करोना काल में प्रवासी मजदूर
हम नहीं चाहते थे मरना डंगर/बाड़ों में तूड़ी के ढेरों में ट्यूबवेल के कोठों में होटलों में /ढाबों में तहखानों...
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Read moreDetailsबनारस, काशी अथवा वाराणसी के दो प्रसिद्ध स्थल इस वर्ष बड़े प्रसिद्ध रहे हैं - एक काशी विश्वनाथ और दूसरी...
Read moreDetails1 भंवर लाल जैन को मुस्लिम समझ कर मध्यप्रदेश के नीमच में मार देना एक तरह से मुनादी करना है...
Read moreDetailsबात इक्कीसवीं सदी की पहली दहाई के शुरूआती दिनों की है जब बर्बरता और पागलपन का एक नया अध्याय शुरू...
Read moreDetailsजगदीश्वर चतुर्वेदी, प्रोफेसर एवं पूर्व अध्यक्ष हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय, कोलकाता गत 28 अप्रैल 2021 को राज्यों के मुख्यमंत्रियों के...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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