पेगासस और आरएसएस : जासूसों का राष्ट्रवाद
जब संघी आरएसएस (रॉयल सीक्रेट सर्विस) में थे, तब अंग्रेजों की मुखबिरी करते थे और अब संघी आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं...
Read moreDetailsजब संघी आरएसएस (रॉयल सीक्रेट सर्विस) में थे, तब अंग्रेजों की मुखबिरी करते थे और अब संघी आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयं...
Read moreDetails1. नंगापन कहां से लाती हो इतना नंगापन ? ये अधखुली छातियां तीन चौथाई जांघें पतली लेस के उपर नीचे...
Read moreDetailsआठ महीने से लगातार चल रहे किसान आंदोलन समूची दुनिया में अपनी छाप छोड़ रही है. एक ओर भारत सरकार...
Read moreDetailsदेश के बैंकिंग इतिहास में 19 जुलाई का दिन वह ऐतिहासिक दिन है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 14...
Read moreDetailsआज मेरी माहवारी का दूसरा दिन है पैरों में चलने की ताक़त नहीं है, जांघों में जैसे पत्थर की सिल...
Read moreDetails'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.
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