Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

संभल मामले में योगी की नयी टिप्पणी

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
January 13, 2025
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter
संभल मामले में योगी की नयी टिप्पणी
संभल मामले में योगी की नयी टिप्पणी

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाचार चैनल के मंच से कहा है कि – ‘अगर धर्मग्रंथों और पुरातात्विक साक्ष्यों से पता चलता है कि संभल में कल्कि को समर्पित हरिहर मंदिर शाही जामा मस्जिद के निर्माण से पहले मौजूद था, तो मुस्लिम समुदाय को इस मुगलकालीन मस्जिद को सम्मानजनक तरीके से हिंदुओं को सौंप देना चाहिए.’ श्री योगी ने संभल की शाही जामा मस्जिद के संदर्भ में यह भी कहा कि – ‘किसी को ‘किसी भी विवादित ढांचे’ को मस्जिद के रूप में संदर्भित नहीं करना चाहिए.’

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी की ये टिप्पणियां दिसंबर 2024 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पृष्ठभूमि में आई हैं, जिसमें देश की अदालतों को अन्य धार्मिक स्थानों पर दावा करने वाले किसी भी नए मुकदमे को दर्ज नहीं करने का निर्देश दिया गया है. इस बयान से ऐसा लगता है मानो योगी आदित्यनाथ अब अल्पसंख्यकों को सीधे-सीधे चेतावनी दे रहे हैं !

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

हालांकि वे पहले भी उग्र हिंदुत्व के पक्ष में झुके हुए बयान दे चुके हैं और उनके बुलडोजर न्याय को भाजपा में इतना पसंद किया गया कि अनेक राज्यों में उसका अनुसरण किया गया. प्रसंगवश बता दें कि बुलडोजर न्याय पर भी सुप्रीम कोर्ट सख्त टिप्पणी कर चुका है, लेकिन बुलडोजर न्याय के बाद अब श्री योगी संभवत: यह भी तय करने लगे हैं कि मुसलमान किस ढांचे को मस्जिद मानें और किसे नहीं.

मुख्यमंत्री जैसे पद पर बैठे व्यक्ति के लिए इस तरह के बयान देना न केवल संविधान की भावना के विपरीत है, बल्कि पद की गरिमा भी इससे घटती है. क्योंकि वे ऐसा कहकर एक समुदाय विशेष के साथ खड़े हो रहे हैं तथा दूसरे समुदाय के विरूद्ध बयान दे रहे हैं. हालांकि इस बारे में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर निचले क्रम के कार्यकर्ताओं का हाल एक जैसा ही है. प्रधानमंत्री पद हो, मुख्यमंत्री का पद हो या सांसद या विधायक, भाजपा की हिंदूवादी राजनीति, हर ओहदे पर भारी पड़ जाती है.

मुख्यमंत्री योगी ने ‘हर विवादित ढांचे को मस्जिद कहना ठीक नहीं है.’ – जैसा बयान, देश भर में अनेक मंदिरों व मस्जिदों को लेकर हो रहे विवादों के परिप्रेक्ष्य में दिया है, लेकिन इसमें हिन्दू-मुस्लिम दोनों के लिये स्पष्ट संदेश हैं.

आगे वे कहते हैं कि – ‘जिस दिन उन्हें मस्जिद कहना बन्द कर दिया जायेगा, तो लोग उनमें जाना भी छोड़ देंगे.’ उन्होंने अपने बयान को न्यायसंगत बतलाने के लिये दो-तीन तर्क दिये. पहला तो यह कि ‘ऐसे स्थानों पर की जाने वाली इबादत को खुदा भी स्वीकार नहीं करेगा.’ यानी वे कहना चाहते हैं कि किसी भी विवादग्रस्त ढांचे में नमाज़ पढ़ी भी जाये तो उसका कोई उपयोग नहीं है.

आदित्यनाथ ने दूसरी जो बात कही वह अल्पसंख्यकों के मन में और भी खौफ़ पैदा कर सकती है. उन्होंने एक तरह से मस्जिदों की उपयोगिता और अस्तित्व पर ही सवाल खड़ा कर दिये तथा यह भी बताया कि तमाम मस्जिदें निरर्थक हैं तथा ढांचे तो केवल सनातन धर्म यानी हिन्दुओं को ही चाहिये ! उनका आशय यह था कि ढांचे के बिना भी मुसलमान उपासना कर सकते हैं. यानी मुस्लिम कहीं भी नमाज़ पढ़ सकते हैं जबकि हिन्दुओं को कोई स्ट्रक्चर अनिवार्यत: चाहिये ही होता है.

ध्यान से देखें तो यह बयान बहुत ही खतरनाक है तथा एक वर्ग विशेष में ‘उन्माद की नयी लहर’ पैदा कर सकता है. वैसे भी भारतीय जनता पार्टी, उसके सहयोगी संगठनों तथा छिटपुट समूहों द्वारा देश भर में मंदिर-मस्जिद के विवाद खड़े किये जा रहे हैं. आये दिन किसी न किसी शहर की मस्जिद के सामने या भीतर उपद्रव हो रहे हैं या फिर कभी इस मस्जिद की खुदाई की मांग हो रही है तो कभी उस मस्जिद के भीतर हिन्दू देवी-देवता होने के दावे सामने आते हैं. इन सबके कारण अक्सर विवाद हिंसक रूप ले रहे हैं.

योगी के अपने राज्य के संभल में इसी के चलते लगी आग अब तक पूरी तरह से ठंडी नहीं हो पायी है कि राज्य के मुखिया नये सिरे से उसी आग को भड़काने में लगे हैं. अबकी यह आग उनके राज्य में सीमित न रहकर देश भर में फैल सकती है !

मुख्यमंत्री योगी ने 14 जनवरी से शुरू होने वाले महाकुम्भ में मुसलमान दुकानदारों द्वारा दुकानें न लगाने देने की बात को एक तरह से यह कहकर स्वीकार कर लिया कि ‘वहां कुछ लोग कुत्सित मानसिकता के साथ आते हैं. उनके साथ अन्य तरह का व्यवहार हो सकता है. ऐसे लोगों को आना ही क्यों चाहिये ? जिनके मन में भारत व भारतीयता के प्रति आदर है वे ही यहां आएं !’

योगी जिस पद पर बैठे हैं उनका दायित्व सभी को सुरक्षा देना तथा संवैधानिक नियम-कानूनों का पालन करना-कराना है. इसके विपरीत यह बयान एक वर्ग को डराना तथा दूसरे वर्ग (कानून तोड़ने वालों) को भड़काना और उसे अपने संरक्षण की गारंटी देना है.

संभल के बाबत भी उन्होंने दावा किया कि वहां हरि विष्णु मंदिर था जिसे तोड़कर जामा मस्जिद बनाई गई है. ऐसा दावा करते हुए योगी ने कहा कि अकबर द्वारा लिखित आइन-ए-अकबरी (वर्ष 1526) में इस बात का उल्लेख है तथा शास्त्रीय प्रमाण उपलब्ध हैं.

एक मुख्यमंत्री द्वारा निर्णय तक पहुंचना कतई उचित नहीं कहा जा सकता क्योंकि यह मामला न्यायाधीन है. उनके द्वारा ऐसा कहना एक समुदाय को सीधा समर्थन देने जैसा है.

  • सर्वामित्रा सुरजन

Read Also –

साधु-महात्मा योगगुरुओं के रूप में ठगों का भरमार है, जो भारतीय फासीवाद का जबरदस्त समर्थक है
उत्तर प्रदेश की ‘नज़ूल’ ज़मीन से लोगों को उजाड़ने का योगी षड्यंत्र
अपराध खत्म करने के नाम पर जब सरकार ही कराने लगी फर्जी मुठभेड़
मोदी-योगी को जिताइए और नये मंदिर, ऊंची मूर्तियां, झूठ का पिटारा, उच्चस्तरीय मूर्खता का नगाड़ा बजाइये

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate

Previous Post

झारखंड की भूमि और किसान-चेतना

Next Post

औरतें अक्सर झूठ बोलती हैं…

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

औरतें अक्सर झूठ बोलती हैं...

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

निर्लज्ज अपराधियों के सरकार के समर्थन की भारी कीमत चुकानी होगी

May 11, 2021

नस्लीयराष्ट्रवाद : बहुदलीय संविधानवाद से एकदलीय सर्व-सत्तावाद की ओर

May 5, 2018

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.