Friday, April 24, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home लघुकथा

मनमोहन सिंह को दो गज जमीन न देने वाला मोदी किस नस्ल का है !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
December 28, 2024
in लघुकथा
0
3.3k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

एक बादशाह के दरबार में एक अजनबी नौकरी की तलब के लिए हाज़िर हुआ. क़ाबलियत पूछी गई तो कहा, ‘सियासी हूं.’ (अरबी में सियासी अक्ल ओ तदब्बुर से मसला हल करने वाले मामला फ़हम को कहते हैं). बादशाह के पास सियासतदानों की भरमार थी, उसे खास घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज बना लिया.

चंद दिनों बाद बादशाह ने उस से अपने सब से महंगे और अज़ीज़ घोड़े के मुताल्लिक़ पूछा तो उसने कहा कि ‘घोड़ा नस्ली नही है !’

You might also like

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

एन्काउंटर

बादशाह को ताज्जुब हुआ. उसने जंगल से साईस को बुला कर दरियाफ्त किया. उसने बताया, ‘घोड़ा नस्ली है लेकिन इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है.’

बादशाह ने अपने मसूल को बुलाया और पूछा, ‘तुम को कैसे पता चला के घोड़ा असील नहीं है.’ उसने कहा, ‘जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके जबकि नस्ली घोड़ा घास मुंह में लेकर सर उठा लेता है.’

बादशाह उसकी फरासत से बहुत मुतास्सिर हुआ. उसने मसूल के घर अनाज, घी, भुने दुंबे, और परिंदों का आला गोश्त बतौर इनाम भिजवाया और उसे मलिका के महल में तैनात कर दिया.

चंद दिनो बाद बादशाह ने उससे बेगम के बारे में राय मांगी.

उसने कहा, ‘तौर तरीके तो मलिका जैसे हैं लेकिन शहज़ादी नहीं है.’

बादशाह के पैरों तले जमीन निकल गई. हवास दुरुस्त हुए तो अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया.

सास ने कहा, ‘हक़ीक़त ये है के तुम्हारे बाप ने मेरे खाविंद से हमारी बेटी की पैदायश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी. लिहाज़ा हमने तुम्हारी बादशाहत से करीबी ताल्लुक़ात क़ायम करने के लिए किसी और कि बच्ची को अपनी बेटी बना लिया था !’

बादशाह ने अपने मुसाहिब से पूछा, ‘तुम को कैसे इल्म हुआ ?’

उसने कहा, ‘उसका खादिमों के साथ सुलूक जाहिलों से बदतर है.’

बादशाह फिर उसकी फरासत से खुश हुआ और बहुत से अनाज भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं, साथ ही उसे अपने दरबार मे मुतय्यन कर दिया.

कुछ वक्त गुज़रा मुसाहिब को बुलाया अपने बारे में दरियाफ्त किया. तब मुसाहिब ने कहा ‘जान की अमान’ बादशाह ने वादा किया. उसने कहा, ‘न तो तुम बादशाहज़ादे हो, न तुम्हारा चलन बादशाहों वाला है.’

बादशाह को ताव आया, मगर जान की अमान दे चुका था, सीधा अपनी वालिदा के महल पहुंचा. वालिदा ने कहा, ‘ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो. हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हें लेकर हमने पाला.’

बादशाह ने मुसाहिब को बुलाया और पूछा, ‘बता, तुझे कैसे इल्म हुआ ????’

मुसाहिब ने कहा, ‘बादशाह जब किसी को इनाम ओ इकराम दिया करते हैं तो हीरे मोती जवाहरात की शक्ल में देते हैं लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें इनायत करते हैं. ये असलूब बादशाहज़ादे का नहीं किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है.’

अब जब पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन हो गया है और नरेन्द्र मोदी उनको दो गज जमीन भी देने के लिए तैयार नहीं है, अभी अगर वह सियासी होते तब वह मोदी की इन हरकतों पर उन्हें किस नस्ल का बताते ? आदतें नस्लों का पता देती हैं…

  • एक अरबी कहानी से

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें ]

scan bar code to donate
scan bar code to donate
G-pay
Previous Post

लोकतंत्र के नाम पर संविधान खत्म कर मनुस्मृति लागू की जा रही है

Next Post

‘मनुस्मृति’ जैसी मानवद्रोही ग्रंथ की आलोचना पर BHU के 13 छात्र गिरफ्तार, अविलम्ब बिना शर्त रिहा करने की मांग

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

लघुकथा

कथाकार व उपन्यासकार कैलाश वनवासी का समकालीन कथा साहित्य में एक जरूरी हस्तक्षेप

by ROHIT SHARMA
March 17, 2026
लघुकथा

UPSC में 301वां रैंक को लेकर जब आकांक्षा सिंह के सपने में आया ब्रह्मेश्वर सिंह

by ROHIT SHARMA
March 11, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

by ROHIT SHARMA
February 14, 2026
लघुकथा

मैं रहूं न रहूं, पर लड़ाई ज़िंदा रहेगी : एक अपरिचय से परिचय तक की दहला देने वाली मुलाक़ात

by ROHIT SHARMA
February 7, 2026
Next Post

'मनुस्मृति' जैसी मानवद्रोही ग्रंथ की आलोचना पर BHU के 13 छात्र गिरफ्तार, अविलम्ब बिना शर्त रिहा करने की मांग

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

नेपाली घृणा की शिकार घृणास्पद भारतीय गिद्ध मीडिया और भारत सरकार

July 13, 2020

लुगदी साहित्य का अपने दौर में सबसे ज़्यादा बिकने वाला नाम – गुलशन नंदा

November 20, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026
गेस्ट ब्लॉग

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

दस्तावेज़ :  ईरान की तुदेह पार्टी का संक्षिप्त इतिहास

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

अगर अमेरिका ‘कब्ज़ा’ करने के मक़सद से ईरान में उतरता है, तो यह अमेरिका के लिए एस्केलेशन ट्रैप साबित होगा

March 28, 2026
गेस्ट ब्लॉग

ईरान की तुदेह पार्टी की केंद्रीय समिति की बैठक का प्रस्ताव

March 28, 2026
कविताएं

विदेशी हरामज़ादों का देसी इलाज !

March 22, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

दिल्ली में FACAM के द्वारा आयोजित कार्यक्रम के नेतृत्वकर्ताओं पर दिल्ली पुलिस के आक्रामकता के खिलाफ बयान

April 16, 2026

व्लादिमीर लेनिन का लियोन ट्रॉट्स्की के बारे में क्या मत था !

March 28, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.