Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home गेस्ट ब्लॉग

मोदी-शाह की ‘न्यू इंडिया’ के खिलाफ खड़ी ‘भारतीयता’, उनकी वैचारिकी में अंतिम कील

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 22, 2019
in गेस्ट ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

 

मोदी-शाह की 'न्यू इंडिया' के खिलाफ खड़ी 'भारतीयता', उनकी वैचारिकी में अंतिम कील

You might also like

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

हेमन्त कुमार झा, एसोसिएट प्रोफेसर, पाटलीपुत्र विश्वविद्यालय, पटना

उन्होंने कहा कि देश हित में उन्हें लोगों की नाराजगी झेलनी पड़ रही है. कारपोरेट प्रभुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें उनलोगों का एजेंट कहा जा रहा है, लेकिन देश हित में वे अपना काम करते रहेंगे. देश हित की उनकी अपनी परिभाषा है. वे सत्ता में हैं, प्रचंड बहुमत उनके साथ है तो अपनी परिभाषाओं के अनुसार देश चलाने का उनको अधिकार है. इतिहास उन्हें कैसे परिभाषित करेगा, इसकी कोई चिन्ता नहीं उन्हें. जाहिर है, जो इतिहास रचते हैं वे इसकी चिन्ता करते भी नहीं कि भविष्य में उन्हें कैसे परिभाषित किया जाएगा.

इसमें कोई संदेह नहीं कि इतिहास तो वे रच रहे हैं. वे उन अवधारणाओं को बदलने की कोशिश कर रहे हैं जिनसे भारतीयता परिभाषित होती रही है. कोई उनकी आलोचना करे, करता रहे. लोकतंत्र में आलोचना और विरोध प्रदर्शनों से क्या घबराना ? स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान जिन मूल्यों के आधार पर भावी भारत की कल्पना की गई थी, वे उन पर मिट्टी डाल कर अपनी सोच के अनुसार नए भारत को गढ़ने की कोशिशें कर रहे हैं. सही मायनों में अब वे नेहरू के बरक्स खड़े हैं, भारत को लेकर नेहरू के सपनों को चुनौती देते हुए ही नहीं, उन सपनों में आग भी लगाते हुए.

नेहरू बहुसंख्यकवाद को किसी भी देश और समाज के लिये बेहद घातक मानते थे, जबकि वे बहुसंख्यकवाद की लहरों पर सवार हैं. जिस वैचारिकी ने उन्हें गढ़ा और आगे बढ़ाया, उसमें यह बिल्कुल स्वाभाविक भी है. उनकी स्वाभाविकता इस देश के लिये चुनौती बन गई है लेकिन देशवासियों की इस पीढ़ी के अधिकतर लोग उनमें अपनी कुंठाओं का शमन देखते हैं. अतीत में वोट-बैंक की राजनीति ने बहुत सारे लोगों में जिन कुंठाओं को जन्म दिया, वे और उनकी पार्टी कुशलतापूर्वक उनका दोहन करने में सफल रहे और उनके सत्ता तक पहुंचने में इन कुंठाओं की भी बड़ी भूमिका रही.

कुंठाएं जब विस्फोट के रूप में सामने आती हैं तो उनसे सकारात्मक निष्कर्षों की उम्मीदें करना बेमानी है. जाहिर है, वे इन्हीं नकारात्मकताओं की लहरों के साथ देश को आगे ले जाना चाहते हैं. नियामक संस्थाएं उनके समक्ष नतमस्तक हैं. मीडिया का बड़ा हिस्सा उनका चारण है, जबकि सोशल मीडिया उनका हथियार है. सक्षम प्रतिरोध के अभाव ने उन्हें मनमानी करने की जितनी छूटें दी हैं, उनका परिणाम देश भुगत रहा है और आगे कब तक, किन रूपों में भुगतता रहेगा, नहीं कहा जा सकता.

उन्होंने नोटबन्दी की, इसे देश हित में बताया और बावजूद इसके अनर्थकारी परिणामों के, आज तक उनके लोग इसे देश हित में बड़ा फैसला बता रहे हैं. तर्क की कोई जगह नहीं, साक्ष्यों की कोई वक़त नहीं. वे जो करते हैं उसे देश हित के आवरण में समेट लेते हैं और जाहिर है, उनके किये का विरोध करने वाले लोग देश विरोधी की संज्ञा से नवाजे जाने लगते हैं.

देशभक्ति और देशद्रोह की परिभाषा बिल्कुल स्पष्ट कर दी गई है. उनके किये का समर्थन देशभक्ति, उनका विरोध देशद्रोह. अब, देशद्रोह का दमन तो होना ही चाहिये. तो, दमन की नई इबारतें लिखी जा रही हैं. विश्वविद्यालयों की लाइब्रेरी तक में घुस कर पुलिस का लाठियां चटकाना कौन-सी बड़ी बात है, देश हित में इससे भी कठोर कदम उठाए जा सकते हैं.

देश के हित में उनके विजन का एक नाम है ‘न्यू इंडिया’. यह स्पष्ट होता जा रहा है कि उनके न्यू इंडिया में देश की सामाजिक-सांस्कृतिक-आर्थिक संरचना कैसी होगी. महज साल दो साल में अंबानी और अडाणी जैसे शीर्षस्थ उद्योगपतियों की संपत्ति में दोगुना इज़ाफ़ा आकार ले रहे न्यू इंडिया की एक झलक मात्र है. रिपोर्ट्स बता रहे हैं कि उनके राज में देश में आर्थिक असमानता इतिहास में सबसे तीव्र गति से बढी है, 45 साल में बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर पर है, लोगों की क्रय शक्ति में अपेक्षाओं और दावों के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं हो पा रही, बाजार की रौनक गायब है, लेकिन उनकी प्राथमिकताएं कुछ और हैं.

वोट-बैंक की राजनीति की लानत-मलामत करते वे इसी राजनीति को नए स्तर पर ले जा चुके हैं. ऐसी राजनीति, जिसमें आर्थिक सूचकांकों का कोई महत्व नहीं. महत्व है तो सिर्फ लोगों की भावनाओं के ध्रुवीकरण का, कल्पित अवधारणाओं को जमीन पर उतारने की विध्वंसकारी योजनाओं का. यह राजनीति देश को विवादों और कोलाहलों के एक नए दौर में ले आई है.

कोई आश्चर्य नहीं कि देश विरोधी शक्तियों को साजिशें रचने की नई जमीन मिल रही है. भावनाओं के ध्रुवीकरण की राजनीति के इस साइड इफेक्ट से कोई इन्कार नहीं कर सकता. उन्हें ही इससे निपटना भी होगा. समय बताएगा कि वे कैसे निपटते हैं. उनकी सिफत है कि देश विरोधी साजिशों से निपटने की अपनी नाकामी को भी वे अपने राजनीतिक लाभ के लिये इस्तेमाल कर लेते हैं. पुलवामा की घटना इसका एक उदाहरण मात्र है.

उनकी सत्ता अभी निर्विवाद है. उनका कार्यकाल अभी चार साल से अधिक शेष है लेकिन, भारत को नए तरीके से परिभाषित करने की उनकी कोशिशों के आड़े भारत ही आ रहा है. नागरिकता कानून के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन इसके स्पष्ट संकेत दे रहे हैं कि भारतीयता उनके खिलाफ खड़ी हो रही है.

भारतीयता से संघर्ष में उनका पराभव उनकी वैचारिकी में भी अंतिम कील ठोंक सकता है. विपक्ष में जब राजनीतिक दल नहीं, आम लोग खड़े होने लगें तो कोई भी नेता कितनी देर टिक सकता है ?

Read Also –

NRC : तो हम पाकिस्तान की आत्मघाती राह पर चल पड़े हैं ?
हिटलर की जर्मनी और नागरिकता संशोधन बिल
‘एनआरसी हमारी बहुत बड़ी गलती है’
NRC में कैसे करेंगे अपनी नागरिकता साबित ?
NRC : नोटबंदी से भी कई गुना बडी तबाही वाला फैसला

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे…]

Previous Post

NRC : तो हम पाकिस्तान की आत्मघाती राह पर चल पड़े हैं ?

Next Post

आखिर क्यों और किसे आ पड़ी जरूरत NRC- CAA की ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

by ROHIT SHARMA
March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

by ROHIT SHARMA
February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

by ROHIT SHARMA
February 24, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमारी पार्टी अपने संघर्ष के 53वें वर्ष में फासीवाद के खिलाफ अपना संघर्ष दृढ़तापूर्वक जारी रखेगी’ – टीकेपी-एमएल की केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो के एक सदस्य के साथ साक्षात्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
Next Post

आखिर क्यों और किसे आ पड़ी जरूरत NRC- CAA की ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

बिगड़ते आर्थिक हालात, FRDI बिल की धमक और खतरे में जमाकर्ताओं की जमा पूंजी

March 8, 2020

नए जनवाद का लक्ष्य है – मलाई खाओ, मजे में रहो !

March 1, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.