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लकड़बग्घा की चीख – ‘सोशल मीडिया बंद करो !’

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
August 9, 2023
in ब्लॉग
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लकड़बग्घा की चीख : सोशल मीडिया से खफा लकड़बग्घा
सोशल मीडिया से खफा लकड़बग्घा

आम लोगों के बीच प्रतिष्ठा अर्जित करने के लिए उनके दिलों पर राज करना जरूरी है. और आम लोगों के दिलों पर राज करने के लिए उसके हित में कार्य करना पहली प्राथमिकता है. यही कारण है कि हर सरकार लोगों के दिलों पर राज करने के लिए तरह तरह के हथकंडे अपनाते हैं. कुछ सरकारें लोगों के हितों में काम करके तो कुछ प्रलोभन देकर. परन्तु बिहार सरकार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, जो एक बेहतरीन लकड़बग्घा है, उनका अंदाज कुछ अलग है.

बिहार का यह लकड़बग्घा बिहार के शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, कृषि, अर्थव्यवस्था का दुर्दशा करने के बाद अब अपने प्रेरणास्रोत संघ के मार्ग पर चल पड़े हैं. लोगों के हितों में कार्य करके अपनी प्रतिष्ठा जब अर्जित नहीं कर पा रहे हैं तब अब में लाठी और पुलिस का भय दिखाकर लोगों के दिल में खौफ भर देना चाहता है, ताकि कोई सवाल नहीं उठा सके.

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नीतीश कुमार ने सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार के ख़िलाफ़ कारवाई की ठानी । अब मंत्री , विधायक , सांसद या अधिकारियों के ख़िलाफ़ आपत्तिजनक या ग़लत टिप्पणी के कारणबिहार पुलिस अब जेल भी भेज सकती हैं ।⁦@ndtvindia⁩ ⁦@Suparna_Singh⁩ ⁦@NitishKumar⁩ ⁦@yadavtejashwi⁩ pic.twitter.com/0XXnSrVlpS

— manish (@manishdekoder) January 22, 2021

लॉकडाऊन जैसी कृत्रिम आपदा के बीच बिहार के लाखों प्रवासी मजदूर ने सोशल मीडिया पर जिस प्रकार नीतीश कुमार के खिलाफ अपना आक्रोश निकाला, उसके भड़के नीतीश कुमार जैसे लकड़बग्घा ने बजाय कुव्यवस्था को दुरुस्त करने के सोशल मीडिया पर सवाल उठाने वाले लोगों पर अब पुलिसिंग करने और जेल भेजने पर अब आमादा हो गया है.

विदित हो कि 2014 के बाद केन्द्र की सत्ता पर काबिज संघ हमेशा चंद पूंजीपतियों के हित में देश की जनता के खिलाफ कार्यरत रही है, जिस कारण समूचे देश और दुनियाभर में इसके खिलाफ जबरदस्त जनाक्रोश उबल पड़ा है. सोशल मीडिया पर बैठाए गये संघी गुंडे तक जनता के आक्रोश के सामने टिक नहीं पा रहे हैं. तब ये हत्यारों और झूठे प्रचार में महारत संघी दमन का रास्ता अपनाया है.

सोशल मीडिया पर लिखने वाले तमाम स्वभिमानी लोगों को एक एक कर उठा कर जेलों में विभिन्न आरोप लगा कर डाला जा रहा है. अब बिहार के लकड़बग्घा नीतीश कुमार भी अपने और उसके कारिंदों के खिलाफ उठते लोगों के आक्रोश का दमन करने के लिए संघी कायदों पर चलने का ऐलान कर दिया है.

यह एक बुनियादी तथ्य है कि विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की जीत झूठ और षड्यंत्रों का मोटा पुलिंदा है. संघी षड्यंत्रों के जाल में उलझे नीतीश कुमार के सामने भी अब झूठ और षड्यंत्रों का ही सहारा बच गया है. यही कारण है कि नीतीश कुमार भी अब सोशल मीडिया के खिलाफ उठ खड़े हुए हैं.

 

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