समझाना
मैं समझा नहीं पाया मेरे द्वारा लाये गए क़ानून जनहित में हैं जनता नहीं मानी भड़का दिया विरोधियों ने जनता...
Read moreDetailsमैं समझा नहीं पाया मेरे द्वारा लाये गए क़ानून जनहित में हैं जनता नहीं मानी भड़का दिया विरोधियों ने जनता...
Read moreDetailsउदयपुर में चल रहे फिल्म फेस्टिवल में तामिलनाडू से युवा फिल्मकार दिव्या बोल रही थीं. दिव्या कहती हैं - सिर...
Read moreDetailsआज प्राइमिनिस्टर ने संसद के सेंट्रल हाल में खड़े होकर अपनी काली जुबान से संविधान दिवस के पवित्र मौके को...
Read moreDetailsसमाजवादी काल में सोवियत संघ (रूस) में महिलाओं की स्थिति कैसी थी ? इसका जवाब यहाँ रामवृक्ष बेनिपुरी की पुस्तक...
Read moreDetailsभारतीयों का जीवन दर्शन, जीवन-पद्धति और जीवन दृष्टिकोण विरोधाभासी और अंतर्विरोधी तत्त्वों का एक अजूबा और असंगत सामंजन है, जिसमें...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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