यहां तक आते आते
सदियों बीत गये यहां तक आते आते, हज़ारों वर्ष लाखों दिन अनवरत चलते चलते, क़बीले, गांव और शहर आते आते...
Read moreDetailsसदियों बीत गये यहां तक आते आते, हज़ारों वर्ष लाखों दिन अनवरत चलते चलते, क़बीले, गांव और शहर आते आते...
Read moreDetailsएक बाप था, उसके पांच बेटे थे. वे सुबह-शाम लड़ते रहते थे लेकिन रात होते ही सब साथ मिलकर टीवी...
Read moreDetailsहरिद्वार धर्म संसद में भड़काऊ भाषण देने के बाद जमानत पर चल रहे यति नरसिंहानंद ने एक बार फिर अपनी...
Read moreDetailsभाजपा नफरत फैलाकर देश को टुकड़ों में बांट देगा हिमांशु कुमार आदिवासियों के गोत्र या टोटम होते हैं. अलग-अलग गोत्र...
Read moreDetailsअमेरिकी साम्राज्यवाद के इशारे पर नाचता पश्चिमी मीडिया का मुख्य कार्य प्रोपेगैंडा फैलाना है, जिससे विरोधियों पर हल्लाबोल कर ही...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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