Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

मोदी सरकार के साढ़े तीन साल बाद देश

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 17, 2017
in ब्लॉग
1
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

‘‘भारत सरकार का यह कदम घोर अनैतिक है. मुद्रा वैसा ही वादा करती है जैसे सिनेमा का टिकट सीट की गारंटी देता है. इस तरह के संसाधन सरकारें नहीं लोग पैदा करते हैं. भारत ने जो किया वह लोगों की सम्पत्ति की बहुत बड़ी चोरी है. मोदी सरकार ने 89 फीसदी करेंसी को एक झटके में अवैध घोषित कर दिया. ये कदम देश की अर्थव्यवस्था को तगड़ा झटका देगा. लोगों को परेशानी होगी. दुनिया के सामने डरावनी नजीर पेश होगी. इंदिरा के समय में नसबंदी जैसा अनैतिक फैसला लिया गया था. सरकार को लगता है कि नोटबंदी से आतंकी गतिविधियां बंद हो जायेगी, लेकिन ऐसा नहीं है’’ – स्टीब फोर्ब्स, दुनिया की मशहूर पत्रिका फोर्ब्स के मुख्य संपादक.

modi sarkar

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

मोदी सरकार ने अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल में देश में दो ही काम किया है: चुनाव प्रचार करना और नोटबंदी-जीएसटी जैसी व्यवस्था को जबर्दस्ती देश पर थोप कर औद्यौगिक घरानों के भारी कर्जौं को माफ करना.

भाजपा इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ है कि सत्ता सबसे जरूरी चीज है, इसलिए भाजपा ने देश के सामने एक अभिनेता “गब्बर सिंह” के रूप में नरेंद्र मोदी को प्रस्तुत किया, जिसे लोगों ने प्रधानमंत्री बना दिया, जो तकरीबन हमेशा ही चुनावी मोड में रहते हैं. चाहे वे देश के अन्दर हो या देश के बाहर. वे अपना हर अभिनय अगामी चुनाव को केन्द्रित कर करते हैं, जो सत्ता को बनाये रखने के लिए सबसे आवश्यक कदम होता है. इसके लिए उन्होंने देश की तकरीबन तमाम मीडिया संस्थानों को खरीद कर अपना प्रवक्ता बना लिया है, जो दिन-रात भाजपा के गुण गाते रहते हैं. उनके विरोधियों को जलील करते रहते हैं. फर्जी सर्वे करवाते रहते हैं और देश की जनता को बुनियादी सवाल से महरूम रखने के लिए एक से बढ़कर एक शिगूफे छोड़ते रहते हैं.

सत्ता बनाये रखने और उसे हासिल करने के लिए भाजपा ने दूसरा जो जबर्दस्त कदम उठाया वह है चुनाव आयोग को ही अपना प्रवक्ता बना लेना. भाजपा यह जानती है कि देश की जनता को आसानी से भरमाया नहीं जा सकता. मीडिया का प्रचार भी अपनी विश्वसनीयता खो रहा है. तब उसने चुनाव आयोग को अपना माध्यम बनाया और ईवीएम को अपना हथियार बना लिया, जिससे वह मनचाहे फल हासिल कर सकते हैं. हम सभी ने ईवीएम को लेकर चुनाव आयोग की नीचता को दिन की सफेद रोशनी में देखा है, जिसमें ईवीएम के साथ छेड़छाड़ को कितनी ढ़िठाई से वे नकार रहे थे. अब जब देश भर में ईवीएम पूरी तरह से संदिग्ध हो चुकी है तब उसमें नया विकास करते हुए वीवीपैट मशीन को लाने की कवायद चुनाव आयोग कर रहा है. अब जब यह भी आशंका के अनुरूप यह पूरी तरह जगजाहिर हो चुका है कि वीवीपैट मशीन के साथ मनचाहे परिणाम हासिल किये जा सकते हैं, अब चुनाव आयोग की निर्रथकता भी पूरी तरह सामने आ गया है. देश चुनाव आयोग जैसी एक बेकार और नपुंसक संस्था को पिस्सुओं की तरह पाल रही है.

सत्ता पर कब्जा बनाये रखने के लिए मोदी सरकार ने जो तीसरा सबसे जबर्दस्त कदम उठाया, वह है सर्वोच्च न्यायालय में अपने दलालों को न्यायाधीश के पद पर बिराजमान करवाना. अमित शाह अपराध के लिए कोर्ट में बहस कर रहे वकीलों को न्यायाधीश के पद पर बिराजमान करा दिये, जिसका परिणाम इस रूप में सामने आया कि अब वे सर्वोच्च न्यायालय का भी इस्तेमाल अपने मनोकूूल कर सकते हैं. पिछले दिनों वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने इस सवाल पर पूरे सिद्धत के साथ मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अदालत में उठाया, जब उन्होंने मुख्य न्यायाधीश को भ्रष्टाचार के एक मामले में आरोपित बताया था.

इसके अतिरिक्त देश की सर्वोच्च संस्थान राष्ट्रपति के पद पर एक भ्रष्ट दलाल को बिठा दिया, जिन्हें भाजपा की दलाली के आगे उस पद की गरिमा तक का ध्यान नहीं रहा. सारा देश अचंभित रह गया जब वे एक सूबे के मुख्यमंत्री के आगे नतमस्तक हो गए. उन्हें अपनी नहीं तो उस पद की गरिमा का तो ध्यान रखना ही चाहिए.

इन तीन सर्वोच्च निकायों को महत्वहीन या अपना दलाल बनाने के अपने प्रयास के अलावे सत्ता की तमाम जांच एजेंसियों को अपने हितों में बखूबी इस्तेमाल की खबरें तो आम बन गई है, जिसमें सीबीआई, ईडी, आयकर विभाग आदि जैसी संस्थायें प्रमुख हैं.

सत्ता पर काबिज रहने के इन उपक्रमों को भली-भांति साध लेने बाद मोदी सरकार के लिए चुनाव में मनचाहे परिणाम हासिल कर लेना कोई अचम्भा जैसा नहीं रहा है, और न ही कठिन कष्टप्रद चीज ही रही है, जिसमें आम जनता के हितों खातिर चिन्तित रहा जाये. इसका परिणाम यह हुआ कि मोदी सरकार आने वाली हर चुनावों में सत्ता बिमुख होने के डर से छुटकारा पा लिया.

सत्ता जाने के डर से मुक्ति प्रयास के साथ-साथ मोदी सरकार ने देश के भारी-भरकम काॅरपोरेट घरानों के भारी कर्जों से मुक्त कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप देश का बैंक रातों-रातों दिवालिया होने के कागार पर जा पहुंचा. बैंकों को दिवालिया होने से बचाने के लिए देश की बुनियादी मेहनतकश जनता की जमा रकम को हथियाने के लिए अचानक नोटबंदी का ऐलान कर दिया, जिससे दिवालिया होने के कागार पर पहुंचा बैंक तत्काल राहत का सांस लिया. इस तरह नोटबंदी के नाम पर 8.5 लाख करोड़ का अबतक की अनसुनी घोटाला को अंजाम दिया. इसमें सबसे पहले मोदी सरकार ने आरबीआई गवर्नर के पद पर एक बन्दरनुमा व्यक्ति उर्जित पटेल को बिठा दिया, और देश की अर्थव्यवस्था को सबसे गहरी चोट पहुंचाई, जिससे उबरने में देश को वर्षों लगेंगे.

8.5 लाख करोड़ के इस विशाल घपले को छुपाने के लिए कभी काला धन, तो कभी आतंकवाद जैसी कल्पित कहानी देश को सुनाया गया. 50 दिन के बाद 60 से ज्यादा दफा नियमों को बदलने के बाद भी सपनों का देश बनाने के दावे के नाम पर सैकड़ों लोगों की बलि ले ली, परन्तु नोटबंदी के एक साल के बाद देश सपनों का बनने के बजाय बेरोजगारों और दुःखियों का विशाल समुद्र बना गया.

औद्यौगिक घरानों की अर्थव्यवस्था को सुनिश्चित करने में तत्पर केन्द्र की मोदी सरकार ने देश के ऊपर एक और आपदा लाद दिया – जीएसटी. वगैर किसी पूर्व तैयारी के देश की जनता के ऊपर जिस आनन-फानन में 28 प्रतिशत जीएसटी के साथ एक देश-एक टैक्स के नाम पर जीएसटी के 5 स्लैब्स को अनिवार्य कर दिया, वह आम आदमी के समझ से परे हो गया. एक बार फिर देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई और देश आंसुओं के दलदल में बह चला.

केन्द्र की मोदी सरकार देश की अर्थव्यवस्था के साथ खुल्लमखुल्ला दुर्व्यवहार कर रही है. वह जिस आनन-फानन में अपनी बेतरतीब नीतियों को औद्यौगिक घरानों के हितों में लागू कर रही है, वह देश में एक विशाल खाई के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर रही है. इस विशाल खाई के एक तरफ अंबानी-अदानी जैसे 60 औद्योगिक घरानों की सम्पत्ति है तो दूसरी ओर करोड़ों की तादाद में बेरोजगार, भूखों और दमितों का समूह है. ये नंगे-भूखे लोग आखिर कब तक अपनी जान की कीमत पर 60 औद्यौगिक घरानों की हिफाजत करते रहेंगे, यह सवाल भविष्य के गर्भ में है.

 

Previous Post

भ्रष्टाचारियों और काले धन वाले की वैतरणी बनी भाजपा

Next Post

अरविन्द केजरीवाल और मोदी : दो सत्ता, दो निशाने

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

अरविन्द केजरीवाल और मोदी : दो सत्ता, दो निशाने

Comments 1

  1. S. Chatterjee says:
    8 years ago

    सटीक विश्लेषण। दरअसल मृतप्राय पूंजीवाद का आख़िरी सहारा होता है। फासीवाद का नया संस्करण सांवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा करके ही चलाया जा सकता है। वही हो रहा है, लेकिन, जनता देर सबेर सड़क पर उतरेगी। उस दिन इनका क्या हश्र होगा ये कल्पना नहीं कर पा रहे हैं।

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

फिलिस्तीन : मिया खलीफा का एक व्यक्तित्व यह भी है…

October 11, 2023

क्या एक बर्तन लेकर कहीं जाने पर आप को जेल हो सकती हैं ?

April 16, 2021

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.