Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी का न्यू इंडिया : अनपढ़, अधनंगा, नशे में पड़ा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
October 2, 2021
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

मोदी का न्यू इंडिया : अनपढ़, अधनंगा, नशे में पड़ा

ऊपर लगी अखबार की कतरन अगर आपको बेचैन नहीं कर रही है, तो यकीनन आप मूर्ख हैं या आपकी संवेदनशीलता मर चुकी है. पेडिग्री मीडिया ने आज यह खबर दबा दी. कल स्पेशल कोर्ट ने जब रेवेन्यू इंटेलिजेंस निदेशालय (DRI) के अफसरों से गुजरात के मुंद्रा पोर्ट पर उतरे 21000 करोड़ के ड्रग के मामले में डिटेल मांगी, तो जवाब क्या मिला पढ़िए. अडाणी समूह ने DRI के अफसरों से कह दिया कि वे लीगल परामर्श लिए बिना कोई जानकारी नहीं देंगे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

कोर्ट ने पूछा- क्या वे कानून से परे हैं. बस, इसी सवाल पर आकर समूचा सिस्टम प्राइवेट के आगे दंडवत हो जाता है. सड़क से लेकर बिजली, शिक्षा, पानी, स्वास्थ्य- सभी में भागीदार निजी कंपनियां (अडाणी तो लाड़ला है) सरकार को ज़िम्मेदारी और जवाबदेही के मामले में ठेंगा दिखा देती हैं. भारत में इस निजीकरण की शुरुआत 1991 में नरसिंहराव सरकार के समय से हुई, जो अब बेचने के कगार पर आ चुकी है.

भारत में सीमित निजीकरण होना चाहिए था, लेकिन हमारे मूर्ख समाज ने ख़ुद आगे बढ़कर अपने संसाधनों को निजी कंपनियों के हवाले करना शुरू किया. आज नौबत यह है कि देश की लोकतांत्रिक सरकार ही इन कंपनियों से चुनावी चंदा और ऊंची ब्याज़ दरों पर कर्ज़ ले रही है. सरकार अब दीनदयाल है और अडाणी जैसी कंपनियां साहूकार, जो जब चाहे घर में घुसकर सामान तो क्या, बहू-बेटियां भी उठा ले जाये.

यह नरेंद्र मोदी का सिस्टम है और इसी सिस्टम में कार्यपालिका के संचालन का समूचा तंत्र दिन-ब-दिन घुलता जा रहा है. देश का धर्मांध, मूर्ख समाज- जिसे हज़ारों साल से वैचारिक ग़ुलामी पसंद है, चुपचाप तमाशा देख रहा है. आप अडाणी को क्यों कोसते हैं ? आपने ही तो अपने टैक्स के पैसे से खड़ी की गई संपत्तियों को अडाणी के हवाले किये जाने से नहीं रोका. आपने ही तो अपने बच्चों को सरकारी के बजाय शिक्षा माफ़िया के हवाले किया. आपने ही तो सड़क, बिजली, पानी की सुविधा के लिए PPP पर हामी भरी थी, भूल गए ?

आपने यह सब क्यों किया ? क्योंकि इन सुविधाओं की बहाली को लेकर सरकार पर आपका भरोसा नहीं था. आपको लगता था कि प्राइवेट कंपनियां ज़्यादा पैसे लेकर बेहतर सेवा देंगी. क्या ऐसा हुआ ? अगर हुआ भी तो क्या कंपनियों के एकाधिकार ने देश के संविधान को बौना नहीं किया ? क्या आपने बजाय प्राइवेट कंपनियों पर दांव लगाने के सरकार को ज़िम्मेदार और जवाबदेह बनाया ? नहीं, आप सिर्फ वोट डालते गए. सरकार बनवाई, पर अपना हक नहीं मांगा, क्योंकि आप जन्मों से ग़ुलाम हैं.

हम न तो सरकार से लड़ सकते हैं और न इन कंपनियों की मनमानी से क्योंकि हम हर इंसान को जात, मज़हब, नस्ल जैसे मापकों से देखते हैं, इसीलिए हम खुद बंटे हुए हैं. हम एक राष्ट्र की भौगोलिक सीमाओं में कैद होते हुए भी इन दकियानूसी सामाजिक मापकों में बंटे हुए हैं, जो गोरखपुर के व्यापारी की हत्या को हिन्दू-मुस्लिम रंग में देखता है, इंसान के रूप में नहीं.

यहीं आप उस संविधान का मखौल उड़ाते हैं, जो समानता की बात करता है. दरअसल, आपको भेड़ के रूप में हांका जाना ज़्यादा सुहाता है, क्योंकि ये सरल है. एक दिन अडाणी की पुलिस होगी, उसकी अदालत और उसी का संविधान होगा. अग्निपथ फ़िल्म के मांडवा गांव की तरह. वही इस अभागे देश के लिए अच्छे दिन होंगे और आप कहीं अधनंगे, नशे में पड़े होंगे. जब पढ़ेगा ही नहीं, तभी तो विकास करेगा इंडिया. आखिर 3000 किलो ड्रग  आई किसलिए है ?

  • सौमित्र राय

Read Also –

 

[प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे…]

Previous Post

गांधी और शास्त्री : आज दो महान पुण्य आत्माओं का जन्मदिवस है

Next Post

भारत की पत्रकारिता दुनिया भर में रोज़ बदनाम होती है

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

भारत की पत्रकारिता दुनिया भर में रोज़ बदनाम होती है

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

उत्तराखंड : छात्रों ने देश में बढ़ते गैंगरेप और महिला सुरक्षा के मद्देनज़र निकाला प्रतिरोध मार्च

December 4, 2019

बैंकों का निजीकरण यानि भ्रष्टाचार की खूली छूट

February 12, 2019

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.