पूरी तरह से कोई नहीं लौटता घर
पूरी तरह से कोई नहीं लौटता घर बदरंग दीवार की एक खुरचन तुम्हारी बिंदिया समेटे आईने की कतरन बर्फ़ की...
Read moreDetailsपूरी तरह से कोई नहीं लौटता घर बदरंग दीवार की एक खुरचन तुम्हारी बिंदिया समेटे आईने की कतरन बर्फ़ की...
Read moreDetailsमैं जानता हूं कि समझौते के बाद काफी किसान पुत्र गुस्से में रहेंगे. मेरा उन्हें एक संदेश है - 'गुस्सा...
Read moreDetailsरविश कुमार जागरण को जलाने वाले अख़बार नहीं, अख़बार न पढ़ने की आग में ख़ुद को जलाएं. किसी भी पाठक...
Read moreDetailsहिमांशु कुमार, गांधीवादी विचारक पहले देश में एक तरह के नक्सली होते थे, अब कई प्रकार के नक्सली यहां-वहां पाये...
Read moreDetailsपिछले 10 महीनों से लगातार चल रहे किसान आन्दोलन देश और समाज को कितना राजनीतिक रूप जागरूक कर पाती है...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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