कोरोना का टीकाकरण : बस सोचने बोल रहा हूं
कभी-कभी माथा पकड़ लेता हूं. भाई इस देश में क्या चल रहा है? जनता भी उसी भेड़चाल में बस...
Read moreDetailsकभी-कभी माथा पकड़ लेता हूं. भाई इस देश में क्या चल रहा है? जनता भी उसी भेड़चाल में बस...
Read moreDetailsएक गांव है. उस गांव के एक व्यक्ति के खिलाफ किसी शिकायत पर कुछ सरकारी कर्मचारी उसे तलब करने उसके...
Read moreDetailsरविश कुमार, अन्तराष्ट्रीय पत्रकार यह विश्वविद्यालय आधा से अधिक बंद ही हो चुका है. जब आधा से अधिक बंद होने...
Read moreDetailsश कहते हैं बाल नरेंदर में बचपन से ही विलक्षण प्रतिभा थी. एक बार वे खेलते कूदते तालाब के तरफ...
Read moreDetailsतुम कुछ भी कहो छेदी लाल, तुम्हारे क़िस्से में बहुत छेद है बाढ़ का पानी उतरा तो पता चला क्या...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.