मुक्ति का सैलाब
सबसे पहले मैं माफ़ी मांगता हूं हज़रत हौव्वा से मैंने ही अफ़वाह उड़ाई थी कि उसने आदम को बहकाया था...
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Read moreDetailsजैसे लोहे का स्वाद घोड़े से पूछो वैसे ही रोटी का स्वाद भूखे से पूछो छत का स्वाद बेघर से...
Read moreDetailsगिरीश मालवीय लखीमपुर खीरी कांड के चश्मदीद गवाह पर भाजपा से जुड़े नेताओ ने रामपुर में जानलेवा हमला किया है....
Read moreDetailsकहा जाता है लोकतंत्र के चार स्तम्भ होते हैं. कार्यपालिका, व्यवस्थापिका, न्यायपालिका और पत्रकारिता. कार्यपालिका और व्यवस्थापिका तो पहले से...
Read moreDetailsभविष्य महापुराण : पत्नियां कामासक्त हो गई तो कसूर किसका होगा ? यह बार-बार प्रचारित किया जाता है कि मुसलमान...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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