Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

बैंक घोटालाः मोदी को गिरफ्तार करो ! ‘राईट-टू-रिकॉल’ लागू करो !!

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
February 20, 2018
in ब्लॉग
1
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

नोटबंदी के नाम पर देश की जनता की गाढ़ी कमाई को बैंकों में रखवाकर 10.5 लाख करोड़ रुपए से अधिक का लोन माफ कर कॉरपोरेट घरानों को लूट की मोदी ने खुली छूट दे दी है. इन कर्ज माफी के अतिरिक्त सैकड़ों की तादाद में ऐसे कॉरपोरेट घराने हैं जो देश की बैंकों से कर्ज लेकर देश से भाग चुके हैं अथवा भागने की कतार में हैं. कुछेक के नाम सामने आये है, पर सैकड़ों नाम अभी भी अंधेरे में हैं. कॉरपोरेट घरानों के रोज-रोज देश से हजारों करोड़ लेकर भाग जाने की घटनाएं घटित होने के बावजूद प्रधानमंत्री पद पर विराजमान नरेन्द्र मोदी अपने मुखमंडल पर टेप लगा लिए हैं. खुद को चौकीदार और फकीर कहने वाले नरेन्द्र मोदी देश में आम आदमी के साथ घटित होने वाली किसी भी दुर्घटना पर जबरदस्त तरीके से अपना मूंह सील लेते हैं.

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

यह अनायास नहीं है कि मोदी अचानक नोटबंदी करते हैं और फिर एफ आर डी आई कानून के तहत बैंकों से देश के आम आदमी के पैसों को जब्त करने का कानून बनाते हैं. बड़े पैमाने पर देश के आम आदमी का पैसा विदेश जा रहा है. इसमें हद दर्जे की लापरवाही बरती जाती है, जो केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रत्यक्ष भागीदारी के बगैर संभव ही नहीं है.

इसके लिए मोदी देश के उन तमाम लोगों का हित साधते है, जिससे उन्हें किसी तरह के रुकावटें पैदा होने का आभास होता है. मसलन राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, गवर्नर, जजों, बड़े वकीलों, सांसदों, विधायकों, उच्च पदस्थ अधिकारियों, मीडिया हाऊसें, प्रशासनिक अधिकारियों, चुनाव आयोग आदि को भारी मात्रा में रुपये देकर अथवा भय दिखा कर उसका मूंह बंद कर दिया गया है. उनके वेतनों में भारी वृद्धि की गई है क्योंकि जब देश का आम आदमी मोदी की जनद्रोही नीतियों और कार्यकलापों के खिलाफ सवाल उठायें तो यही लाभार्थी सबसे पहले आगे आकर उनका मूंह बंद कर दें. चाहें कुतर्कों की बौछार हो या जेल और गोली की. मोदी ने देश के आम आदमी के टैक्स के नाम पर जमा किये धनों का खुला दुरुपयोग कर अपनी सुरक्षा में एक मजबूत घेरा बनाने की कोशिश कर रहे हैं ताकि देश की धनों को लूट कर भाग रहे ठगों से अक्रोशित जनता मोदी को कोई नुकसान न पहुंचा सके.

नरेन्द्र मोदी पूरी सजगता और ईमानदारी से देश के लूटेरे कॉरपोरेट घरानों की न केवल हिफाजत ही कर रहे हैं बल्कि उसमें अपना हिस्सा भी बांट रहे हैं. वहीं देश में रोटी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, न्याय जैसी बुनियादी समस्याओं को हल करने के बजाय हिन्दू, मुसलमान, गाय, गोबर, लव जिहाद, श्मशानघाट, कब्रिस्तान, राष्ट्रवाद, देशभक्ति, सेना भक्ति आदि जैसे फर्जी मुद्दों में देश को उलझा कर बड़े पैमाने पर लूट जारी कर दिये. यही कारण है कि इन लूटेरों पर कार्रवाई करने की जगह उसके लूट में सहभागी बने नरेन्द्र मोदी को फौरन गिरफ्तार कर लिया जाना चाहिए.

भ्रष्टाचार और घोटाले के आरोप में जब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री को जेल भेजा जा सकता है, उन्हें फांसी पर लटकाया जा सकता है, ईजराइल के प्रधानमंत्री को भ्रष्टाचार और घोटाले के इन्हीं आरोपों पर जेल जाने की नौबत आ सकती है, तब भारत के सर्वाधिक भ्रष्ट और लाखों करोड़ रूपयों के घोटाले में हिस्सा बांटने, घोटाले करने वाले को देश से बाइज्जत विदेश में भेज देने के मामले में गिरफ्तार क्यों नहीं जा सकता ? क्यों नहीं इन्हें गिरफ्तार कर जेलों में डाला जा सकता है ? ‘विश्व-गुरू’ होने का खोखला सपना बेचने वाले गुलाम मानसिकता के रखवाले पर आखिर कार्रवाई क्योंकर नहीं हो सकती ? सवाल प्रधानमंत्री पद की गरिमा और शाख का है, जिस पर एक भ्रष्ट आदमी को नहीं रखा जा सकता.

इसके अतिरिक्त देश में ‘राइट-टू-रिकॉल’ कानून की आज सबसे बड़ी जरूरत है, वरना यह देश अंग्रेजी हुकूमत की लूट से बड़ी लूट-खसोट का शिकार आगे भी होती रहेगी. अगर यही चलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब देश की आम आबादी बंगाल अकाल (1943-44 में बंगाल – वर्तमान बांग्लादेश, भारत का पश्चिम बंगाल, बिहार और उड़ीसा – में एक भयानक अकाल पड़ा था, जिसमें लगभग 30 लाख लोगों ने भूख से तड़प-तड़प कर अपनी जान जान गंवाई थी), 1943 के बंगाल में कोलकाता की सड़कों पर भूख से हड्डी-हड्डी हुई मांएं सड़कों पर दम तोड़ रही थीं. लोग सड़े खाने के लिए लड़ते दिखते थे तो वहीं ब्रिटिश अधिकारी और मध्यवर्ग भारतीय अपने क्लबों और घरों पर गुलछर्रे उड़ा रहे थे, की ही भांति भयानक दुर्भिक्ष की चपेट में आ जायेगा.

Read Also –

हरिशंकर परसाई की निगाह में भाजपा
लूटेरी काॅरपोरेट घरानों के हित में मोदी की दलाली, चापलूसी की विदेश-नीति
पीएनबी घोटालाः ‘भविष्यद्रष्टा’ मोदी के ‘पकौड़ा रोजगार’ का विस्तारीकरण
पंजाब नेशनल बैंक घोटालाः प्रधानमंत्री पद को कलंकित करते मोदी

Previous Post

पीएनबी घोटालाः ‘भविष्यद्रष्टा’ मोदी के ‘पकौड़ा रोजगार’ का विस्तार

Next Post

दिल्ली सरकार में भाजपा के एजेंट मुख्य सचिव के बबाल के मायने

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

दिल्ली सरकार में भाजपा के एजेंट मुख्य सचिव के बबाल के मायने

Comments 1

  1. S. Chatterjee says:
    8 years ago

    किसी भी सभ्य देश में मोदी को फाँसी होती

    Reply

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

एमएसएस की अपील, प्रतिबंध हटने का जश्न मनाएं ताकि मजदूरों के अधिकारों पर बढ़ते हमले के खिलाफ आवाज बुलंद हो !

March 3, 2022

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

November 11, 2025

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.