Saturday, March 7, 2026
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय
No Result
View All Result
Pratibha Ek Diary
No Result
View All Result
Home ब्लॉग

किसी भी सम्मान से बेशकीमती है माओवादी होना

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 4, 2022
in ब्लॉग
0
585
SHARES
3.2k
VIEWS
Share on FacebookShare on Twitter

भारत सरकार माओवाद को देश का सबसे बड़ा खतरा बताती है और उसकी पुलिसिया महकमा माओवादियों को खोज-खोजकर छल कपटकर आये दिन हत्या कर रही है, जेलों में डालकर सड़ा रही है, पुलिस थानों में औरतों के साथ बलात्कार करती है, नृशंस तरीकों से टार्चर करती है. एक आंकड़ें के अनुसार अबतक के 50 सालों में इस पुलिसिया महकमा ने कई लाख माओवादियों और उकसे समर्थकों की हत्या कर चुकी है. इसकी तरह माओवादियों ने भी कई हजार पुलिसिया महकमा के कारिंदों की हत्या कर चुका है. इस वीभत्स हिंसक गतिविधियां यह बताने के लिए पर्याप्त है कि माओवादी और इन पुलिसिया महकमा के बीच सीधा संघर्ष है. एक दूसरे का शत्रु है.

हां, यहां यह जानना समीचीन होगा कि पुलिसिया महकमा अपने जिन कॉरपोरेट घरानों के हितों की हिफाजत में जिन माओवादियों पर क्रूरतम जुल्म ढ़ाता है, उनके शरीर में बिजली का करंट लगाता है, हाथों-पैरों की ऊंगलियों काट देता है, शरीर में सुई चुभोता है, जिन्दा आग में भूनता है, दर्जनों गरीब लोगों की हत्याएं कर शैम्पेन उड़ाते हुए जश्न मनाता है. वहीं माओवादी जब पुलिसिया महकमा के कारिंदों की हत्या करता है तब वह सीधा हत्या करता है, उसे यातना नहीं देता. यहां तक कि उसे थप्पर मारना तो दूर गाली-गलौज तक नहीं करता है, जश्न मनाना तो दूर की कौड़ी है. तब यह सवाल उठ खड़ा होता है कि आखिर ये माओवादी हैं कौन ? और ये पुलिसिया गुंडा उनकी नृशंस हत्यायें क्यों करता है ?

You might also like

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

कौन हैं ये माओवादी ?

माओवादियों को जानने का सबसे बेहतरीन तरीका है कि हम चीन को जाने क्योंकि आधुनिक चीन का निर्माता माओ त्से-तुंग हैं, जिनके सिद्धांतों पर चलकर चीन आज दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बन गया है.

करोड़ों चीनी जब असहाय, बदहवास, गरीबी, पीड़ा, बेकारी जैसी अर्द्ध सामंती देश में रहकर जापानी साम्राज्यवादियों समेत अनेकों साम्राज्यवादियों के खूनी पंजों में दम तोड़ रहा था, तभी माओ त्से-तुंग की अगुवाई में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी ने चीनी जनता को गोलबंद कर न केवल तमाम साम्राज्यवादियों को ही देश से बाहर निकाल फेंका, बल्कि देश के तमाम शोषकों को भी खत्म कर आधुनिक चीन का निर्माण किया.

आधुनिक चीन के निर्माता माओ त्से-तुंग ने चीन के निर्माण के लिए जिस सिद्धांत की स्थापना की, वह सिद्धांत दुनियाभर की मेहनतकश जनता के बीच लोकप्रिय हुई, और माओवाद कहलाया. और जहां कहीं की जनता ने अपने शोषण-जुल्म के खिलाफ माओ के सिद्धांत को अपना आधार बनाया, उन्हें माओवादी कहा गया.

भारत में रह रही यही जनता जो अपने शोषकों के जुल्मोसितम से मुक्ति के लिए माओ के सिद्धांत को आधार बनाकर लड़ाई लड़ रही है, वह माओवादी कहलाये – यानी भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी).

कौन है ये पुलिसिया महकमा ?

ये देश के सामंतों, जमींदारों, धन्नासेठों, कॉरपोरेट घराने के पालतू कारिंदें हैं, जो आम मेहनतकश जनता का धन-दौलत, मेहनत को लूटकर उन शोषकों तक पहुंचाने के तरीकों का रक्षा करता है. ये महकमा कहलाने के लिए तो देश के संविधान के तहत आता है जो देश के गरीबों, असहायों के हितों की रक्षा करता है, परन्तु इसका असली काम देश के गरीबों, असहायों को लूटना, उसकी हत्या करना और उसकी औरतों का अस्मत लूटना है.

चूंकि यह महकमा अमीरों, धन्नासेठों और कॉरपोरेट घरानोंके हितों की रक्षा के लिए है, इसलिए समाज का अमीर तबका भी इसको पैसों से खरीद कर अपना हित साध लेता है और गरीबों, असहायों को लुटने में इस्तेमाल कर लेता है. संक्षेप में कहा जाये तो यह भाड़े का टट्टू है, जिसे मनचाहे पैसों पर खरीद कर अपना हित साधा जाता है और अपने विरोधियों को ठिकाने लगाया जाता है.

पुलिसिया महकमा पर इसका ही एक संस्था, जो न्यायपालिका के तौर पर जाना जाता है, कहता है कि पुलिस संगठित गुंडों का हथियारबंद गिरोह है. तो वहीं इसी की दूसरी संस्था सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य जज एन. वी. रमन्ना का कहना है कि पुलिस का भ्रष्टाचार के कारण इसकी छवि प्रभावित हुई है और लोग पुलिस के पास जाने से कतराने लगे हैं. लोग निराशा के समय पुलिस से संपर्क करने से हिचकिचाते हैं. भ्रष्टाचार, पुलिस ज्यादतियों, निष्पक्षता की कमी और राजनीतिक वर्ग के साथ घनिष्ठता के आरोपों से पुलिस संस्था की छवि खेदजनक रूप से धूमिल होती है.

यहीं कारण है कि लोगों ने पुलिसिया जुल्म के खिलाफ हथियार उठा लियें हैं. उसकी हत्या करने लगे हैं और सबसे सुखद पक्ष तो यह है कि पुलिस की हत्या होने के बाद लोगों में खुशी की लहर छा जाती है. और लोग भगवान से प्रार्थना करते हैं कि और ज्यादा पुलिस की हत्या हो. चूंकि पुलिस और उसकी सरकार पुलिस की हत्या करने वाले को माओवादी कहती है, तो कई लोगों ने माओवादियों को ही अपना भगवान मान लिया है और उनका सम्मान करने लगे हैं.

[ प्रतिभा एक डायरी स्वतंत्र ब्लाॅग है. इसे नियमित पढ़ने के लिए सब्सक्राईब करें. प्रकाशित ब्लाॅग पर आपकी प्रतिक्रिया अपेक्षित है. प्रतिभा एक डायरी से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर हैण्डल पर फॉलो करे… एवं ‘मोबाईल एप ‘डाऊनलोड करें]

Previous Post

अमेरिकी साम्राज्यवाद के आर्थिक प्रतिबंध के विरोध में रुस का वित्तीय ‘परमाणु बम’ से हमला

Next Post

रिज़र्व बैंक की स्वायत्ता को कैसे खोखला किया गया ?

ROHIT SHARMA

ROHIT SHARMA

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Related Posts

ब्लॉग

तुर्की के इस्तांबुल में भारतीय दूतावास के सामने विरोध प्रदर्शन: ‘ऑपरेशन कगार बंद करो’ और ‘नरसंहार बंद करो’ की मांग को लेकर नारे और रैलियां

by ROHIT SHARMA
December 22, 2025
ब्लॉग

नेपाल : ‘सभी वामपंथी, प्रगतिशील, देशभक्त और लोकतांत्रिक छात्र, आइए एकजुट हों !’, अखिल नेपाल राष्ट्रीय स्वतंत्र छात्र संघ (क्रांतिकारी)

by ROHIT SHARMA
November 25, 2025
ब्लॉग

सीपीआई माओवादी के नेता हिडमा समेत दर्जनों नेताओं और कार्यकर्ताओं की फर्जी मुठभेड़ के नाम पर हत्या के खिलाफ विरोध सभा

by ROHIT SHARMA
November 20, 2025
ब्लॉग

‘राजनीतिक रूप से पतित देशद्रोही सोनू और सतीश को हमारी पार्टी की लाइन की आलोचना करने का कोई अधिकार नहीं है’ : सीपीआई-माओवादी

by ROHIT SHARMA
November 11, 2025
ब्लॉग

आख़िर स्तालिन के अपराध क्या था ?

by ROHIT SHARMA
November 6, 2025
Next Post

रिज़र्व बैंक की स्वायत्ता को कैसे खोखला किया गया ?

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Recommended

21 सितंबर को रूस के महाप्रलयकारी हमले के कयास और पुतिन की अविचलित रणनीति

September 21, 2023

न्यायाधीश लूटेरों के प्रति जिम्मेदार हैं…

November 17, 2023

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Don't miss it

गेस्ट ब्लॉग

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026
गेस्ट ब्लॉग

पाउलो फ्रेरे : ‘कोई भी शिक्षा तटस्थ नहीं होती, लोगों को बदलने के लिए तैयार करता है अथवा सत्ता की रक्षा करता है.’

February 27, 2026
गेस्ट ब्लॉग

‘हमें नक्सलबाड़ी के रास्ते पर दृढ़ता से कायम रहना चाहिए’ – के. मुरली

February 24, 2026
लघुकथा

एन्काउंटर

February 14, 2026
लघुकथा

धिक्कार

February 14, 2026

About Pratibha Ek Diary

'प्रतिभा एक डायरी' दुनिया के किसी भी हिस्से में उत्पीड़ित, शोषित जनता द्वारा शोषण उत्पीड़न के खिलाफ, साम्राज्यवादी लूट के खिलाफ, जाति, धर्म, नस्ल, क्षेत्र, लिंग के आधार पर हो रहे जुल्म के खिलाफ बुलंद किए गए आवाज का पक्षधर है. इस वेबसाइट पर प्रकाशित किसी भी रचना को जनहित में किसी भी भाषा में, अंशतः या पूर्णत: प्रकाशित किया जा सकता है. अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं है.

Categories

  • Subroto's Corner
  • Uncategorized
  • आभा का पन्ना
  • कविताएं
  • गेस्ट ब्लॉग
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा

Recent News

टीकेपी-एमएल का बयान : ‘भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के नेतृत्व में लड़ रही पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की 25वीं स्थापना वर्षगांठ को लाल सलाम !’

March 1, 2026

‘संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा और वेस्ट बैंक में जातीय सफाए की संभावना’ – जीन शाउल (WSWS)

March 1, 2026

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.

No Result
View All Result
  • ब्लॉग
  • गेस्ट ब्लॉग
  • युद्ध विज्ञान
  • लघुकथा
  • पुस्तक / फिल्म समीक्षा
  • कविताएं
  • ई-पुस्तकालय

© 2026 Pratibha Ek Diary. All Rights Reserved.