हम तुम्हें अपवित्र कर देंगे
छू लेंगे तुम्हारे कुओं को तुम्हारे नलों को तुम्हारी बाल्टियों को हम छू देंगे, भयहीन और बेपरवाह. चूंकि हमारा सच...
Read moreDetailsछू लेंगे तुम्हारे कुओं को तुम्हारे नलों को तुम्हारी बाल्टियों को हम छू देंगे, भयहीन और बेपरवाह. चूंकि हमारा सच...
Read moreDetailsठाकुर इस बात से नाराज़ है कि दलित आते-जाते उससे 'राम-राम' क्यों नहीं करता ? पंडित इस बात से नाराज़...
Read moreDetailsभाषा जब खत्म होती है सबसे पहले मरने लगती है लोकोक्तियां, मुहावरे अंतिम आहें भरते हैं, फिर उसके शब्दों से,...
Read moreDetailsपीठ में बहुत दर्द था डाॅक्टर ने कहा अब और मत झुकना अब और अधिक झुकने की गुंजाइश नहीं रही...
Read moreDetailsहिटलर का प्रचार मंत्री गोयबल्स का मूल मंत्र था - एक झूठ को सौ बार बोलो, तो लोग उसे सच...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.