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युवा पीढ़ी को मानसिक गुलाम बनाने की संघी मोदी की साजिश बनाम अरविन्द केजरीवाल की उच्चस्तरीय शिक्षा नीति

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
September 30, 2019
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युवा पीढ़ी को मानसिक गुलाम बनाने की संघी मोदी की साजिश बनाम अरविन्द केजरीवाल की उच्चस्तरीय शिक्षा नीति

मोदी की नई शिक्षा नीति बनाम अरविन्द केजरीवाल की शिक्षा नीति

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भारत में एक साथ दो शिक्षा नीति लागू है. एक आम आदमी पार्टी की सरकार की शिक्षा नीति है, जिसके प्रणेता दिल्ली सरकार के शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया है, जो मैग्सेसे अवार्ड से सम्मानित और उच्च शिक्षा प्राप्त मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से समर्थित है तो वहीं दूसरी शिक्षा नीति दिल्ली की केन्द्र सरकार की है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संघी नेतृत्व में चलाया जाना है, जिसका ड्राफ्टिंग किया गया है. विदित हो कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्कूली शिक्षा भी हासिल नहीं कर सके हैं, इसके बावजूद फर्जीवाड़ा से एक फर्जी विषय से फर्जी डिग्री हासिल किये है. इतना ही नहीं उनके इतिहास और विज्ञान की इतनी कम या फर्जी जानकारी है, जिसका प्रदर्शन वह अक्सर बिना किसी लज्जा के हर जगह प्रदर्शित करते रहते हैं.

आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार ने देश की राजधानी दिल्ली में शिक्षा की तस्वीर ही बदल दी है, जिसकी मिसाल न केवल देश के अंदर बल्कि दुनिया भर में कायम हुई है. दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल का कहना है, हर किसी को मुफ्त और अच्छी शिक्षा पाने का अधिकार है, और हम हर किसी को यह शिक्षा उपलब्ध करायेंगे. इसके लिए वह एक ओर जहां उच्चस्तरीय विद्यालय परिसर का निर्माण किया है, तो वहीं दूसरी ओर शिक्षकों के स्तर को ऊंचा उठाने के लिए देश-विदेशों में प्रशिक्षण का व्यवस्था किये कर कर रहे हैं. वहीं भाजपा समर्थित केन्द्र की मोदी सरकार का ऐलान है कि सबको शिक्षा नहीं दिया जायेगा. जिसे पढना हो, शिक्षा खरीदे. इसके साथ ही वह तमाम विद्यालय, विश्वविद्यालयों को एक एक कर ध्वस्त करते जा रहे हैं, उसके शिक्षकों को हटा रहे हैं या खाली पदों को समाप्त किया जा रहा है ताकि आम आदमी शिक्षा हासिल न कर सके.

दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अप्रत्याशित और सुखद ऐलान करते हुए 3 लाख 134 हजार सीबीएसई के बच्चों का फीस अपने कोष से भरने का घोषणा किया है.

दिल्ली के सरकारी स्कूलों में 10वी और 12वी में पढ़ने वाले हर वर्ग के 3.14 लाख बच्चों की CBSE परीक्षा की महंगी फीस अब सरकार देगी

पैसों के अभाव में किसी भी बच्चे की पढ़ाई हम नहीं रुकने देंगे

दिल्ली के हर बच्चे की पढ़ाई मेरी जिम्मेदारी है।

— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) September 18, 2019

आइये, अब हम फर्जी डिग्री हासिल करने वाले अनपढ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा 1 जून, 2019 को जारी राष्ट्रीय शिक्षा नीति का मसौदा ( DNEP – DRAFT NATIONAL EDUCATION POLICY 2019) पर नजर डालते हैं कि किस तरह इस फर्जी डिग्रीधारी ने देश की शिक्षा व्यवस्था को बर्बाद करने पर उतारू हो चुकी है ताकि देश की युवा पीढ़ी को मानसिक गुलाम बनाये रखा जा सके. शिक्षा विरोधी इस मोदी सरकार के नई शिक्षा नीति का विरोध करके अगर लागू होने से नहीं रोका गया तो आने वाली पीढियां अक्ल की अंधी, मानसिक गुलाम और जिंदा लाशें बन के पैदा होंगी, जो सिर्फ नफरत के ज़हर से भरे समाज का ही निर्माण करेंगी !

मोदी के इस नई शिक्षा नीति में मन-लुभावने शब्दों का उपयोग करके अपने घिनौने इरादों को छुपाने की कोशिश की गयी है. लेकिन कोई भी तार्किक इन्सान इसको एक बार पढने से ‘भेड़ की खाल में छुपे भेडिये’ को बहुत आसानी से पहचान सकता है. 484 पेज वाले इस मसौदे में शिक्षा नीति को ‘INDIA CENTERED’ बनाने को कहा गया है, जिसका सिर्फ इतना ही मतलब है कि ‘INDIA’ की आड़ में अपनी गैर-तार्किक, मानवविरोधी और लुटेरे पूंजीपतियों की सेवापरस्त विचारधारा को भारत पर थोपना ताकि इसकी आड़ में पूंजीवाद और साम्राज्यवाद की लूट को आसान बना सकें ! इस मसौदे में दिए गये कुछ ख़ास सुझाव इस तरह हैं, जिसे पंजाब में DNEP की मानव-विद्रोही नीतियों के खिलाफ हुई एक कन्वेंशन में बताया और शहीद-ए-आज़म भगतसिंह क्रांतिकारी एसोसिएशन (SABKA),
पंजाब के द्वारा प्रस्तुत किया गया है :

1. किसी एक क्षेत्र के कक्षा 1 से 8 तक के सारे स्कूलों को इकट्ठा करके स्कूल कम्प्लेक्स (SCHOOL COMPLEX) बनाया जायेगा, जिसको चलाने के लिए कम्प्लेक्स खुद अपने फंड का जुगाड़ करेगा. इसमें पढ़ाने के लिए कुछ ‘परोपकारी शिक्षकों’ और संस्थाओं (जैसे कुछ मेधावी छात्र जो स्कूल में रहते हुए या छोड़ने के बाद अपने जूनियर विद्यार्थियो को पढ़ा सकते हैं, या समाज में कुछ ऐसे नौजवान जो परोपकार करना चाहते हों या फिर जैसे गुरुकुल, मदरसा, आरएसएस के शिशु मंदिर, एकल विद्यालय की तर्ज पर) को आगे आना होगा, जिनके वेतन के बारे में कुछ भी मसौदे में नहीं कहा गया है. इसके अलावा कक्षा 9 से 12 के लिए सिर्फ एक सेकेंंडरी स्कूल होगा. कहने का मतलब ये है कि शिक्षा को दूर-दराज के और आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की पहुंंच से इतना दूर कर दिया जायेगा कि वे तंग आकर पढना ही छोड़ दें !

2. 2020 तक NATIONAL CURRICULUM FRAMEWORK तैयार कर लिया जायेगा और सारे उच्च शिक्षण संस्थानों (HEI-Higher Education Institution) को तीन भागों में बांंट दिया जायेगा

(i) शोध संस्थान (RESEARCH UNIVERSITIES)
(ii) अध्यापन विश्वविद्यालय (TEACHING UNIVERSITIES)
(iii) डिग्री देने वाले कालेज (AUTONOMOUS COLLEGES)

ये सारे संस्थान अब गैर-जनवादी तरीके से चुने गये BOARD of GOVERNERS की दया पर पलेंगे. और ये BOARD of GOVERNERS ही हर कालेज या संस्थान के भाग्यविधाता होंगे. इस BOARD of GOVERNERS में सिर्फ बुद्धिजीवी लोग ही नहीं होंगे बल्कि समाज के कुछ ‘रुतबा प्राप्त’ राजनीतिक लोग भी हो सकते हैं. मतलब कालेज में किसी भी शिक्षक की नियुक्ति से लेकर, उसकी प्रोमोशन और सेवा शर्तों तक ये सब BOARD of GOVERNERS ही तय करेंगे. मतलब शिक्षक पूरी तरह से गुलाम बना दिया जायेगा.

यही नहीं, एक ही संस्थान के अलग-अलग विभागों के अलग-अलग शिक्षकों का अलग-अलग वेतन भी हो सकता है. बात सिर्फ इतनी ही नहीं है बल्कि संस्थान के पाठ्यकर्म का सिलेबस, संस्थान में चलाये जाने वाले कोर्स और फंडिंग सब इन BOARD of GOVERNERS के हाथ में होगा. मतलब अगर BOARD of GOVERNERS में बीजेपी की विचारधारा के लोग होंगे तो वे मनुवादी सिलेबस लागू करवाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे और पूरी युवा पीढ़ी को अंधभक्त और गैर-तार्किक बनाने में अपना दिन-रात एक कर देंगे. और इस तरह विद्यार्थियों को गुलाम बनाने की प्रक्रिया पूरी होगी.

सारे संस्थान ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग’ (RSA) की देख-रेख में होंगे, जो सीधा प्रधानमंत्री के हाथों में होगा. मतलब अगर प्रधानमंत्री मोदी (या आरएसएस का कोई एजेंट) हुए तो पूरी शिक्षा व्यवस्था को धकियानुसी मनुवादी और पूंजीतियों की सेवा में लगा दिया जायेगा, जो देश के लिए बहुत ही घातक होगा.

यहांं तक कि UGC और NAAC (NATIONAL ASSESMENT & ACCREDITATION COUNCIL) को भी RSA के अधीन कर दिया जायेगा. NAAC के RSA के अधीन आने का सीधा ये मतलब है कि सिर्फ उसी कालेज को सबसे अच्छा ग्रेड दिया जायेगा, जो सबसे ज्यादा विध्वंसक फासीवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने में सबसे आगे होगा.

3. मसौदे में सरकार ने शिक्षण संस्थानों को वितीय रूप से मदद करने से पूरी तरह हाथ खींच लिया है. मतलब शिक्षा क्षेत्र में सारा पैसा संस्थानों को खुद जुगाड़ करने के तरह तरह के रास्ते बताये हैं, जैसे कोई स्वयंसेवी संस्था (NGO आदि), जिससे साफ़ साफ़ झलकता है कि शिक्षा-क्षेत्र में देश के बड़े-बड़े लुटेरे पूंजीपतियों को इस मैदान में खुली छूट दे कर मेहनतकश जनता को लूटने के सारे रास्ते खोलना. शिक्षा के इस बाजारीकरण से आर्थिक और समाजिक रूप से कमजोर लोगों के लिए शिक्षा सिर्फ एक ख्वाब बनकर रह जाएगी.

4. विद्यार्थियों को यूनियन बनाने से दूर करने के लिए संस्थानों में सिर्फ शिकायत-निवारण केंद्र का सुझाव दिया गया है, जिससे साफ़ झलकता है कि सत्ता का इरादा उनका (शिक्षकों और विद्यार्थियों) जनवादी तरीके से विरोध करने के अधिकार भी पूरी तरह छीन लिया जाये और उनको BOARD of GOVERNERS के रहमो-करम पे छोड़ दिया जाये.

शिक्षा और शिक्षकों को भी भारतीय परंपरा और मूल्यों से लैस करने के पीछे की साजिश ये है कि रूढ़ीवादी गैर-तार्किक मनुवादी विचारधारा को जनता के तन मन में बसाना.

5. सारे कालेजों को 2032 तक उस यूनिवर्सिटी में विलय होना होगा या यूनिवर्सिटी बनना होगा जिसका भाग्यविधाता BOARD OF GOVERNERS होगा. मतलब संस्थानों के शिक्षकों की अपनी पहचान ख़तम कर दी जाएगी और सब कुछ BOARD OF GOVERNERS के इशारों पे होगा. इसका ये भी मतलब बनता है कि कालेज में शिक्षकों की यूनियन का कोई वजूद नहीं रह जायेगा.

6. मसौदे में कहीं भी शिक्षक भर्ती या विद्यार्थियों के दाखिले में आरक्षण का जिक्र नहीं किया गया है बल्कि ये तक कहा गया है कि उच्च-शिक्षण संस्थानों में आरक्षण देना जरूरी नहीं है. इस सबका ये मतलब बनता है कि सरकार का आरक्षण ख़तम करने का प्लान है.

7. मसौदे में दलितों, लड़कियों, आर्थिक रूप से पिछड़ों, अल्पमतों, शारीरिक-अक्षमों सहित सभी को पूरी तरह हाशिये पे रखा गया है और शिक्षा को उनकी पहुंंच से दूर करने की पूरी साजिश रची गयी है.

8. मसौदे में ये भी सुझाव दिया गया है कि किसी ख़ास समुदाय के लोगों को उसी के समुदाय के लोग ही अच्छी तरह से पढ़ा सकते हैं ( जैसे दलित को दलित अच्छे से पढ़ा सकता है, मुस्लिम को मुस्लिम अच्छे से पढ़ा सकता है, हिन्दू को हिन्दू अच्छे से पढ़ा सकता है आदि). इसके पीछे की नीति के पीछे साफ़ तौर से झलक रहा है कि किस तरह देश को साम्प्रदिय्कता की आग में झोंकने की और बांटने की तैयारी चल रही है.

9. कक्षा 6 से 8 में संस्कृत भाषा को अनिवार्य भाषा (INDIRECTLY) बनाने के फायदे गिनाना ये दिखाता है कि सनातनी परम्परा (यानी मनुस्मृति) लोगों के रोम-रोम में बस जाये और धीरे-धीरे इसी के रास्ते रूढ़ीवादी, गैर तार्किक मनुवाद के लिए रास्ता साफ़ किया जाये.

10. मसौदे में सालाना पेपर लेने की प्रक्रिया को रट्टू सिस्टम बताया गया है और सुझाव दिया गया है कि स्कूलों द्वारा NTA (NATIONAL TESTING AGENCY) स्कोर का प्रयोग किया जाये और सालाना पेपर लेने बंद किये जाएंं. विद्यार्थियों को दिए जाने वाले वजीफे में भी NTA मेरिट का उपयोग किया जाये लेकिन सिर्फ कुल विद्यार्थियों में सिर्फ 50% प्रतिशत विद्यार्थियों को ही वजीफा दिया जायेगा. मतलब वजीफा लेने वाले कुल विद्यार्थियों में से 50% प्रतिशत विद्यार्थियों के वजीफे को एक ही झटके में ख़तम कर दिया जायेगा. स्कूलों के सालाना पेपर की जगह छोटे-छोटे ONLINE QUIZ TEST लेने का प्रावधान भी दिया गया है.

11. स्कूली बच्चों को एक्स्ट्रा वर्कशीट दी जाएगी, जिसे बच्चे और उसके माता-पिता मिल के हल करेंगे ताकि माता-पिता भी स्कूलों से जुडें. मतलब सिर्फ मध्यमवर्ग को ध्यान में रख के नीति निर्माण हो रहा है. उन बच्चों के माता-पिता का क्या जो दिन में 12 से 14 घंटे तक सिर्फ दो वक्त की रोटी के लिए काम करते हैं या जो अनपढ़ हैं ?

कुल मिला के ये डूबता हुआ पूँजीवाद अपनी मुनाफे की हवस को मिटाने के लिए अपनी सेवक बीजेपी द्वारा यहाँ एक ओर इस शिक्षा निति में निजीकरण, बाजारीकरण को बढ़ावा देने की साजिश रच रहा है तो दूसरी तरफ भारतीय परम्परा और मूल्यों , संस्कृति के नाम पे युवा पीढ़ी को एक गैर तार्किक , रूडिवादी, मानव-द्रोही मनुवादी विचारधारा के अन्धकार में धकेलने का षड़यंत्र रच रहा है जिसमें नौजवानों-विदियार्थियों-शिक्षकों के हाथ में नकली-राष्ट्रवाद का झुनझुना थमा दिया जायेगा ! इसलिए हम सारे नौजवानों-विदियार्थियों और प्रगतिशील लोगों का आह्वान करते हैं कि आओ हम सब मिल के इस DNEP-2019 (राष्ट्रीर शिक्षा निति का मसौदा -2019) के साथ साथ इस फासीवादी – तानाशाही को भी उखाड़ फेंके.

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Comments 1

  1. Arvind kumar says:
    6 years ago

    Ye sarkar mazdooro aur inke aane wale bhabisya ko gulam banana chahati hai,pahale ke leader ne apna khoon baha kar mazdooro ko punjipatiyo ki gulami se aajadi dilaye the,ab ke netao me dum nahi hai ki jo satta me sarkar hai oosase ladne ka,arvind kejariwal ji delhi ki janta ka bikas imandari se kar rahe hai,kejariwal ji ke pass itna fund aata kaha se hai jo janta ka bikas kar rahe hai,aur sab rajya ke pass fund hi nahi hota hai garib janta ki sahayata karne ke liye,litrate aur ilitrate me yahi antar hai ,delhi me thekedari samapt ki ja rahi hai aur ye sarkar pure desh me sarkari companiyo ko punjipatiyo ko bech rahi hai mazdooro ko gulam banane ke liye

    Reply

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