धर्म और जाति पर गौरव और नफ़रत की राजनीति की सज़ा सबको मिलेगी
साभार - हेमन्त मालवीय रविश कुमार तीन साल से मोदी सरकार रेलवे की भर्ती परीक्षा नहीं करा सकी है. जनवरी...
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Read moreDetailsलगता है, गणतंत्र ठिठुरते हुए हाथों की तालियों पर टिका है। गणतंत्र को उन्हीं हाथों की ताली मिलती हैं, जिनके...
Read moreDetailsनागों के गणतंत्रीय समाज में जातियां नहीं होती थी, इसलिए उनके समाज में जातिव्यवस्था (कथित वर्णव्यवस्था) भी नहीं थी. साक्यों...
Read moreDetailsरेत में लहराती है समुद्र की अथाह संभावना सूखे भोजपत्र पर क्या लिखूं मौसम के नाम अंधेरे की छाती से...
Read moreDetailsआज लोग रेलमंत्री के रुप में लालू प्रसाद यादव को याद कर रहे हैं. एक झटके में लाखों कुली का...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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