हमारे अच्छे दिन लाने वालों को अपने बुरे दिनों के बारे में भी अब सोचना आरंभ कर देना चाहिए
विष्णु नागर हमारे अच्छे दिन लाने वाले को अपने बुरे दिनों के बारे में भी अब सोचना आरंभ कर देना...
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Read moreDetailsरविश कुमार आदरणीय वरिष्ठ नागरिक जी, आपके क्या हाल हैं, बैंकों में ब्याज से ख़ूब कमाई हो रही है न...
Read moreDetailsसुब्रतो चटर्जी अपहरण एक मामूली शब्द, जिसकी जड़ें हमारी संस्कृति में गहरी समाई हुई है. गंगा पुत्र से लेकर पृथ्वी...
Read moreDetailsगिरीश मालवीय जर्मनी की कोर्ट में जब आम चुनाव में ईवीएम के इस्तेमाल सम्बन्धी मामले की सुनवाई की गयी...
Read moreDetailsराजीव कुमार मनोचा मेरे पोर्ट पर 2988 किलोग्राम हेरोइन पकड़ी जाती है जो आज तक इस मिक़दार में पकड़ी नहीं...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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