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‘मनुस्मृति’ जैसी मानवद्रोही ग्रंथ की आलोचना पर BHU के 13 छात्र गिरफ्तार, अविलम्ब बिना शर्त रिहा करने की मांग

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 28, 2024
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'मनुस्मृति' जैसी मानवद्रोही ग्रंथ की आलोचना पर BHU के 13 छात्र गिरफ्तार, अविलम्ब बिना शर्त रिहा करने की मांग
‘मनुस्मृति’ जैसी मानवद्रोही ग्रंथ की आलोचना पर BHU के 13 छात्र गिरफ्तार, अविलम्ब बिना शर्त रिहा करने की मांग

बात पुरानी है. उस वक्त मैं छात्र था और तब अटल बिहारी वाजपेयी भारत के प्रधानमंत्री हुआ करते थे. एक छात्र संगठन के छात्र नेताओं के कहने पर मैं भी उनके साथ पटना विश्वविद्यालय के एक कॉलेज कैम्पस में छात्रों से सम्पर्क करने गया था. कॉलेज कैम्पस में उन्होंने नारा लगाया – ‘इंकलाब’, हमने भी जोरदार जवाब दिया – ‘जिंदाबाद !’ दो तीन बार नारा लगाया ही था कि तुरंत ही लंपट जैसे लगने वाले आठ दस लोगों ने हमें घेर लिया और गुस्से में बोलने लगा कि हमने ‘इंकलाब-जिन्दाबाद’ का नारा क्यों लगाया ? हमलोग कौन हैं ?

हमारे नेता ने उसके आपत्ति का जोरदार जवाब दिया और कहा कि हम भगत सिंह के विरासत को मानते हैं. और भगत सिंह ने यह नारा अंग्रेजी हुकूमत की गुलामी के दौर में अंग्रेजी अदालत में लगाया था. फिर आपको दिक्कत क्या है ? लेकिन वे पढ़े लिखे लंपट इस बात को मानने के लिए तैयार नहीं था और वह बार बार कह रहा था कि आपका इंकलाब से मतलब क्या है ? क्या आप देश में क्रांति करना चाहते हैं ?? खैर, जल्दी ही हमलोगों ने उसके विरोध को हवा में उड़ा दिया और आगे बढ़ चले.

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लेकिन अब जब केन्द्र में अटल बिहारी वाजपेयी की उत्तराधिकारी नरेन्द्र मोदी की सरकार है और वह वाजपेयी की अपेक्षाकृत कम कट्टरपंथी सरकार की तुलना में ज्यादा ही क्रूर और सामंती मिजाज है, जब भगत सिंह को ही ‘बहुरूपिया’ और ‘आरामतलबी’ बताने की कोशिश की जा रही है, तब भगत सिंह के नाम पर बने छात्र संगठन के द्वारा ‘मनुस्मृति’ जैसी मानव विरोधी धार्मिक ‘संविधान’ पर परिचर्चा आयोजित करना किसी अपराध से कम कैसे हो सकता है ?

हम बात कर रहे हैं बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की, जहां भगत सिंह के नाम पर बने एक छात्र संगठन ‘भगत सिंह छात्र मोर्चा’ द्वारा जब मनुस्मृति जैसी मानवद्रोही धार्मिक ग्रंथ पर परिचर्चा आयोजित की गई तब मोदी-योगी जैसे कट्टरपंथियों की पुलिस को यह नागवार गुजरा और परिचर्चा में रहे 13 छात्रों को मोदी की महत्वाकांक्षी हिन्दुत्ववादी कानून ‘भारतीय दण्ड संहिता’ की गंभीर धाराओं में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है.

ज्ञात हो कि 25 दिसम्बर, 1927 को डॉ. अम्बेडकर ने मनुस्मृति को जलाया था. उस वक्त भारत गुलाम था और अंग्रेजों ने इसके लिए उन पर कोई मुकदमा दर्ज नहीं किया था. मजे की बात यह है कि महाड़ सत्याग्रह के दौरान मनुस्मति जलाने का प्रस्ताव गंगाधर नीलकांत ने किया था, जो खुद ब्राह्मण थे. मनुस्मृति जलाने के 97 वर्ष पूरे होने के अवसर पर 25 दिसम्बर को एक बार फिर से देश भर में मनुस्मृति जलाया गया, जिसमें एक जगह बीएचयू भी है.

लेकिन अब ‘आजाद’ भारत में मनुस्मति पर परिचर्चा रखने और फिर उसे प्रतीकात्मक रूप से जलाने के प्रयास में ही सत्ता हिलने लगी और गंभीर धाराओं में गिरफ्तार करने के लिए अपने भारे के कारिंदों को भेज दिया. तुर्रा यह कि इन छात्रों पर लगाये गए कई धाराओं में एक धारा 121(2) भी है, जिसमें 10 साल की सजा का प्रावधान है. कुल 10 छात्रों सहित तीन छात्राओं को गिरफ्तार करके जेल भेजा दिया है.

भगत सिंह छात्र मोर्चा के गिरफ्तार छात्रों में शामिल हैं –

  1. मुकेश कुमार, S/O रामपाल, बीए आनर्स कला संकाय, थाना लंका, वाराणसी उम्र 19 वर्ष.
  2. संदीप जायसवार, S/O अमरजीत जायसवार, बीए आनर्स, सा.वि. संकाय, थाना लंका, वाराणसी उम्र 27 वर्ष.
  3. अमर शर्मा, S/O अखिलेश शर्मा, बीए आनर्स सा.वि. संकाय, थाना लंका, वाराणसी उम्र 20 वर्ष.
  4. अरविन्द पाल, S/O राजनाथ पाल, एमए हिन्दी, थाना लंका, वाराणसी, उम्र 25 वर्ष.
  5. अनुपम कुमार, S/O अखिलेश्वर प्रसाद सिंह, शोध दर्शन शास्त्र, थाना लंका, वाराणसी, उम्र 29 वर्ष.
  6. लक्ष्मण कुमार, S/O कप्पिल रे, बीए आनर्स कला संकाय, थाना लंका, वाराणसी, उम्र 21 वर्ष.
  7. अविनाश S/O उमेश कुमार सिंह, छात्र बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी, उम्र 24 वर्ष.
  8. अरविन्द S/O सुरेश, छात्र बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी उम्र 23 वर्ष.
  9. शुभम कुमार S/O भोला पासवान, छात्र बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी, उम्र 21 वर्ष.
  10. आदर्श, S/O अवधेश कुमार, छात्र बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी, उम्र 22 वर्ष.
  11. इप्सिता अग्रवाल, D/O चन्देल प्रकाश, Msc मनोविज्ञान, बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी.
  12. सिद्दी तिवारी, D/O राजेश तिवारी, MA समाजशास्त्र B.K.M, बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी.
  13. कात्यायनी बी. रेड्डी D/O वेंकटेश रेड्डी, बीए आनर्स कला संकाय, बीएचयू, थाना लंका, वाराणसी.

सवाल है आखिर मनुस्मृति दहन/परिचर्चा से केन्द्र की मोदी सरकार और उत्तर प्रदेश की रामा राज्य वाली योगी सरकार घबराई हुई क्यों है ? जवाब है क्योंकि मोदी और योगी सरकार देश के संविधान को नहीं मानती और वह इस संविधान को हटाकर ‘मनुस्मृति’ जैसी मानवद्रोही ग्रंथ को संविधान की जगह स्थापित करना चाहती है. मनुस्मृति आधारित देश बनाना चाहती है, जहां ब्राह्मण सर्वोपरि होता है और शुद्रों को शिक्षा से दूर रखकर उसे दास बना कर रखा जाता है.

बहरहाल, 13 छात्रों की इस अवैध गिरफ्तारी के खिलाफ समूचा देश उबल पड़ा है. गत 27 दिसम्बर को ‘राज्य दमन के विरुद्ध अभियान आयोजन टीम’ ने इस गिरफ्तारी की तीखी निंदा करते हुए सभी छात्रों को अविलम्ब रिहा करने का मांग किया है. इस संगठन में शामिल घटक संगठन है –

एआईआरएसओ, एआईएसए, एआईएसएफ, एपीसीआर, एएसए, बापसा, बीबीएयू, बीएएसएफ, बीएसएम, भीम आर्मी, बीएससीईएम, सीईएम, कलेक्टिव, सीआरपीपी, सीएसएम सीटीएफ, डीआईएसएससी, डीएसयू, डीटीएफ, फोरम अगेंस्ट रिप्रेशन तेलंगाना, बिरादरी, आईएपीएल, इनोसेंस नेटवर्क , कर्नाटक जनशक्ति, एलएए, मजदूर अधिकार संगठन, मजदूर पत्रिका, , एनएपीएम, नज़रिया, निशांत नाट्य मंच, नौरोज़, एनटीयूआई, पीपुल्स वॉच, रिहाई मंच, समाजवादी जनपरिषद, समाजवादी लोक मंच, बहुजन समाजवादी मंच, एसएफआई, यूनाइटेड पीस एलायंस, डब्ल्यूएसएस, वाई4एस

इन संगठनों की ओर से जारी प्रेस वक्तव्य में साफ कहा गया है कि छात्रों को डराना-धमकाना बंद करें !! संगठन ने राज्य दमन के खिलाफ अभियान, बीएचयू परिसर में मनुस्मृति पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए छात्र कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के साथ-साथ शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि 26 दिसंबर 2024 को, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय स्थित भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीएसएम) के 13 सदस्यों को गैर-जमानती धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज करने के बाद गिरफ्तार किया गया और 14 दिनों के लिए न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

25 दिसंबर को बीएचयू के कला संकाय में मनुस्मृति दिवस पर परिचर्चा का आयोजन किया गया. यह ऐतिहासिक दिन इस मायने में महत्वपूर्ण है कि बाबा साहब अंबेडकर ने इसी दिन 1927 में मनुस्मृति का दहन किया था. भगत सिंह छात्र मोर्चा (बीएसएम) के साथी इस विषय पर चर्चा करने के लिए एकत्र हुए थे. चर्चा के दौरान शाम करीब साढ़े सात बजे बीएचयू प्रॉक्टोरियल बोर्ड के गार्ड आए और छात्रों से अभद्रता करने लगे और उन्हें खींचकर प्रॉक्टोरियल बोर्ड कार्यालय में बंद कर दिया.

इस हमले के दौरान छात्र घायल हो गए, उनके कपड़े फट गए और उनके चश्मे भी टूट गए हैं. हिरासत में लिए गए साथियों की मदद के लिए प्रॉक्टोरियल बोर्ड पर इकट्ठा हुए सभी छात्रों के साथ बदसलूकी और पिटाई के बाद उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया. इसके बाद छात्रों को बीएचयू गार्ड और वाराणसी पुलिस दोनों ने कई तरह से धमकाया, जिसमें उनका भविष्य बर्बाद करने की धमकी भी शामिल थी. फिर पुलिस ने 3 लड़कियों समेत सभी छात्रों को मारपीट कर और जबरन पुलिस वैन में लाद कर ले गई.

गिरफ्तार किए गए सभी 13 छात्रों को रात भर लंका थाने में बंद रखा गया. उन्हें अपने वकील से भी नहीं मिलने दिया गया. जब छात्रों ने अपने वकील से मिलने की जिद की तो लंका थाने के SHO शिवाकांत मिश्रा ने कानूनी प्रक्रिया को खारिज कर दिया और कहा, ‘यह मेरा पुलिस स्टेशन है और मेरी इच्छा के अनुसार चीजें होंगी, आप अदालत में अपनी वकालत का काम कर सकते हैं.’

थाने में सभी कार्यकर्ताओं के फोन जब्त कर लिए गए और उन्हें अपने घर पर सूचना तक नहीं देने दी गई. यह सुप्रीम कोर्ट और मानवाधिकार आयोग की गाइडलाइन का खुला उल्लंघन है. आगे आज 26 तारीख को रिमांड कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया. एफआईआर में बेहद गंभीर धाराएं जोड़ी गई हैं, जिसमें –

  1. भारतीय दंड संहिता (बीएनएस) की धारा 132 – सरकारी कर्मचारी या लोक सेवक पर हमला. गैर जमानती;
  2. धारा 121 (2) सरकारी कर्मचारी को गंभीर चोट पहुंचाने पर एक से दस साल तक की कैद और जुर्माना.
  3. धारा 196 (1) (बी) शांति भंग करना और समुदायों के बीच सद्भाव को नुकसान पहुंचाना.
  4. धारा 299 बीएनएस – धर्म या उससे जुड़ी चीजों का अपमान, तीन साल तक की कैद, जुर्माना;
  5. धारा 110 बीएनएस- गैर इरादतन हत्या करने का प्रयास,
  6. धारा 191 (1) बीएनएस- दंगा, 5 साल तक की सज़ा,
  7. धारा 115 (2) बीएनएस- जानबूझकर चोट पहुंचाना

यह कार्रवाई ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी ताकतों के इशारे पर की गयी है. बीएचयू प्रशासन और पुलिस प्रशासन के दमनकारी रवैये से साफ पता चलता है कि इसके पीछे खुलेआम बीजेपी-आरएसएस का हाथ है. लोकतांत्रिक होने का दंभ भरने वाले भारतीय राज्य की हालत ऐसी है कि मनुस्मृति पर चर्चा करने पर आपको जेल जाना पड़ सकता है. ज्ञात हो कि मनुस्मृति वह पाठ है जो महिलाओं, शूद्रों और दलितों को एक जानवर से भी बदतर दर्जा देता है, जो देश के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के खिलाफ है.

संगठन दावा करते हैं कि राज्य दमन द्वारा लोकतांत्रिक समाज के लिए लोगों के आंदोलन को तोड़ने का ब्राह्मणवादी हिंदुत्ववादी ताकतों का भ्रम, उत्पीड़ित और शोषित लोगों की व्यापक एकता से टुकड़े-टुकड़े हो जाएगा. दरअसल, उनका भ्रम टूट चुका है क्योंकि 13 छात्र कार्यकर्ताओं ने जेल जाते समय अविचल भाव से ‘मनुस्मृति मुर्दाबाद’ और ‘इंकलाब जिंदाबाद’ जैसे नारे लगाए.

‘राज्य दमन के विरुद्ध अभियान आयोजन टीम’ अपने प्रेस वक्तव्य में मांग करते हैं कि सभी कार्यकर्ताओं को तुरंत रिहा किया जाए और फर्जी एफआईआर रद्द की जाए. छात्रों के साथ मारपीट और छात्राओं के साथ मारपीट करने वाले पुलिस और बीएचयू गार्ड के खिलाफ तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए. इसके साथ ही ‘राज्य दमन के विरुद्ध अभियान आयोजन टीम’ ने सभी लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों से छात्रों और अन्य संघर्षरत वर्गों पर लोकतांत्रिक दावे पर ब्राह्मणवादी हिंदुत्व फासीवादी राज्य के दमन का विरोध करने के लिए हाथ मिलाने का भी आग्रह करते हैं.

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