जीवनी, संघर्ष और वर्तमान भूमिका पर संक्षिप्त विश्लेषण प्रस्तुत करता हूं.

प्रारंभिक जीवन : दलित पृष्ठभूमि से जागृति की शुरुआत

थिप्पिरि तिरुपति का जन्म लगभग 1963-65 के आसपास तेलंगाना के जगतियाल जिले (तत्कालीन करीमनगर जिला) के कोरुटला टाउन के अंबेडकर नगर में हुआ. उनके पिता का नाम वेंकट नरसैया था, और वे मादीगा जाति के दलित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं—एक ऐसा समुदाय जो सदियों से सामाजिक और आर्थिक शोषण का शिकार रहा है. तिरुपति का बचपन गरीबी और जातिगत भेदभाव की छाया में बीता, जो बाद में उनकी क्रांतिकारी चेतना का आधार बना.

कॉलेज के दिनों में वे हैदराबाद के ओस्मानिया विश्वविद्यालय से जुड़े, जहां 1975 में रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) का गठन हुआ. आरएसयू, जो दक्षिणपंथी गुटों द्वारा छात्र नेता की हत्या के विरोध में बनी, माओवादी आंदोलन का प्रमुख भर्ती केंद्र बनी. तिरुपति ने यहां से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की, जहां वे छात्र आंदोलनों, भूमि अधिकार और जातिगत न्याय के मुद्दों पर सक्रिय हुए. आरएसयू पर 1992 में प्रतिबंध लगा, लेकिन इसने माओवादी संगठनों को सैकड़ों कैडर दिए. तिरुपति की दलित पृष्ठभूमि ने उन्हें आरएसयू में विशेष स्थान दिया, जहां वे आदिवासी और दलित छात्रों को संगठित करने में माहिर साबित हुए.

माओवाद में प्रवेश : नक्सलबाड़ी की लपटों से दंडकारण्य तक

1985 में थिप्पिरि तिरुपति ने सीपीआई (एमएल) पीपुल्स वॉर (पीडब्ल्यूजी) में औपचारिक रूप से प्रवेश किया, जो बाद में 2004 में माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर (एमसीसी) के साथ मिलकर सीपीआई (माओवादी) बना. नक्सलबाड़ी आंदोलन (1967) और तेलंगाना सशस्त्र किसान संघर्ष (1946-51) की विरासत से प्रेरित होकर वे भूमिगत जीवन में उतर गए. दंडकारण्य—छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और ओडिशा के जंगलों का यह क्षेत्र—उनकी कर्मभूमि बना, जहां वे आदिवासी विद्रोह को संगठित करने लगे.

तिरुपति की विशेषज्ञता गोरिल्ला युद्ध में थी. 2000 में उन्होंने पीपुल्स लिबरेशन गोरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) का निर्माण किया, जो माओवादियों का सशस्त्र विंग है. पिछले चार दशकों में वे दक्षिण बस्तर क्षेत्र में सक्रिय रहे, जहां उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण और हमलों की रणनीति तैयार की. उनकी उपनामों की लिस्ट—संजीव, चेतन, रामेश, सुदर्शन, देवन्ना—उनकी भूमिगत गतिविधियों का प्रमाण है.

प्रमुख भूमिकाएं और गतिविधियां : सैन्य रणनीतिकार की विरासत

थिप्पिरि तिरुपति को माओवादी संगठन में सेंट्रल मिलिट्री कमीशन का प्रमुख माना जाता है, जो पिछले दो दशकों से सैन्य विंग का नेतृत्व कर रहे हैं. वे सेंट्रल कमेटी और पोलिटब्यूरो के तीन बचे सदस्यों में से एक हैं. मिलिशिया इंचार्ज के रूप में वे दंडकारण्य के सेंट्रल रीजनल ब्यूरो (सीआरबी) को सैन्य मार्गदर्शन देते हैं. उनकी प्रमुख गतिविधियों में कई बड़े हमले शामिल हैं –

  • 2007 बीजापुर हमला: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में पुलिस बेस कैंप पर माओवादी हमला, जिसमें 55 सुरक्षाकर्मी मारे गए. तिरुपति ने इसकी रणनीति तैयार की.
  • 2010 दंतेवाड़ा एम्बुश: अप्रैल 2010 में छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में आईईडी हमला, जिसमें 76 सीआरपीएफ जवान मारे गए. पुलिस तिरुपति को इसका मास्टरमाइंड मानती है, जो आंध्र प्रदेश के माओवादियों को शामिल करने का परिणाम था.
  • अन्य योगदान: उन्होंने आदिवासी समुदायों में भर्ती बढ़ाई, विस्थापन विरोधी अभियान चलाए, और संगठन की सैन्य संरचना को मजबूत किया. 2009 से माओवादियों को प्रतिबंधित संगठन घोषित करने के बाद भी वे सक्रिय रहे.

तिरुपति की दलित पृष्ठभूमि ने उन्हें आदिवासी और दलित कैडरों के बीच लोकप्रिय बनाया, जो माओवादियों का मुख्य आधार हैं.

हालिया घटनाएं : 2025 का संकट और नई जिम्मेदारी

2025 माओवादियों के लिए संकटपूर्ण वर्ष रहा. मई 2025 में छत्तीसगढ़ के अबुझमाढ़ में बासवराजू की पुलिस मुठभेड़ में मौत के बाद सेंट्रल कमेटी ने सितंबर में तिरुपति को महासचिव नियुक्त किया. यह नियुक्ति मुप्पाला लक्ष्मण राव (गणपति) के बाद जगतियाल जिले का दूसरे महासचिव हैं. तिरुपति ने मल्लोजुला वेणुगोपाल राव (भूपति) को पछाड़ा, जो वैचारिक प्रमुख थे.

थिप्परी तिरुपति के महासचिव पद पर नियुक्ति के बाद आंतरिक तनाव उभरा. सितंबर 2025 में भूपति ने एक 22-पेज पत्र जारी कर हथियार डालने की अपील की, जिसे पार्टी ने अस्वीकार किया. सोशल मीडिया पर चर्चा हुई कि तिरुपति की दलित नियुक्ति ने ‘ब्राह्मण कोटरी’ (ऊपरी जाति नेताओं) में असंतोष पैदा किया. 15 अक्टूबर को भूपति ने 61 साथियों सहित आत्मसमर्पण ने संगठन को झकझोर दिया. तिरुपति ने दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमिटी (डीएसजेडसी) की कमान संभाली, जबकि मदवी हिड़मा को बस्तर का प्रमुख बनाया गया.

तिरुपति की पोती ने मई 2025 में एक वीडियो जारी कर उनसे आत्मसमर्पण की अपील की, जिसमें कहा गया कि वे समतामूलक समाज के लिए समर्पित हैं लेकिन हालिया घटनाएं दुखद हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2026 तक नक्सलवाद उन्मूलन के वादे के बीच तिरुपति का नेतृत्व संगठन को पुनर्गठित करने की कोशिश है. X पर हालिया पोस्ट्स में उनकी नियुक्ति को ‘सोशल जस्टिस ऑप्टिक्स’ कहा गया, जो भर्ती बढ़ाने का प्रयास है.

चुनौतियां और भविष्य : संकट में माओवाद का नया चेहरा

थिप्पिरि तिरुपति का नेतृत्व माओवादियों के लिए दोहरी चुनौती है. एक ओर, सरकारी अभियान (ऑपरेशन प्रहार) और पुनर्वास नीतियां (20 लाख रुपये प्रति कैडर) से कैडर भाग रहे हैं—2025 में 312 माओवादी मारे गए, 100+ आत्मसमर्पण. दूसरी ओर, आंतरिक फूट और जातिगत तनाव संगठन को कमजोर कर रहे हैं. तिरुपति की दलित छवि आदिवासी-दलित भर्ती को बढ़ावा दे सकती है, लेकिन पोलिट ब्यूरो दस्तावेजों में ‘अनुकूल परिस्थितियों की कमी’ स्वीकार की गई है.

भविष्य में तिरुपति दंडकारण्य को मजबूत करने पर फोकस करेंगे, लेकिन राज्य की घेराबंदी से हमलों में कमी आ रही है. उनकी नियुक्ति माओवाद को ‘समावेशी’ बनाने का प्रयास है.

क्रांति की लपटों में एक अनसुलझा सवाल

थिप्पिरि तिरुपति माओवादी आंदोलन के एक ऐसे चेहरे हैं, जो शोषित वर्गों की आकांक्षा को प्रतिबिंबित करते हैं. उनकी यात्रा—दलित छात्र से सैन्य प्रमुख तक—माओवाद की जटिलताओं को उजागर करती है: जातिगत न्याय का वादा बनाम आंतरिक वर्चस्व. 2025 के संकट में वे संगठन को बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन क्या वे नक्सलबाड़ी की चिंगारी को फिर जला पाएंगे ? समय ही बताएगा. तिरुपति का जीवन साबित करता है कि क्रांति व्यक्तियों से बड़ी होती है, लेकिन नेतृत्व की भूमिका निर्णायक होती है.

Read Also –

 

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लॉग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-pay
Previous Post

वेणुगोपाल के आत्मसमर्पण पर एन. वेणुगोपाल का लेख : एक सामूहिक स्मृति जिसे कोई मिटा नहीं सकता

Next Post

‘माओवादियों’ का सरेंडर : किसकी जीत, किसकी हार ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

'माओवादियों' का सरेंडर : किसकी जीत, किसकी हार ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

अब नेपाल से बिगड़ता सांस्कृतिक संबंध भारत के लिए घातक

July 16, 2020

डेविड के सवालों का जवाब दो स्पार्टाकस

May 14, 2022

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.