स्वन्त्रता दिवस के उत्तर भोर में एक कविता : कुजात
आप हमें झट पहचान लेते हैं अपने ब्रह्म भोज में पूड़ी-बूंदी के इंतज़ार में ज़मीन पर बिछे हम पत्तल हैं...
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Read moreDetailsअंतर्विरोधों से भरा, सच से भागता, साधारण भाषण था प्रधानमंत्री का रविश कुमार विगत वर्षों में प्रधानमंत्री ने इसी लाल...
Read moreDetailsअंग्रेजों के हाथों अपनी जमीर बेच चुके आरएसएस ने देश के साथ गद्दारी करते हुए सैकड़ों क्रांतिकारियों को मौत और...
Read moreDetailsप्रधानमंत्री कार्यालय और सुप्रीम कोर्ट मेरे नाना का है. जो मैं कहूंगा वह वही करेगा. - मनीष मंडल, माफिया सरगना,...
Read moreDetailsनेहरु जी को देख लो मोदीजी, तुम्हारे सारे पाप धुल जाएंगे ! जगदीश्वर चतुर्वेदी लोकतंत्र झूठ के बिना नहीं चलता....
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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