Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home कविताएं

उदासी, व्यवस्था और बासी जलेबियां

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
March 11, 2023
in कविताएं
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

अपनी सामाजिक सुरक्षाओं के साथ
वह उदास थे और
व्यवस्था के आसपास
भिनभिना रहे थे
बासी जलेबी पर मक्खियों की तरह,
हालांकि थोड़े शर्मिन्दा भी थे
तहज़ीबयाफ़्ता और हस्सास शहरी होने के नाते.
बहरहाल, कम से कम
नफ़ीस और कलात्मक ढंग से,
और इत्मीनान से,
उदास होने के लिए
उनके पास सामाजिक सुरक्षा तो थी
हालाँकि वह नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, नीदरलैंड्स
या फ्रांस वगैरा मुल्क़ों जितनी नहीं थी
लेकिन बचा-खुचा इन्तज़ाम उन्होंने
ज़ाती तौर पर कर रखा था.
मुल्क के सियासी और समाजी हालात को
वह अपनी उदासी की छवि में
ढालकर देखते थे
और फिर तराशकर कविताओं में रखते थे.
उनकी उदासी की जड़ें उनकी ज़िन्दगी में थीं
मगर कविता में वह कुछ इस शक़्ल में आती थी
कि लोग उसे सामाजिक या राजनीतिक कारणों से
या सांस्कृतिक संकट से पैदा हुई,
या कई बार तो एक ऐतिहासिक उदासी
समझ बैठते थे.
वैसे आम तौर पर वह इंसाफ़, इंसानियत और
प्यार वगैरा के बारे में
बेहद ख़ूबसूरत बातें करते थे
और दिलक़श कविताएँ लिखते थे.
व्यवस्था के बारे में वह
अक्सर कुछ इसतरह सोचते थे
जैसे बोरियत भरे लम्बे सफ़र में
मीठे की तलब महसूस हो बेइख़्तियार
और कहीं छोटे से कस्बे में रुककर
बासी जलेबियां खानी पड़ जाये.
(अब मैं हैरान-ओ-परेशान हूं कि उनकी
बात आते ही ये बासी जलेबियां
दिमाग़ में इस क़दर क्यूं चढ़ गयीं
कि इस कविता में दो बार अपनी हाज़िरी
दर्ज करा गयीं)
बाक़ी फ़ासिज़्म से या नवउदारवाद से
उन्हें कोई ख़ास शिक़ायत हो,
ऐसा लगता तो नहीं था
लेकिन थोड़ी एकेडमिक दिलचस्पी
ज़रूर थी
इतना ज़रूर था कि वह फ़ासिस्टों से
थोड़ा मानवीय और लोकतांत्रिक होने की
और नवउदारवाद से थोड़ा कल्याणकारी होने की
उम्मीद रखते थे.
और हां,
उनको थोड़े अफ़सोस के साथ कभी-कभार
क़रीबी दोस्तों के बीच
यह कहते हुए ज़रूर सुना गया था कि
ये भाजपा वाले इतने जाहिल क्यों होते हैं
और थोड़ी खिन्नता वह इस बात पर भी
जाहिर करते थे कि ये ब्राह्मण, भूमिहार,
ठाकुर वगैरा वक़्त के साथ
उस हद तक माडर्न और समझदार नहीं हुए
जितना हो जाना चाहिए था.
अगर हो गये होते तो आजकल
ब्राह्मणवाद वगैरा की जितनी बातें
होती रहती हैं,
उतनी नहीं होतीं.

  • कात्यायनी

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

You might also like

SEDITIOUS RIVER

कौन है श्रेष्ठ ?

स्वप्न

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

मोदी सरकार ने सबसे ज़्यादा महिलाओं का ख़्याल रखा है !

Next Post

स्वघोषित ईसा मसीह को सूली पर चढऩे कहा गया तो जान बचा थाने में जा छुपा

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

कविताएं

SEDITIOUS RIVER

by ROHIT SHARMA
September 7, 2025
कविताएं

कौन है श्रेष्ठ ?

by ROHIT SHARMA
July 31, 2025
कविताएं

स्वप्न

by ROHIT SHARMA
June 26, 2025
कविताएं

ढक्कन

by ROHIT SHARMA
June 14, 2025
कविताएं

मैं तुम सबको देख रहा हूं –

by ROHIT SHARMA
June 4, 2025
Next Post

स्वघोषित ईसा मसीह को सूली पर चढऩे कहा गया तो जान बचा थाने में जा छुपा

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

भयावह होती बलात्कार की घटना

December 2, 2019

स्वप्न

June 26, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.