‘सब चाहते हैं कि मैं जनता की बात न करूं’ – रवीश कुमार
रवीश कुमार होली और दीवाली के अगले दिन अख़बार का दफ्तर खुलता है, तब ख़बर की कमी हो जाती है....
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Read moreDetailsक्या भाजपा की जीत में यूपी के लोग मोहरा बन गये ? विष्णु नागर यूपी के गरीब-पिछड़े-दलित वोटर मुगालते में...
Read moreDetailsमैं इस तीसरी दुनिया का हर वह चौथा आदमी हूं जिसके पास किराए का मकान भी नहीं है लेकिन मताधिकार...
Read moreDetailsशहीद स्मृति आयोजन समिति, बांका के तत्वावधान में कटोरिया के बंगालगढ़ में शहीदों की स्मृति में आगामी 26 मार्च को...
Read moreDetails14 मार्च को तीसरे पहर, पौने तीन बजे, संसार के सबसे महान विचारक की चिंतन-क्रिया बन्द हो गयी. उन्हें मुश्किल...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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