प्रेम गीत
इस भीड़ भरी सड़क पर प्रिये कैसे करुं तुम्हारा आलिंगन तुम्हें शिकायत न सही इंतज़ार तो है क्यों सालों बीत...
Read moreDetailsइस भीड़ भरी सड़क पर प्रिये कैसे करुं तुम्हारा आलिंगन तुम्हें शिकायत न सही इंतज़ार तो है क्यों सालों बीत...
Read moreDetailsअभी दिवाली कहां है यारों, अभी दिवाली नहीं है आई. अभी तो देखो यारों कितने घरों का बुझा है चूल्हा...
Read moreDetailsCharles Darwin (1809-1882), British naturalist. Darwin had briefly studied medicine and then trained in the clergy, but his interest was...
Read moreDetailsएक नवंबर के दिन ही 1954 में पांडिचेरी फ्रांस से आज़ाद हुआ था. पांडिचेरी फ्रांस की गुलामी से आज़ाद कैसे...
Read moreDetailsअनीता गौतम मैं उन नमक हरामों से पूछना चाहती हूं जो कावड़ उठा कर पत्थर के लिंग और योनि को...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.