संघियों और उसके गुंडों को एक्सपोज करता ‘लाल सिंह चढ्ढा’ की कामयाबी
संघियों और उसके गुंडों को एक्सपोज करता 'लाल सिंह चढ्ढा' की कामयाबी कहावत है नंगा को नाचना नहीं चाहिए, इससे...
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Read moreDetailsसंघी बौरा गया है. उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा है. उसे जनता से तो कोई मतलब है नहीं. मंहगाई,...
Read moreDetailsहां मुझे चरित्रहीन औरतें पसंद है ... हां मुझे भी चरित्रहीन औरतें पसंद हैं… बेहद… बेहद.. खूबसूरत होतीं है...
Read moreDetailsक्या भारत में लोकतंत्र समाप्त हो चुका है और तानाशाही लागू हो गया है ? रविश कुमार इसमें क्या लगाने...
Read moreDetailsगालियां और कु-संस्कृति : हम बहुत खतरनाक समय में जी रहे हैं जगदीश्वर चतुर्वेदी बेगैरत और बेशर्म बना देती है...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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