स्वचालित मशीनें
अब नियंत्रित कर रहीं हैं
पुराने सुअर बाड़े को
वराह श्रेष्ठ की छाया में
नारद के सुस्ताने का समय है
भीखतंत्र को प्रजातंत्र कहने से
मनुष्य की अस्मिता
अक्षुण्ण रहती है
चिड़ी मार
शौर्य रथ पर सवार
निकल पड़ा है द्विगविजय को
उसे आज ही जीतना है वह देश
जहां हर संतान के जन्म पर
आंगन में बजाते हैं तालियां
हिजड़े !
- सुब्रतो चटर्जी
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