Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

रूस-यूक्रेन युद्ध : कुछ नोट्स…

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 27, 2022
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
रूस-यूक्रेन युद्ध : कुछ नोट्स...
रूस-यूक्रेन युद्ध

मशहूर फिल्म ‘बैटेलशिप पोतेमकिन’ का एक दृश्य शायद आपको याद हो. सीढ़ियों पर ऊपर से जार की सेना मजदूरों का कत्लेआम करती आगे बढ़ रही है. एक छोटा बच्चा अपने प्राम में सीढ़ियों पर लुढक रहा है क्योकि उसकी माँ को गोली लग गयी है. यह दृश्य ‘ओडेसा’ में फिल्माया गया था, जो इस वक़्त यूक्रेन का महत्वपूर्ण शहर है. इसी शहर पर इस वक़्त रूस की सेना भयानक बमबारी कर रही है.

एक समय था जब यूक्रेन और रूस दोनों के मजदूर साथ मिल कर रूसी जार से लड़ रहे थे. ‘बैटेलशिप पोटेमकिन’ उसी युद्ध का हिस्सा था. 1917 की क्रांति के बाद यूक्रेन, जार्जिया, उज्बेकिस्तान……के मजदूर रूसी मजदूरों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर श्वेत आतंकवाद यानी अमेरिका-ब्रिटेन-फ्रांस-जर्मनी…. की सम्मिलित सेनाओं के खिलाफ लड़ रहे थे.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

उस वक़्त मजदूरों के इंटरनेशनल में जब रूस और जर्मनी के कामरेडों ने एक दूसरे से हाथ मिलाया तो पूरा हाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूँज उठा था. उस वक़्त रूस और जर्मनी के बीच वही सम्बन्ध था, जो आज भारत पाक के बीच ह. यह अंतरराष्ट्रीयतावाद का दौर था.

आज लगभग 100 साल बाद स्थिति एकदम उलट है. यूक्रेन और रूस का मजदूर एक दूसरे पर बन्दूक ताने खड़े हैं. यूक्रेन अमेरिका की गोद में बैठ कर रूस के खिलाफ अमेरिका की रणनीतियों को लागू कर रहा है. पुतिन लेनिन की आलोचना कर रहा है कि लेनिन ने उत्पीड़ित राष्ट्रों को आत्मनिर्णय का अधिकार नहीं दिया होता तो आज वह यानी पुतिन जार का सच्चा उत्तराधिकारी होता. अभी भी पुतिन का सपना रूस को जारशाही में तब्दील करने का ही है.

अमेरिका भूखे भेड़िये की तरह सोवियत रूस से टूटने वाले सभी पूर्वी योरोप के देशों को अपने आगोश में यानी अपने सैन्य संगठन नाटो में लेता जा रहा है, और इस तरह रूस की घेरेबंदी करता जा रहा है. इस वक़्त नाटो की सेनायें एकदम रूस की सीमा पर हैं. रूस की सीमा से लगे 14 में से 5 देश नाटो के सदस्य हो चुके हैं. यूक्रेन भी जल्द ही नाटो का सदस्य बनने वाला है.

रूस चाहता है कि नाटो का सदस्य बनने से पहले यूक्रेन से उन क्षेत्रो को अपने प्रभाव में ले लिया जाय. उन्हें ‘स्वतंत्र’ घोषित करके या अपने मे मिलाकर, जहाँ रूसी जनसँख्या ज्यादा हो, ताकी भविष्य में यूक्रेन के नाटो में जाने पर नाटो और रूस के बीच एक बफर ज़ोन बना रहे. इसी रणनीति के तहत रूस ने 2014 में क्रीमिया को यूक्रेन से अलग करके रूस में मिला लिया था.

अमेरिका इन भूतपूर्व समाजवादी देशों को नाटो में लाने के लिए पिछले दशको में यहाँ ‘ओरेंज क्रांति’ के माध्यम से सत्ता पलट करवा कर रूस समर्थित या तटस्थ सरकारों को उखाड़ कर अमेरिका समर्थित सरकारें बिठा रहा है.

2014 से पहले यूक्रेन में रूस समर्थित सरकार थी. अमेरिका ने अथाह पैसा फेकते हुए और ‘सीआईए’ का इस्तेमाल करते हुए यूक्रेन में रूस समर्थित सरकार का तख्ता पलट करवाया और अपनी कठपुतली सरकार बिठाई. रूस ने इसी की प्रतिक्रिया में यूक्रेन पर हमला कर क्रीमिया को अपने कब्जे में ले लिया. इसे विस्तार में जानना हो तो ‘ओलिवर स्टोन’ की मशहूर डॉक्युमेंट्री ‘यूक्रेन ऑन फायर’ देखी जा सकती है.

ठीक इसी तरह प्रशांत महासागर में अनेक देशों और द्वीपों पर सैनिक अड्डे बनाकर चीन को भी लगातार घेरने की रणनीति पर अमेरिका काम कर रहा है. लगभग 3 लाख अमेरिकी सेना यहाँ तैनात है. अनेक परमाणु बम से लैस मिसाइल चीन की ओर रूख किये हुए है. ‘जान पिल्जर’ ने अपनी फिल्म ‘वार ऑन चाइना’ में इसे विस्तार से दिखाया है.

ठीक इसी तरह रूस को घेरे हुए नाटो की सेनायें अपने परमाणु मिसाइलो को रूस की ओर किये हुए है. ऐसी परिस्थिति में चीन और रूस भी पिछले दो दशको से लगातार अपनी युद्ध क्षमता को बढ़ा रहे है. और दुनिया एक बार फिर से तबाही की ओर बढ़ रही है.

इस पर भारत का स्टैंड क्या है ? भाजपा सरकार जिस तरह से हिन्दू-मुस्लिम राजनीति में मगन है, उससे भारत की विदेश नीति लगभग ख़त्म हो चुकी है. या यो कहें कि भारत की घरेलू नीति ने उसकी विदेश नीति को निगल लिया है. बचा खुचा काम चैनलो के हवाले कर दिया गया है. चैनलो को महज सनसनी और अपने एजेंडे से मतलब है. हां, उन्हें जरूर इस बात का दुःख है कि पुतिन ने भारत से बिना पूछे यूक्रेन पर हमला क्यो किया ?

भावी परमाणु युद्ध पर नज़र रखने वाली संस्था ‘The Doomsday Clock’ का कहना है की हम मध्य रात्रि से महज 100 सेकंड दूर हैं. हम पढ़ते आये हैं कि समय हमेशा आगे जाता है लेकिन आज शायद समय को ‘पीछे’ ले जाने की जरूरत है, उस चौराहे तक पीछे, जहां से हमने गलत रास्ता पकड़ लिया था.

  • मनीष आज़ाद

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

Previous Post

शांति बनाम विद्रोह

Next Post

अंतरिम फैक्ट फाईडिंग रिपोर्ट : किस्कू की फर्जी गिरफ्तारी और पुलिस के मनगढ़ंत कहानी पर कब कार्रवाई करेगी झारखंड सरकार ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

अंतरिम फैक्ट फाईडिंग रिपोर्ट : किस्कू की फर्जी गिरफ्तारी और पुलिस के मनगढ़ंत कहानी पर कब कार्रवाई करेगी झारखंड सरकार ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

महान क्रांतिकारी और समाजवादी जोसेफ स्टालिन

March 5, 2025

एक दंगा : दर्दभरी यादगार

August 18, 2020

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.