Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

हू आर यू राजीव कुमार ??

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
May 27, 2024
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
हू आर यू राजीव कुमार ??
हू आर यू राजीव कुमार ??

भारत का सत्तावान नागरिक होने के नाते हमें राजीव कुमार से पूछना चाहिए. चीफ इलेक्शन कमिश्नर के पद और नरेन्द्र मोदी के द्वारा बिठाये गए इस अनाम ब्यूरोक्रेट से पूछें – ‘तुम कौन हो भाई ??’

आयोग ने वोटिंग के बड़े एहसान से हिंदुस्तान की मजलूम रियाया की मन संतुष्टि के लिए आंकड़े जारी किए हैं क्योंकि इसके पहले वे कह चुके हैं कि वे आंकड़े जारी करने के लिए 17 C को पब्लिक करने के लिए लीगली बाउंडेड नहीं है.

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

साथ में कहा है कि आयोग को बदनाम करने, उस पर सवाल उठाने के प्रयास किये गए, जिस ओर वे ‘एक दिन’ खुलकर बताएंगे. काहे बताएंगे ?? मने तुमको सुनना कौन चाहता है ? नौकरी है, ड्यूटी करो, जाओ. बात खत्म…

संविधान, एक सोशल कॉन्ट्रेक्ट है. एक व्यवस्था बनाई गई है, जिसमें अलग-अलग काम के लिए अलग-अलग लोग हैं. कुछ चुनकर पद पे जाएंगे, कुछ परीक्षा पास करके…

और सभी, भारत के सत्तावान नागरिक के सब्सर्वीएंट रहेंगे. उसके वेतन भत्ते, सत्तावान नागरिक ही देगा, और काम का हिसाब मांगेगा. कुछ अटपटा लगे, तो सवाल भी करेगा. हां कुछ उन्मुक्तियां (प्रोटेक्शन) है कि वे अपना काम दबाव से बचकर कर सकें लेकिन यह सुरक्षा है, मदद है, उनकी पावर नहीं है.

इतिहास में जब चुनाव आयोग की साख पर बट्टा लगाने वाले आयुक्तों का नाम लिया जाए, तो राजीव कुमार उस फेहरिस्त में सबसे ऊपर होंगे. गजब का घमंड !! बेपरवाह, मनमर्जी…और बात बात पर ‘कोर्ट जाओ’ की अनकही धमक ???

सारा देश, जिस प्रक्रिया का आदी रहा है, 70 साल से चुनाव आयुक्त जिन परम्पराओं का, विधाओं का पालन करते रहे हैं, उसको राजीव कुमार नए सिरे से क्यों डिफाइन करेंगे ?? तुम हो कौन ?? और काहे तुम ‘किसी दिन’ बताओगे ??

काम खत्म कर, अपने सेवा शर्तों के मुताबिक वेतन लेना है उन्हें, और फिर चले चले जायेंगे. ऐसा ही चला है, ऐसा ही चलेगा. संवेधानिक निकाय का मतलब, खुदा से ऊपर और पवित्रतम हो जाना नहीं है. किसी सरकारी नौकर का, राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट हो जाना नहीं है.

और राष्ट्रपति और सुप्रीम कोर्ट भी क्यों सवालों से ऊपर हों ? वेतन लेते हैं. मनुष्य हैं, इरर ऑफ जजमेंट हो सकता है. गलतियां तो सबसे होती है. लेकिन हम कैसे जानेंगे कि गलत, गलती से हुआ, या जानबूझकर…बदनीयती से ??

तो जनाब, ऐसे जानेंगे कि त्रुटि हुई, तो सुधार किया. एक्सप्लेन किया, दोबारा और सावधानी का वादा किया और सचमुच वैसा दोबारा हो नहीं.

लेकिन चुनाव आयुक्त धमक दिखा रहे हैं. मैं कानूनी रूप से डेटा जारी करने को बाध्य नहीं, सुना रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट में जाकर कह रहे हैं…याने आपने जानबूझकर नहीं किया ? तो फिर आज आंकड़ा क्यों जारी किया ? किससे इशारा मिल गया ??

क्या, जो किया जाना था, वह जाल ठीक से बिछ गया क्या ?? कर लिए आंकड़े सेट ?? समेट लिया रायता ?? पुराना सूट जलाकर, नहा धोकर, नया सूट पहनकर आ गए दुनिया के सामने ? सवाल जनाब, अब तो आप पे खत्म नहीं होंगे. अपनी नीयत ऑयर कार्यशैली से भरोसा उठवा दिया है.

जनमत कराकर देख लीजिए, देश इन्हें तत्काल सेवा से बर्खास्त करने का सुझाव देगा. वे नोबडी हैं, नॉमिनेशन से एपॉइंटेड है, भरोसा खो चुके हैं. चुनाव आयोग जैसी संस्था में भूमिका के लायक नहीं हैं. शर्म हो, तो उन्हें खुद ही पद छोड़ देना चाहिए.

  • मनीष सिंह

Read Also –

लोकतंत्र का गला घोंटने पर उतारू है चुनाव आयोग
चुनाव आयोग के चुनावी नौटंकी के बाद असली वोटिंग
आरएसएस और चुनाव आयोग का कमीनापन देखिए
भाजपा की दलाली में हास्यास्पद हो गया है चुनाव आयोग
भ्रष्ट भाजपा, चुनाव आयोग की दलाली और संदिग्ध समूची चुनाव प्रणाली
फासिस्ट चुनाव के जरिए आता है, पर उसे युद्ध के जरिये ही खत्म कर सकते हैं
चुनाव के उपरांत की परिस्थिति और हमारे कर्तव्य : सीपीआई (माओवादी)

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
Pratibha Ek Diary G Pay
Pratibha Ek Diary G Pay
Previous Post

पीयूसीएल की प्रेस कॉन्फ्रेंस : चौसा के सैकड़ों किसानों के ऊपर पुलिसिया हिंसा की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच हो !

Next Post

कहां रुकेगा भारत का पीछे खिसकता लोकतंत्र ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

कहां रुकेगा भारत का पीछे खिसकता लोकतंत्र ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

धर्म के उत्थान की बात सिर्फ उल्लू बनाने की राष्ट्रीय परियोजना

November 5, 2021

आदिवासियों की समतावादी जीवन शैली और परंपरा में निकृष्ट ब्राह्मणवाद का घुसपैठ

October 20, 2024

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.