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Home लघुकथा

सांभा, तेरे दिमाग में तो भूसा भरा हुआ है !

ROHIT SHARMA by ROHIT SHARMA
April 4, 2023
in लघुकथा
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– अरे ओ सांभा !

– हुकुम सरदार !

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– कितने आदमी थे ?

– आदमी तो एक ही था सरदार !

– वो अकेला था और तुम तीन थे ! बहुत नाइंसाफी है सांभा. सजा मिलेगी, बरोबर मिलेगी.

– आपका नमक खाया है सरदार !

– नमक खाके नमक हरामी. ऐसेईच तो नई चलेगा. ऐसेईच तो अपुन का कुर्सी चला जाएगा और फिर हम चारों को तिहाड़ में चक्की पीसना पड़ेगा.

– ऐसा नहीं होने का सरदार ! वो अपुन का अडानी भाई है न ! वो अपुन का अंबानी भाई है न ! सरदार आपने क्या यह नई देखा कि कैसे अडानी भाई ने रवीश कुमार को चारो खाने चित्त कर दिया ?

– तू बहुत भोलाभाला है रे सांभा ! तूने उसकी सदस्यता खत्म कराकर सोचा था कि इसके लिए सरदार तुझे शाबासी देगा ? तुझे ईनाम देगा ? तेरे को पता नही कि तूने कितनी बड़ी गलती कर दी है ! अब अगर वो सदस्यता बहाली के लिए अपील नहीं करेगा तो वो हीरो बन जाएगा और हम चारों विलेन बन जाएंगे !

– ऐसा नई होगा सरदार. वो अपना अंबानी भाई है न, वो जिओ के इंजीनियरों की मदद से अपुन को चुनाव जिता देगा. आप यों ही तो जिओ के ब्रांड एम्बेसडर नही बने थे !

– ना सांभा ना ! सदस्यता खत्म कराके तूने बड़ी गलती कर दी है. अपुन भी तो मंच से ‘पचास लाख की गर्लफ्रेंड’ और जाने क्या क्या बोलता रहा है. अगर उसने भी मेरे पे मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया तो क्या होएगा ? तेरा क्या होएगा ? तू तो परदे के पीछे रहता है छीछालेदर तो अपुन की होने वाली है. सदस्यता खत्म कराके तूने गेंद उसके पाले में डाल दी है.

– ना सरदार ना. टेंशन नई लेने का. अपुन सब ठीक करा देंगा. सारा मीडिया तो अपुन का है सरदार !

– अरे ओ सांभा ! अब तो मेरे कू कैमरे से डर लगने लगा है. तूने सदस्यता खत्म कराके भारी गलती कर दी है. तूने मेरी दिन अउर रातों की नींद हराम कर दी है सांभा. अब लगता है कि तेरा विभाग मेरे कू बदलना पड़ेगा. तू ठीक से काम नही कर पा रहा है.

– ना सरदार ना. सांभा के रहते टेंशन नई लेना का. अपुन का काम चल रहा है./वो अपील भी करेगा अउर उसका सदस्यता भी बहाल होगा. फिर अपुन उसकू सदन के भीतर जलील करेंगा. सदन के भीतर हराएंगा. उसका बोलती बंद कर देंगा. उसकू किसी काम का नई छोड़ेंगा. टेंशन नई लेने का सरदार. सांभा सब ठीक कर देंगा.

ना सांभा न. तेरे दिमाग में तो भूसा भरा हुआ है !

  • रामचन्द्र शुक्ल

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