Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

किसानों से विश्वासघात करने के लिए भाजपा को सजा दीजिए -संयुक्त किसान मोर्चा

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 24, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

किसानों से विश्वासघात करने के लिए भाजपा को सजा दीजिए -संयुक्त किसान मोर्चा

कृष्णकांत

हमारे गांवों में अगर आप किसी पड़ोसी से नमक उधार ले लीजिए तो वह वापस नहीं लेता. कहते हैं कि किसी पर नमक का उधार चढ़ाना निकृष्टता है. आपने गौर किया होगा कि गांवों-कस्बों में किराना दुकानें बंद होती हैं तो नमक का बोरा बाहर ही पड़ा रहता है. हमारे समाज में चोर भी इतने नैतिक होते हैं कि वे नमक की चोरी नहीं करते. दुर्भाग्य से हमारे देश के प्रधानमंत्री ने अपने फर्ज को नमक से जोड़कर इस न्यूनतम नैतिकता को तोड़ दिया है. उनका वह फर्ज ऐसा था, जिसे वे निभा भी नहीं सके लेकिन गरीबों पर एहसान लाद रहे हैं.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

भारत जैसे विशाल देश का प्रधानमंत्री इतना नीचे कैसे गिर सकता है कि एक बूढ़ी महिला पर दस रुपये के नमक का एहसान लादे ? एक साधारण गरीब महिला ने कहा कि हम मोदी को वोट देंगे क्योंकि मैंने उनका नमक खाया है. यह उसकी अपनी समझदारी थी लेकिन प्रधानमंत्री की हैसियत से मोदी खुद रैली में इस बात का जिक्र करते हैं. वे जनता को क्या बताना चाहते हैं ?

क्या वे गरीबों को नमक राशन अपनी तनख्वाह से दे रहे हैं ? यह सब उनका कैसे हुआ ? प्रधानमंत्री नमक, तेल, दाल, चावल, गेहूं कहां से लेकर आते हैं ? झूठ के अलावा वे किस चीज का उत्पादन करते हैं ? वे 140 करोड़ भारतवासियों के देश को और इसके संसाधनों को अपना कैसे बता सकते हैं ? अगर इस बात का उन्होंने रैली में जिक्र ​भी किया तो यह कहना था कि इस देश में जो कुछ है, वह मेरा नहीं है, वह सब जनता का है. वे अहंकार में है कि इस देश को अपनी पुश्तैनी जागीर समझने की भूल कर बैठे हैं.

हमारी परंपरा में नमक का हक या कर्ज वफादारी से जोड़कर देखा जाता है। क्या नरेंद्र मोदी अपने को सुल्तान और जनता को गुलाम समझते हैं जो उनकी कृपा पर जीवित है और उनका नमक खा रही है? क्या वे जनता को ये जता रहे हैं कि हम तुमको पाल रहे हैं और तुम सब मेरे प्रति वफादार रहो? क्या वे यह भूल चुके हैं कि इस देश की जनता सल्तनत और राजशाही को कब का दफना चुकी है? इतने बड़े पद पर रहकर 20 सालों में वे लोकतंत्र की न्यूनतम तमीज भी क्यों नहीं सीख सके?

वे सिर्फ नमक की बात नहीं कर रहे हैं. वे कह रहे हैं कि जिन्हें मुफ्त वैक्सीन लगी है वे भाजपा को वोट देंगे. भाजपा को क्यों देंगे ? क्या वैक्सीन भाजपा ने अपने खाते से लगवाई है ? भाजपा ने अडाणी अंबानी और संदिग्ध इलेटोरल बॉन्ड से जो कालाधन बटोरा है, उसमें से वैक्सीन पर कितना खर्च हुआ ? उल्टा पीएम केयर फंड का पैसा प्रधानमंत्री खुद गोल कर गए हैं, जिसका कोई हिसाब नहीं है.

इससे पहले भी महामारियां आईं. इससे पहले भी दर्जनों तरह की वैक्सीन लगीं, लेकिन ऐसी चिरकुट सरकार और ऐसे सस्ते प्रधानमंत्री से पहली बार सामना हुआ है जो अपना फर्ज निभाने के लिए जनता पर एहसान लाद रहा है. एक महामारी आई. सरकार एक साल के मौके के बावजूद लोगों को ऑक्सीजन और दवाएं नहीं दे पाई. वैक्सीन भी बहुसंख्य लोगों ने पैसे देकर लगवाई. गंगा के तट लाशों से भर गए जिन्हें कुत्ते और कौवे नोच रहे थे. इस निकृष्टता और नकारापन को जनता पर ऐसे लादा जा रहा है जेसे कि उनपर बहुत एहसान किया है. जिस जनता को महामारी में न्यूनतम सुविधाएं भी न दे सके, उसी पर एहसान लाद रहे हैं.

देश का प्रधानमंत्री ऐसा व्यक्ति होता है जिससे करोड़ों लोग प्रेरणा ले सकते हैं. यह आदमी हमें क्या प्रेरणा दे सकता है जो एक बूढ़ी महिला पर दस रुपये के नमक का एहसान लाद रहा है ? एक लोकतांत्रिक देश में गरीब जनता का इस तरह राजनीति दोहन ही असली नमकहरामी है.

पश्चिमी यूपी में भाजपा का वोट कोको ले गई थी, बाकी प्रदेश में सांड़ चर गया: संयुक्त किसान मोर्चा

आज इलाहाबाद में संयुक्त किसान मोर्चा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भाजपा को हराने की अपील की. मोर्चा के नेताओं ने कहा कि अगर बुलडोजर बाबा वापस आए तो काले कृषि कानून वापस आ जाएंगे. तीन चरणों में हमारी अपील का असर हुआ है, जनता भाजपा को सजा दे रही है. बचे हुए जिलों के जनता से हमारी अपील है कि बाकी चरणों में भी भाजपा को सजा दें.

सरकार ने लिखित में वादा किया था, जिसके बाद हमने आंदोलन वापस ले लिया था लेकिन सरकार ने धोखा दिया और कोई भी वादा पूरा नहीं किया. न समर्थन मूल्य पर कमेटी बनाई, न किसानों पर दायर मुकदमे वापस हुए, न किसानों को मुआवजा दिया. सभी किसानों के साथ वादाखिलाफी की गई. गृहमंत्री अजय मिश्रा टेनी को बर्खास्त करने का वादा किया था लेकिन उन्हें तो हटाया नहीं, उल्टा उनके अपराधी ​बेटे को जमानत दिला दी. हम मजबूर होकर सुप्रीम कोर्ट गए हैं. हम मजबूर होकर जनता से अपील कर रहे हैं कि भाजपा को हराइए, इस विश्वासघात के लिए भाजपा को सजा दीजिए.

योगेंद्र यादव ने कहा कि बार-बार हिंदू-मुसलमानों को लड़ाने का खेल खेला जा रहा है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह फेल हो चुका है. मोर्चा की तरफ से राकेश टिकैत ने कहा कि चुनाव के बीच भी किसानों को फसल का सही दाम नहीं मिल रहा है. महंगाई आसमान छू रही है. गैस का सिलेंडर हजार रुपये में हो गया, किसी को पता नहीं चला क्योंकि वे जनता को बरगला रहे हैं.

मुजफ्फरनगर में भाजपा ने बहुत हिंदू-मुस्लिम करने की कोशिश की लेकिन फेल हो गई. इनके पास और कोई मुद्दा नहीं है. यूपी के किसानों को हरियाणा से 12 गुना महंगी बिजली मिल रही है. नेता बड़ी-बड़ी रैली कर रहे हैं लेकिन बच्चों के स्कूल नहीं खोल रहे हैं. ये देश को मजदूर और गरीब बनाने की योजना पर काम कर रहे हैं.

इनसे अपनी भाषा में सवाल करो, अपनी समस्या पर सवाल करो. यह सरकार लोगों में दहशत पैदा करने का काम कर रही है. हम यह नहीं ​कह रहे हैं कि किसे वोट दीजिए, हम बस यह कह रहे हैं कि किसानों से विश्वासघात करने के लिए भाजपा को सजा दीजिए.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

हत्या और बलात्कार बीजेपी सरकार की निगाह में जघन्य अपराध नहीं हैं ?

Next Post

मृतकों का चुनावी घोषणा-पत्र

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

मृतकों का चुनावी घोषणा-पत्र

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

इलेक्टोरल बाॅन्ड : राजनीतिक दलों की चुनावी फंडिंग पर पारदर्शिता

November 28, 2019

अकविता

February 15, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.