ओ गाजा के शरारती बच्चों
तुम वही हो न जो मेरी खिड़की के नीचे
शोरगुल से मेरी नाक में दम किये रहते थे
तुम वही हो न जो दौड़भाग और कोलाहल से
हर सुबह को सराबोर कर देते थे
तुम वही हो न जिन्होंने मेरी बालकनी का गुलदान तोड़ा था
और उसका अकेला फूल चुरा लिया था
वापस आ जाओ –
और जितनी मर्जी शोर मचाओ
और सारे गुलदान तोड़ डालो
सारे फूल चुरा लो
वापस आओ,
बस वापस आ जाओ…
- ख़ालिद जुमा
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