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Home युद्ध विज्ञान

पेजर बना बम ! अमित शाह के धमकी को हल्के में न लें माओवादी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
November 12, 2024
in युद्ध विज्ञान
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पेजर बना बम ! अमित शाह के धमकी को हल्के में न लें माओवादी
पेजर बना बम ! अमित शाह के धमकी को हल्के में न लें माओवादी

युद्ध के दौरान मनुष्य का दिमाग काफी तेज चलता है. इतना तेज चलता है कि विश्वास तक करना मुश्किल हो जाता है कि क्या ऐसा भी हो सकता है. पेजर जैसे छोटे और साधारण सी कम्युनिकेशन यंत्र को बम बना देने की तकनीक ने दुनिया में भूचाल ला दिया है. विज्ञान ने अपने हजारों साल के इतिहास में उतनी तरक्की नहीं की, जितना वह पिछले दो महायुद्ध, शीतयुद्ध और अब यूक्रेन-रसिया, इजरायल-फिलिस्तीन युद्ध के दौरान देखने को मिल रहा है. इसी कड़ी में आज खबर छाई हुई है कि हिज्जबुल्ला लड़कों के कम्युनिकेशन उपकरण अचानक बन बन गये और जानलेवा तरीके से फटने लगे. और हिजबुल्लाह के लड़ाकों को सुपरमार्केट में, सड़क पर, कारों में, घरों में और यहां तक ​​कि नाई की दुकानों में भी उड़ा दिया गया.

ठीक, लेवनान की ही तरह भारत में भी माओवादी क्रांतिकारियों का हथियारबंद समूह है, जिसे खत्म करने के लिए भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक का डेडलाइन दिया है. तो माओवादी क्रांतिकारियों को उनकी धमकी को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि वे भी अपनी जरुरतों की सामग्रियों के लिए बाहरी लोगों पर कंपनियों पर निर्भर करते हैं, ऐसे में अमित शाह के दिमाग में भी यह ख्यालात न हो, संभव नहीं है क्योंकि अक्सर बड़े और महत्वपूर्ण माओवादी इन नये इलेक्ट्रॉनिक सामग्रियों का उपयोग करते हैं.

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‘पेजर बम’ कितना प्रभावी

खबर के अनुसार, लोग बाजार में खड़े थे. ठेले से खरीदारी कर रहे थे. कुछ लोग दुकानों पर सामान खरीद रहे थे, बसों में सफर कर रहे थे, तभी अचानक उनकी जेब में बम फटने लगे. एक के बाद एक हजारों लोगों की जेब में धमाका हुआ, जिसमें 10 से ज्‍यादा लोगों की मौत हो गई. तीन हजार लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं. घटना लेबनान की है, जिसने पूरी दुनिया में दहशत फैला दी है. 3 इंच की एक डिवाइस, ज‍िसे पेजर (Pager Explosion Lebanon) के नाम से जाना जाता है, वह दुनिया के सबसे सुरक्षित कम्युनिकेशन नेटवर्क माना जाता था, जो अचानक बम बन गया.

लेबनान में ह‍िजबुल्‍लाह के लड़ाके अपने साथ‍ियों से कांटैक्‍ट में रहने के ल‍िए मोबाइल फोन की जगह पेजर का इस्‍तेमाल करते हैं. क्‍योंक‍ि इसे हैक नहीं क‍िया जा सकता. सिर्फ मैसेज के जर‍िए बात हो सकती है. पेजर ऐसी डिवाइस है, जो क‍िसी सॉफ्टवेयर से कनेक्‍ट नहीं है. इसे बाहर कहीं से ऑपरेट नहीं क‍िया जा सकता. लेकिन मंगलवार को अचानक इनकी जेब में रखे पेजर, बम गए. उनमें दनादन विस्‍फोट होने लगा. लेबनान की राजधानी बेरूत से लेकर बेका वैली और पड़ोसी देश सीरिया तक से इस तरह के धमाके की खबरें सामने आईं. लेबनान सरकार ने आदेश जारी कर सभी लोगों से तुरंत पेजर फेंकने की अपील की.

पेजर कैसे बना बम ?

ज्ञात हो कि इजरायल सॉफ्टवेयर हैक कर तबाही मचाता रहा है. 1996 में इजरायल की शिन बेट एजेंसी ने हमास के एक बम डेवलपर याह्या अय्याश के फोन में खुफ‍िया तरीके से विस्‍फोटक डाल दिया था और फ‍िर उसे उड़ा द‍िया था. अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा खुफिया विश्लेषक डेविड कैनेडी के अनुसार, इजरायल ने 1996 में हमास नेता याहया अयाश की हत्या के लिए उनके फोन में 15 ग्राम आरडीएक्स विस्फोटक प्लांट किया था. इसके बाद से ही ह‍िजबुल्‍लाह और हमास के लड़ाके पेजर का इस्‍तेमाल करने लगे थे.

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने हिजबुल्लाह के खिलाफ मोसाद के खुफिया ऑपरेशन के तहत इन पेजर में विस्फोटक फिट कराए थे. हिजबुल्लाह ने कुछ समय पहले ताइवान की गोल्ड अपोलो (Gold Apollo)  नाम की एक कंपनी को करीब तीन हजार पेजर का ऑर्डर दिया था. कंपनी ने इन पेजर को इस साल अप्रैल से मई के बीच ताइवान से लेबनान भेजा था, लेकिन दावा किया जा रहा है कि इनके लेबनान पहुंचने से पहले ही इनसे छेड़छाड़ की गई और इनमें विस्फोटक फिट किया गया. क्योंकि इन पेजर के डिलिवर होने का समय अप्रैल से मई के बीच का है और इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच तनाव के बीच इस दौरान तनाव शुरू हो चुका था.

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक,  पेजर का मॉडल नंबर AP924 था और हर पेजर में एक से दो औंस का विस्फोटक बैटरी के बगल में लगा हुआ था. सूत्रों का कहना है कि लेबनान में दोपहर 3:30 बजे इन पेजर्स पर एक मैसेज आया और इसके बाद पेजर में लगा विस्फोटक एक्टिवेट हो गया. बताया गया है कि विस्फोट से पहले इन पेजर में कई सेकेंड तक बीप की आवाज सुनाई दी.

अमेरिका की हथियार बनाने वाली कंपनी लॉकहीड मार्टिन के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर वो होता है जब जंग में इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल का इस्तेमाल होता है. हमला या बचाव किया जाता है. लेबनान में रेडियो वेव से चलने वाले कई पेजर्स में एक साथ विस्फोट हुए. इस बात की संभावना जताई जा रही है कि इजराइल ने अपने दुश्मनों को मारने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियो वेव का इस्तेमाल कर पेजर्स पर एक कोडेड मैसेज भेजा, जिससे ब्लास्ट हुए. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक सेंकेंड वर्ल्ड वॉर के समय से ही दुश्मनों के खात्मे के लिए इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर का तरीका अपनाया जा रहा है.

स्काई न्यूज अरबिया की रिपोर्ट के अनुसार, मोसाद ने हिजबुल्लाह के पेजर के अंदर PETN फिट किया था. यह दरअसल एक तरह का विस्फोटक है, जिसे पेजर की बैटरीज पर लगाया गया था. इन पेजर्स में बैटरी के तापमान को बढ़ाकर विस्फोट किया गया. इस विस्फोटक का वजन 20 ग्राम से भी कम था. हिजबुल्ला के एक अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर ‘एसोसिएटेड प्रेस’ को बताया कि समूह द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ‘हैंडहेल्ड पेजर’ के नये ब्रांड पहले गर्म हुए, फिर उनमें विस्फोट हो गया. इसमें उसके कम से कम दो सदस्यों की मौत हो गई और अन्य घायल हो गए.

कितना खतरनाक है इलेक्ट्रोमैग्नेटिक सिग्नल वारफेयर

युद्धों का इतिहास रहा है कि इसमें हारने वाला पक्ष मिट जाता है. इसलिए कोई भी पक्ष हारना नहीं चाहता. इसलिए युद्धों में धीरे-धीरे धोखा, छल-कपट का समावेश होता जा रहा है. अब तो यह रुप इतना विराट स्वरूप ग्रहण कर लिया है कि अब युद्ध का यही रुप महत्वपूर्ण हो गया है. जैसे-जैसे युद्धों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मौजूदगी बढ़ती गई है, युद्ध का चरित्र भी बदल गया है.

किसी भी युद्ध को समाप्त करने का सबसे आसान तरीका है, नेतृत्व को मार डालना. नेतृत्वकारी निकाय ही वह केन्द्रक होता है, जो किसी भी युद्ध का संचालन करता है, इसलिए हर युद्ध अपने नेतृत्व को बचाने और विरोधी नेतृत्व को खत्म करने पर आधारित है. सेनाएं मारी भी इसीलिए जाती है. युद्धों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की मौजूदगी ने इस युद्ध को और जटिल बना दिया है.

कुछ समय पूर्व ओसामा बिन लादेन को फैक्स मशीन के लोकेशन को ट्रैक कर उसपर मिसाइल फेक कर मारने की कोशिश की गई, लेकिन चूंकि लादेन उस फैक्स लोकेशन से काफी दूर हट गए थे, इसलिए वह तो बच गए लेकिन फैक्स लोकेशन खंडहर में तब्दील हो गया. अभी कुछ महीने पहले रुसी सेना के चालू मोबाइल लोकेशन को ट्रैक कर यूक्रेन ने मिसाइल दाग दिया, जिससे एक ही साथ 400 रुसी फौज कालकलवित हो गए. लेकिन अब पेजर बम ने इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर को और ज्यादा जटिल बना दिया है. इसने बड़े पैमाने पर व्यक्ति केन्द्रित हमलों को बढ़ाया है.

अब देशों के बीच नहीं, जनता और उत्पीड़ित राष्ट्रीयता के साथ युद्ध

अब युद्धों ने एक नया शक्ल ले लिया है. अब देश की सत्ता को पड़ोसी देशों से ज्यादा खुद की जनता से खतरा है. उन असंतुष्ट ताकतों से खतरा होता है जो हथियारबंद होकर सत्ता के विरुद्ध संघर्ष कर रहा है. मसलन, दुनियाभर में जनता का नेतृत्व कर रही कम्युनिस्ट ताकतें, राष्ट्रवादी ताकतें, उत्पीड़ित राष्ट्रीयता अपने-अपने शोषक, शासकों और उत्पीड़क के खिलाफ लड़ रही है. यही कारण है कि आज समूची दुनिया के शासक एक साथ एक मोर्चे पर आ गये हैं और उन तमाम हथियारबंद विद्रोहियों को मिलकर कुचल रही है.

ऐसे में समूची दुनिया के तमाम हथियारबंद विद्रोही भी एक साथ होने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन वह तकनीक के मामलों में भी उसी सत्ता के चाटुकारों पर निर्भर है, जिसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ता है. लेबनान-सीरिया में पेजर बम बलास्ट इसी कड़ी में आता है. जिस कंपनी से हिज्जबुल्ला ने पेजर खरीदा था, उसमें पहले.से ही बम सेट कर दिया गया था, जो इजरायल के महज एक मैसेज से हिज्जबुल्ला को औकात में ला दिया. क्योंकि पेजर तो निश्चित तौर पर हिज्जबुल्ला के महत्वपूर्ण लोगों के ही पास होगा, जिसमें एक ईरान के राजदूत के भी पास था और कुछ सीरिया में भी था.

भारत में माओवादी विद्रोही भी निशाने पर

जैसा कि भारत के गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले माह बयान दिया था कि माओवादियों को मार्च, 2026 तक देश से मिटा देंगे, तो संभव है उनके पास ऐसा कहने का कोई आधार भी मौजूद हो सकता है. उनके इस धमकी को केवल हवाई मान लेना भी सही नहीं होगा क्योंकि हिज्जबुल्ला अगर पेजर जैसा 90 के दशक के संचार उपकरणों को किसी विदेशी कंपनियों से खरीद कर अपने मौत का इंतजाम कर ली है तो भारत के माओवादी क्रांतिकारी भी अपने उपयोग के तमाम सामग्री बाहरी कंपनियों से ही खरीद रही है.

मसलन, जूते, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों (वाकी-टाकी, कम्प्यूटर, लैपटॉप, प्रिंटर, प्रिटिंग सामग्री आदि), जाहिर है यह खरीद भी बड़े पैमाने पर की जाती है. तब अगर खरीद वाली कंपनियों के साथ सांठगांठ कर उसमें पेजर जैसी ही किसी तकनीक का इस्तेमाल कर उन्हें सप्लाई कर दी जाये, तो जाहिर है माओवादियों के अंदर तक बिना एक भी नुकसान उठाए, माओवादियों को ध्वस्त किया जा सकता है. यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि मोदी सरकार इजरायल के साथ अपना संबंध बेहतर किया है. अगर माओवादी किसी कंपनी से समानों का आयात करते हैं या किये हैं तो उन्हें सतर्क रहना चाहिए, उनकी गहन जांच पड़ताल कर लेना चाहिए, वरना कब वह बम का शक्ल अख्तियार कर ले कोई नहीं जानता.

  • महेश सिंह

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